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नई दिल्ली। आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने दावा किया है कि तलाशी अभियान के दौरान खुद को उड़ाने वाले संदिग्ध उसके संगठन के ही लड़ाके थे। बता दें कि श्रीलंका\के पूर्वी प्रांत में तलाशी अभियान के दौरान तीन आतंकवादियों ने खुद को उड़ा लिया था, जिसमें छह बच्चों और तीन महिलाओं सहित 15 लोग मारे गए थे। मुठभेड़ शुक्रवार को उस समय हुई, जब सुरक्षा बल ईस्टर के मौके पर गिरजाघरों और होटलों को निशाना बनाकर किए गए धमाकों के लिए जिम्मेदार स्थानीय आतंकवादी समूह नेशनल तौहीद जमात (एनटीजे) के लड़ाकों की तलाश करने निकले थे।

आईएस का प्रचार करने वाली अमाक न्यूज़ एजेंसी द्वारा शनिवार को पोस्ट किए गए एक बयान में कहा गया है कि तीनों लोग इस्लामिक स्टेट समूह का हिस्सा थे। पुलिस के साथ स्वचालित हथियारों के साथ लड़ाई कर रहे थे और जब उनका गोला बारूद खत्म हो गया तब उन्होंने अपने आप को उड़ा लिया। इसके साथ ही आईएस ने श्रीलंका में तीन जिहादियों की ओर से ‘घात लगाकर किए गए आक्रमण’ की जिम्मेदारी ली है। आईएस का दावा है कि कलमुनई शहर में हुई गोलीबारी में 17 लोग मारे गए हैं, जबकि श्रीलंका प्रशासन ने 16 लोगों के मारे जाने की पुष्टि की है। बता दें कि श्रीलंका में हुए सीरियल ब्लास्ट के दौरान 253 लोग मारे गए थे और 500 से अधिक घायल हो गए थे। इसके साथ ही अमाक ने हमले में शामिल दो कथित आतंकवादियों की तस्वीर भी जारी की है।

 

नई दिल्ली। श्रीलंका में राजधानी कोलंबो के कई हिस्सों में सोमवार को फिर कर्फ्यू लगा दिया गया। वहीं राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरीसेना ने देश में आपातकाल घोषित कर दिया है जो आज आधी रात से लागू हो जाएगी। रविवार को हुए 8 सीरियल ब्लास्ट में अब तक 290 लोगों की मौत हुई है, जिनमें भारत समेत दुनियाभर के 35 नागरिक शामिल हैं। धमाकों में कर्नाटक जनता दल सेक्युलर के 4 सदस्यों की भी मौत हो गई है।

जेडीएस के कुल 7 सदस्य छुट्टी मनाने श्रीलंका गए थे। पार्टी के 3 सदस्य लापता बताए जा रहे हैं। सरकार ने कहा है कि ज़्यादातर धमाके आत्मघाती थे। मरने वालों में भारतीय और पाकिस्तानी समेत कुल 35 विदेशी नागरिक भी हैं। धमाके में 6 भारतीय नागरिकों की मौत हुई है। अमेरिका और कनाडा ने श्रीलंका जाने के इच्छुक अपने नागरिकों को यात्रा परामर्श जारी करके उन्हें यहां के हालात को देखते हुये अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है।

कोलंबो: श्रीलंका में गिरजाघरों और फाइव स्टार होटलों में रविवार को ईस्टर के मौके पर हुए आत्मघाती हमलों समेत आठ बम धमाके हुए। रायटर के मुताबिक अब तक 290 लोगों की मौत हो गई जबकि करीब 500 लोग घायल हो गए। इस मामले में अब तक 24 लोग गिरफ्तार किए गए हैं। एएफपी न्यूज एजेंसी के हवाले से पुलिस ने बताया कि एक बम कोलंबो एयर पोर्ट के पास मिला और उसे डिफ्यूज किया गया। लिट्टे के साथ खूनी संघर्ष के खत्म होने के बाद करीब एक दशक से श्रीलंका में जारी शांति भी इस घटना से भंग हो गई।

पुलिस के प्रवक्ता रूवन गुणशेखरा ने बताया कि यह श्रीलंका में हुए अब तक के सबसे खतरनाक हमलों में से एक है। ये विस्फोट स्थानीय समयानुसार रविवार सुबह पौने 9 बजे के करीब ईस्टर प्रार्थना सभा के दौरान कोलंबो के सेंट एंथनी गिरजाघर, पश्चिमी तटीय शहर नेगोम्बो के सेंट सेबेस्टियन गिरजाघर और बट्टिकलोवा के जियोन गिरजाघर में हुए। कोलंबो के तीन पांच सितारा होटलों-शांगरी ला, सिनामोन ग्रैंड और किंग्सबरी को भी निशाना बनाया गया। गुणशेखरा ने धमाकों में 207 लोगों की मौत की पुष्टि की। हालांकि स्थानीय समाचार चैनल न्यूज फर्स्ट के मुताबिक मृतकों की संख्या 215 है।

श्रीलंका के पर्यटन विभाग के चेयरमैन किशु गोम्स ने बताया कि इन धमाकों में 33 विदेशी नागरिक मारे गये हैं। ऐसा माना जा रहा है कि किसी एक संगठन ने ही इन धमाकों को अंजाम दिया है। नेशनल हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. अनिल जयसिंघे ने 33 में से 12 विदेशी नागरिकों की पहचान की है जिनमें भारत के तीन, चीन के दो तथा पोलैंड, डेनमार्क, जापान, पाकिस्तान, अमेरिका, मोरक्को और बांग्लादेश के एक-एक नागरिक शामिल हैं।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर तीन भारतीयों की पहचान लक्ष्मी, नारायण चंद्रशेखर और रमेश के तौर पर की है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा, 'कोलंबो में भारतीय उच्चायुक्त ने जानकारी दी है कि नेशनल हॉस्पिटल ने उन्हें तीन भारतीयों की मौत के बारे में सूचित किया है।' इन धमाकों में भारतीय लोगों समेत करीब 500 लोग घायल हुए हैं। रविवार को हुए इन धमाकों की जिम्मेदारी अभी तक किसी संगठन ने नहीं ली है।

गुणशेखरा ने संवाददाताओं को बताया, पुलिस फिलहाल इस बात की पुष्टि करने की स्थिति में नहीं है कि क्या सभी हमले आत्मघाती थे। हालांकि उन्होंने कहा कि नेगोम्बो गिरजाघर में हुए बम धमाके से आत्मघाती हमले के संकेत मिलते हैं। एक अज्ञात अधिकारी ने बताया कि एक आत्मघाती हमलावर ने सिनामोन ग्रैंड होटल के रेस्तरां में विस्फोट कर खुद को उड़ा दिया।

गुणशेखरा ने कहा कि नेशनल हॉस्पिटल में 66 शव रखे गए हैं तथा 260 घायलों का इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि 104 शव नेगोम्बो अस्पताल में रखे गए हैं तथा यहां 100 घायलों का इलाज चल रहा है। उन्होंने कहा कि बाद में राजधानी के दक्षिणी उपनगर में कोलंबो चिड़ियाघर के पास एक शक्तिशाली धमाका हुआ जिसमें दो लोगों की मौत हो गई। पुलिस का एक दल ओरुगोदावट्टा क्षेत्र के एक घर में जब जांच के लिए पहुंचा तक वहां मौजूद एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। इस विस्फोट में तीन पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। यह आठवां धमाका है।

आठवें विस्फोट के तुरंत बाद सरकार ने तत्काल प्रभाव से कर्फ्यू लगा दिया। यह कर्फ्यू अगली सूचना तक प्रभावी रहेगा। गुणशेखरा ने कहा कि इन धमाकों के सिलसिले में अब तक 13 संदिग्ध गिरफ्तार किए गए हैं।

श्रीलंका के रक्षा राज्य मंत्री रूवन विजयवर्धने ने कहा, 'हमारा मानना है कि ये सुनियोजित हमले थे और इनके पीछे एक समूह था।' श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा, ‘मैं पूरी तरह से अप्रत्याशित घटना से सदमे में हूं। सुरक्षाबलों को सभी जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।’

प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने इसे कायराना हमला बताते हुए कहा कि उनकी सरकार स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने ट्वीट किया, 'मैं श्रीलंका के नागरिकों से दुख की इस घड़ी में एकजुट एवं मजबूत बने रहने की अपील करता हूं। सरकार स्थिति को काबू में करने के लिए तत्काल कदम उठा रही है।'

विक्रमसिंघे ने बाद में शाम को कहा कि उनकी सरकार को हमले की आशंका के बारे में सूचना मिली थी लेकिन इसे रोकने के पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि मिली सूचना के आधार पर साजिश करने वालों के स्थानीय होने की जानकारी मिली थी। राजधानी में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अस्थायी रोक लगा दी है।

श्रीलंका के आर्थिक सुधार एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री हर्षा डी सिल्वा ने कहा, ‘बेहद भयावह दृश्य। मैंने लोगों के शरीर के अंग इधर-उधर बिखरे देखा।’ कोलंबो में भारतीय उच्चायोग ने कहा कि वह श्रीलंका की परिस्थितियों की निगरानी कर रहा है। उच्चायोग ने ट्वीट किया, ‘हम स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। भारतीय नागरिक किसी भी तरह की सहायता, मदद और स्पष्टीकरण के लिए इन नंबरों पर फोन कर सकते हैं- +94777903082, +94112422788, +94112422789 ।’

उच्चायोग ने एक अन्य ट्वीट में कहा, ‘दिए गए नंबरों के अलावा भारतीय नागरिक किसी भी सहायता के लिए +94777902082, +94772234176 नंबरों पर भी फोन कर सकते हैं।’ पहले धमाकों की खबर कोलंबो के सेंट एंथनी गिरजाघर और राजधानी के बाहर नेगोम्बो में सेंट सेबेस्टियन गिरजाघर से आई। सेंट सेबेस्टियन गिरजाघर के फेसबुक पेज पर अंग्रेजी में लिखी गई एक पोस्ट में कहा, 'हमारे गिरजाघर में एक बम धमाका हुआ है, यदि आपके परिजन यहां हैं तो कृपया आइये और मदद कीजिए।' सोशल मीडिया पर घूम रही तस्वीरों में सेंट सेबेस्टियन गिरजाघर को धमाके में व्यापक नुकसान नजर आ रहा है।

सरकारी डेली न्यूज की खबर के मुताबिक, इन विस्फोटों को देखते हुए भंडारनायके अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

कोलंबो// एक के बाद एक लगातार 6 धमाकों से पूरा श्रीलंका दहल गया है। रविवार को हुए इन धमाकों में 3 चर्च और 3 फाइव स्टार होटलों को निशाना बनाया गया है। न्यूज एजेंसी एएफपी ने बताया कि धमाकों में कम से कम 156 लोग मारे गए हैं, जबकि 400 के आसपास घायल हैं। मरने वाले लोंगों में 35 लोग विदेशी हैं। पहला धमाका कोलंबो में सैंट एंटनी चर्च और दूसरा धमाका राजधानी के बाहर नेगोम्बो कस्बे के सेबेस्टियन चर्च में हुआ। वहीं तीसरा धमाका पूर्वी शहर बाट्टिकालोआ के चर्च में हुआ। इसके अलावा जिन होटलों को निशाना बनाया गया है, उनमें द शांगरीला, द सिनामॉन ग्रैंड और द किग्सबरी शामिल हैं। 

कोलंबो नैशनल हॉस्पिटल के प्रवक्ता डॉक्टर समिंडी समाराकून का कहना है कि करीब 280 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। न्यूज एजेंसी एएफपी का कहना है कि मरने वालों की सबसे ज्यादा संख्या कोलंबो में है, जहां 3 फाइव स्टोर होटल और एक चर्च को निशाना बनाया गया है। बम धमाके के बाद श्रीलंका के प्रधानमंत्री ने सुरक्षा समिति की आपातकालीन बैठक बुलाई है। 

यह धमाका उस समय हुआ, जब ईस्टर की प्रार्थना के लिए लोग चर्च में एकत्रित हुए थे। पुलिस ने बताया कि स्थानीय समयनुसार पहला धमाका सुबह 8:45 पर हुआ। अभी तक किसी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। नेगोम्बो के सेबेस्टियन चर्च ने एक फेसबुक पोस्टर लिखा, 'हमारे चर्च में एक बम धमाका हुआ है। कृपया आइए और हमारी मदद कीजिए।' 
 
श्री लंका राष्ट्रपति के राष्ट्रपति मैथरीपाला सिरीसेना ने कहा कि वह हमले की खबर के बाद से सदमे में हैं। उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। वहीं वहां के वित्त मंत्री मंगला समरवीरा ने अपनी ट्वीटर पर लिखा, 'हमले में कई निर्दोष लोग मारे गए हैं। यह हमला पूरी तैयारी के साथ किया गया, ताकि हत्या कर अराजकता फैलाई जा सके।' 
खबर के बाद भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर कहा कि मैं कोलंबो में भारतीय हाई कमीशनर के लगातार सम्पर्क में हूं। हम स्थिति पर पूरी तरह नजर बनाए हुए हैं। 
 
 
 

 

नयी दिल्ली, 12 अप्रैल : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गुरूवार को रूस द्वारा ‘आर्डर आफ द सेंट एंड्रू द एपोस्टल’ सम्मान के लिये नामित किया गया । भारत और रूस के बीच द्विपक्षीय संबंधों को प्रोत्साहित करने में उत्कृष्ठ योगदान के लिये मोदी को इस सम्मान के लिये चुना गया । रूसी दूतावास के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी । 

अधिकारी ने बताया कि ‘आर्डर आफ द सेंट एंड्रू द एपोस्टल’ रूस का उच्चस्थ सरकारी सम्मान है । 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को प्रोत्साहित करने में उत्कृष्ठ योगदान के लिये इस सम्मान के लिये चुना गया । 

सऊदी अरब के बाद अब रूस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेंट्र एंड्रयू सम्मान देने की घोषणा की है। 12 अप्रैल को उन्हें सम्मान देने की घोषणा रूसी दूतावास ने की। यह रूस का सबसे बड़ा सम्मान है। प्रधानमंत्री को भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने में असाधारण सेवाओं के लिए इससे सम्मानित किया जाएगा।

प्रधानमंत्री को जो सम्मान मिल रहा है वह रूसी प्राधिकरण द्वारा 1698 में शुरू किया गया था। यह रूस का पहला और सर्वोच्च नागरिक माना जाता है। सोवियत शासन के दौरान इस सम्मान को खत्म कर दिया गया था। हालांकि साल 1998 में एक बार फिर से इसे देने की प्रथा शुरू हुई।

 

एम्स्टर्डम, 12 अप्रैल (एएफपी) अमेरिकी सीमा पर एक छोटी लड़की की असहाय रूप से रोने की तस्वीर ने प्रतिष्ठित ‘वर्ल्ड प्रेस फोटो’ पुरस्कार जीता है। यह तस्वीर उस वक्त ली गई थी जब बच्ची और उसकी मां को अमेरिकी अधिकारी हिरासत में ले कर उनकी जांच कर रहे थे।

पुरस्कार के जजों ने कहा कि अनुभवी गेट्टी फोटोग्राफर जॉन मूर ने यह तस्वीर ली है, जब होंडुरास की नागरिक सैंड्रा सांचेज और उसकी बेटी यनेला ने पिछले साल अवैध रूप से अमेरिकी-मैक्सिकन सीमा पार की थी। इस तस्वीर में दिखने वाली हिंसा सामान्य से अलग है, यह मानसिक है।

रोती हुई बच्ची की तस्वीर दुनिया भर में प्रकाशित हुई थी। तब सीमा पर कड़ी जांच संबंधी अमेरिका की विवादित नीति के कारण हजारों प्रवासियों को उनके बच्चों से अलग कर दिया गया था, जिसे लेकर दुनिया भर में अमेरिकी सरकार की आलोचना हुई थी।

निर्णायक मंडल में शामिल जजों ने कहा कि अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा अधिकारियों ने बाद में कहा कि यनेला और उसकी माँ अलग नहीं हुए थे। लेकिन सार्वजनिक रूप से हुये चौतरफा विरोध के चलते राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले साल जून में उस नीति को वापस ले लिया था।

मूर पिछले साल 12 जून की अंधेरी रात को रियो ग्रांड वैली में यूएस बॉर्डर पैट्रोल एजेंटों की तस्वीरें ले रहे थे, जब वे मां-बेटी उन लोगों की समूह में आए, जिन्होंने सीमा पार करने की कोशिश की थी।

उसके कुछ ही समय बाद मूर ने अमेरिका के नेशनल पब्लिक रेडियो के प्रसारक को एक साक्षात्कार में कहा था, ‘‘मैं उनके चेहरे पर, उनकी आंखों में साफ-साफ डर देख सकता था।’’ 

पाकिस्तान के बालाकोट में पाकिस्तानी आतंकियों के शिविर पर भारत के हमले के 43 दिन बाद बुधवार को पाकिस्तानी सरकार घटनास्थल पर पाकिस्तान स्थित अंतरराष्ट्रीय मीडिया के सदस्यों और विदेशी राजनयिकों को लेकर गई. हालांकि, पाकिस्तान की मिलिट्री हर जगह पत्रकारों की निगरानी कर रही थी. जब मीडिया कर्मियों ने स्थानीय लोगों से बात करने की कोशिश की तो उनसे कहा गया, "जल्दी करें.. ज्यादा लंबी बात ना करें."

कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के 40 जवानों के शहीद होने के बाद भारतीय वायुसेना ने 26 फरवरी को अटैक किया था. भारत ने कहा था कि एयर स्ट्राइक से बालाकोट में चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के ठिकाने को तबाह कर दिया गया. हालांकि, पाकिस्तान लगातार आतंकी कैंप होने से इनकार करता रहा है और उसका कहना है कि एयर स्ट्राइक का जहां दावा किया जा रहा है, वहां पर मदरसा है.

घटना के तुरंत बाद पाकिस्तान सरकार ने मीडिया को आश्वस्त किया था कि अगले ही दिन उन्हें उस जगह ले जाएगी, जहां भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक करने का दावा किया. हालांकि, बाद में वह इससे पीछे हट गई.

आईएएनएस ने बीबीसी के हवाले से कहा है कि इस्लामाबाद से एक हेलीकाप्टर से ले जाए गए संवाददाता ने बताया कि वे मनसेरा के पास की एक जगह पर उतरे. इसके बाद करीब डेढ़ घंटा वह कठिन पहाड़ी रास्तों से गुजरे.

मीडिया टीम को तीन अलग-अलग जगहें दिखाई गईं. पत्रकारों को बताया गया कि भारतीय वायुसेना ने यहां पर पेलोड गिराए थे. मीडिया को वहां केवल कुछ गड्ढे और कुछ जड़ से उखड़े पेड़ दिखे.

पत्रकारों ने बताया कि ये जगहें इंसानी आबादी से अलग-थलग थीं. इस इलाके में घर भी एक-दूसरे से काफी दूरी पर स्थित हैं.

जब अधिकारियों से पूछा गया कि इस टूर के आयोजन में इतनी देरी क्यों हुई तो उन्होंने कहा कि 'अस्थिर हालात ने लोगों को यहां तक लाना मुश्किल कर दिया था. अब उन्हें लगा कि मीडिया के टूर के आयोजन के लिए यह सही वक्त है.'

इसके साथ ही अधिकारियों ने इस बात से इनकार किया कि एक समाचार एजेंसी की टीम और स्थानीय पत्रकारों को इस परिसर में दाखिल होने से पहले रोका गया था.

जब पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशन्स के महानिदेशक मेजर जनरल आसिफ गफूर से पूछा गया कि संवाददाताओं ने मदरसे के बोर्ड पर मौलाना यूसुफ अजहर का नाम देखा तो उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया.

एक बोर्ड पर लिखा था कि मदरसा 27 फरवरी से 14 मार्च तक बंद रहा. एक शिक्षक ने कहा कि आपातकालीन उपाय के तहत यह कदम उठाया गया.

पिछले काफी वक्त से भारत-पाक के रिश्ते खराब चल रहे हैं. कुछ ही दिन पहले पाक के विदेश मंत्री ने कहा था कि उन्हें ऐसी जानकारी मिली है कि भारत फिर से सैन्य अटैक करने की तैयारी कर रहा है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने मुल्तान में पत्रकारों से कहा- 'हमारे पास विश्वसनीय जानकारी है कि भारत पाकिस्तान पर नया हमला करने की रणनीति बना रहा है. हमारी जानकारी के मुताबिक, 16 से 20 अप्रैल के बीच ये हो सकता है.

तब पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने यह भी कहा कि यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल के पांच स्थायी सदस्यों से पाकिस्तान अपनी चिंता जाहिर कर चुका है. हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के दावों को खारिज कर दिया था.

कश्मीर के पुलवामा में कार से किए गए सुसाइड बम धमाके में 14 फरवरी को 40 सीआरपीएफ के जवान शहीद हो गए थे. यह हमला पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन ने किया था. इसके बाद 27 फरवरी को भारत ने पाकिस्तान के बालाकोट में एयरस्ट्राइक की थी.

खैबर पख्तूनख्वाह में स्थित बालाकोट में आतंकी कैंप चलाया जा रहा था. भारत ने एयरस्ट्राइक से आतंकियों के ठिकाने को तबाह कर दिया था. भारत की ओर से की गई कार्रवाई के बाद, बालाकोट इलाके को पाकिस्तानी सेना ने पूरी तरह से घेर लिया था.

बालाकोट में भारतीय वायु सेना द्वारा की गई एयरस्ट्राइक से हुई तबाही को छिपाने के लिए पाकिस्तान ने कई बड़े झूठ बोले थे. फर्जी तस्वीरों और बयानों के जरिये पाकिस्तान ने दुनिया को गुमराह करने की कोशिश की थी.

भारत के लड़ाकू विमानों ने तड़के मुजफ्फराबाद सेक्टर से घुसकर पाकिस्तान के बालाकोट में बम गिराए थे. इस बमबारी में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कैम्प तबाह हो गए थे.

भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी ठिकानों पर बम बरसा कर पुलवामा हमले का बदला लिया था.

स्ट्राइक वाली जगह पीओके के मुजफ्फराबाद से करीब 40 किमी दूरी पर स्थित थी. भारत की बमबारी के बाद बालाकोट के लोगों में खौफ का माहौल हो गया था. लोगों का लग रहा था कि भारत कहीं दोबारा ना हमला कर दे.

नई दिल्ली : आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अपने ही घर में घिर गए हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने आतंकवादियों एवं आतंकी संगठनों पर कार्रवाई न करने के लिए इमरान सरकार पर निशाना साधा है। बिलावल ने कहा कि पाकिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो रही है जिससे दुनिया में पाकिस्तानी की छवि खराब हुई है। उन्होंने इमरान सरकार से नेशनल एक्शन प्लॉन (एनएपी) लागू करने की मांग की है।

बिलावल ने कहा, 'दुनिया को हम क्या पैगाम दे रहे हैं। सरकार प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की लड़ाई लड़ रही है। इन संगठनों के खिलाफ न तो कोर्ट में सुनवाई हो रही है और न ही उनके खिलाफ कोई फैसला आता है लेकिन यहां के प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को फांसी पर चढ़ा दिया जाता है। यहां शहीद बेनजीर भुट्टो और आसिफ अली जरदारी को एक फोन कॉल पर सजा दे दी जाती है। इस मुल्क में बच्चों को मारने वालों और दूसरे देश में जाकर दहशतगर्दी करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती है।' भुट्टो ने सवाल किया कि किसी को एक फोन कॉल पर सजा हो जाती है जबकि आतंकवादी खुलेआम घूम रहे हैं।

पीपीपी नेता ने दावा किया कि इमरान सरकार में कम से कम तीन ऐसे मंत्री हैं जिनके प्रतिबंधित आतंकवादी समूहों से संबंध हैं। बिलावल ने इमरान सरकार से नेशनल एक्शन प्लान लागू कर अपनी गंभीरता दिखाने के लिए कहा है। पीपीपी नेता ने इमरान सरकार के समक्ष तीन शर्तें रखी हैं। पहली शर्त संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति का गठन, दूसरी प्रतिबंधित आतंकवादी गुटों के समर्थन में दिए गए बयानों से दूरी बनाने और तीसरी आतंकी गुटों से संपर्क रखने वाले तीन मंत्रियों को हटाने की रखी है।

पुलवामा में गत 14 फरवरी को सीआरपीएफ काफिले पर हुए हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के संबंध तनाव के दौर से गुजर रहे हैं। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए। इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली। इसके बाद भारतीय वायु सेना ने 26 फरवरी को पाकिस्तान में जैश के सबसे बड़े प्रशिक्षण केंद्र को निशाने बनाते हुए हमले किए। जबकि पाकिस्तान वायु सेना ने 27 फरवरी को कश्मीर के कृष्णा घाटी में भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की कोशिश की। 

वहीं, संयुक्त राष्ट्र में मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने वाले प्रस्ताव पर चीन ने बुधवार को एक बार फिर अड़ंगा लगा दिया। मसूद अजहर को प्रतिबंधित करने के लिए यह चौथा वैश्विक प्रस्ताव था लेकिन चीन की 'तकनीकी आपत्ति' के बाद मसूद को राहत मिल गई। हालांकि चीन के इस कदम से दुनिया के बड़े देश नाराज हैं और वे अपनी अगली कार्रवाई के बारे में विचार कर रहे हैं। 

नई दिल्ली। अमेरिका पुलवामा आतंकी हमले के गुनाहगार जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को घेरने के लिए भारत का लगातार साथ दे रहा है। अमेरिका ने चीन को कहा कि मसूद अजहर ग्लोबल आतंकी घोषित होना चाहिए। अमेरिका की ओर से बयान में कहा गया है कि भारत-अमेरिका साथ में काम कर रहे हैं। जैश-ए-मोहम्मद के अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन है और मसूद उसका सरगना है ऐसे में उसे भी ग्लोबल आतंकी घोषित किया जाना चाहिए। मसूद अजहर भारतीय उपमहाद्वीप में शांति के लिए खतरा बना हुआ है।

आपको बताते जाए कि संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा समिति की बैठक में यह तय हो जाएगा कि मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित किया जाए या नहीं। भारत के इस प्रयास में अमेरिका खुलकर सामने आ गया है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता रॉबर्ट ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका और चीन इस बात पर सहमत हैं कि क्षेत्र में शांति स्थापित होनी चाहिए। अगर जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर बैन नहीं लगता है कि शांति का मिशन फेल हो जाएगा।

 

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