अन्य ख़बरे

  • 04
  • मई

भुवनेश्वर चक्रवाती तूफान फैनी का ओडिशा के तटीय क्षेत्रों से निकलकर और कमजोर पड़कर बांग्लादेश की तरफ बढ़ चुका है। ओडिशा में इसके चलते 12 लोग मारे गए। 20 साल पहले यानी 1999 में इसी तरह का सुपर साइक्लोन ओडिशा से टकराया था। तब करीब 10 हजार लोग इस आपदा का शिकार बने थे। इस बार क्षति इसलिए कम हुई क्योंकि राज्य और केंद्र सरकार को काफी पहले तूफान की जानकारी मिल चुकी थी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने की पूरी तैयारी युद्धस्तर पर की गई थी। इस बार 12 लाख लोगों को बचाया गया। 26 लाख लोगों को मैसेज कर तमाम जानकारियां दी गईं। इसके अलावा 43 हजार कर्मचारियों और वॉलंटियर्स को हालात से निपटने के लिए तैनात किया गया था।

ओडिशा और केंद्र सरकार के तमाम संबंधित विभाग फैनी से निपटने के लिए तैयार थे। करीब 10 लाख लोगों पर इसका असर होता। आपदा प्रबंधन के 1 हजार प्रशिक्षित कर्मचारी खतरे की आशंका वाली जगहों पर भेजे गए। 300 हाईपावर बोट हर पल तैनात रहीं। टीवी, कोस्टल साइरन और पुलिस के अलावा हर उस साधन का उपयोग किया गया जो आमजन की सुरक्षा के लिए जरूरी था। इसके लिए उड़िया भाषा का ही इस्तेमाल किया गया। संदेश साफ था- तूफान आ रहा है, शिविरों में शरण लें।

अमेरिकी मीडिया भी मान रहा है कि भारत ने एक बहुत बड़ी आपदा का सामना पूरी सफलता से किया। इसके लिए सही रणनीति अपनाई गई, उपयुक्त और आधुनिक संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। यही वजह है कि करीब 10 लाख लोगों को सुरक्षित रखा जा सका। ओडिशा और केंद्र सरकार ने मिलकर काफी पहले से इसकी तैयारी की थी। 1999 के बाद से ही ओडिशा में हजारों शेल्टर होम बनाए गए थे। मौसम विभाग के चार सेंटर तूफान की हर हरकत पर न सिर्फ पैनी नजर रख रहे थे बल्कि उसके हिसाब से अपनी योजना भी तैयार कर रहे थे।

आपदा प्रबंधन में देश के कुछ खास तकनीकी संस्थानों की मदद ली गई। इनमें आईआईटी खड़गपुर का नाम अहम है। मौसम विभाग के वैज्ञानिकों ने समझ लिया था कि बंगाल की खाड़ी के गरम पानी से तूफान का असर ज्यादा होगा। लिहाजा, तैयारियों का स्तर बेहतर रखा गया। ओडिशा गरीब राज्य है। इसलिए संसाधनों का इस्तेमाल समझदारी से किया गया। एनडीआरएफ की टीमों को काफी पहले संबंधित क्षेत्रों में पहुंचा दिया गया था। मछुआरों से संपर्क कर उन्हें तमाम हिदायतें दी गईं थीं। लकड़ी की नावों को किनारों पर सुरक्षित पहुंचा दिया गया था। बुजुर्ग, बच्चों और महिलाओं को शिविरों में सबसे पहले पहुंचाया गया।

  • 01
  • मई

नई दिल्ली/पुरी. फैनी बेहद गंभीर चक्रवाती तूफान में बदल गया है। इसके शुक्रवार दोपहर तक ओडिशा के तट गोपालपुर और चांदबली के बीच से गुजरने की आशंका है। मौसम विभाग ने पूरे राज्य में यलो वॉर्निंग जारी की है। उधर, चुनाव आयोग ने यहां के 11 जिलों में राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने के मकसद से आचार संहिता हटा ली है। 

ओडिशा तट से टकराते वक्त फैनी की रफ्तार 175 से 185 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास होगी जो 205 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। बौध, कालाहांडी, संबलपुर, देवगढ़ और सुंदरगढ़ समेत कुछ स्थानों पर मूसलाधार बारिश होने की आशंका है। इस बीच ओडिशा में अलर्ट जारी करते हुए स्कूल-कॉलेजों की 2 मई तक छुट्टी कर दी गई है।

कहां, कब पहुंचेगा तूफान?

d

इलाके खाली कराने का सुझाव
मौसम विभाग ने इन राज्‍यों के तटीय इलाके को खाली करने का सुझाव दिया है। मौसम विभाग ने मछुआरों को गहरे समुद्र में न जाने की सलाह दी है। खासकर 2 मई से 4 मई के बीच
 
ओडिशा में इन 11 जिलों में हटाई गई आचार संहिता 
चुनाव आयोग ने ओडिशा के पुरी, जगतसिंहपुर, केंद्रपाड़ा, बालासोर, मयूरभंज, गजपति, गंजम, खोरधा, कटक और जाजपुर जिलाें से आचार संहिता हटा ली है, ताकि राहत और बचाव कार्य में किसी तरह की कोई बाधा न आए। राज्य सरकार ने आयोग से इस संबंध में प्रस्ताव रखा था। मौसम विभाग के चक्रवात चेतावनी प्रभाग का कहना है कि फिलहाल फैनी पुरी से 760 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पश्चिम और आंध्रप्रदेश के विशाखापट्टनम से 560 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिणपूर्व में है। 

4 राज्यों के लिए अग्रिम राहत राशि जारी

फैनी की आशंका को देखते हुए केंद्र ने चार राज्यों को 1086 करोड़ रुपए का एडवांस फंड जारी किया, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों से निपटा जा सके। नौसेना भी हाईअलर्ट पर है। फैनी को पिछले साल आए तितली तूफान से भी ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है। तितली तूफान में 60 लोगों की मौत हुई थी।

अगले 72 घंटों तक उप्र में तेज बारिश के आसार
मौसम विभाग का अनुमान है कि फैनी की वजह से अगले 72 घंटों के दौरान उप्र में तेज बारिश हो सकती है। 2 मई से 4 मई तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश के साथ 30 से 40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से हवा भी चलेगी। मौसम में बदलाव की वजह से उप्र के लोगों को गर्मी से भी राहत मिलने वाली है। हालांकि, इसकी वजह से पूर्वी उत्तर प्रदेश में चुनाव प्रचार पर असर पड़ने की संभावना है। 

  • 01
  • मई

नई दिल्‍ली : श्रीलंका में बीते सप्‍ताह हुए बम विस्‍फोटों के बाद सरकार ने वहां फौरी तौर पर किसी भी तरह से चेहरा ढकने पर रोक लगा दी है, जिसका हवाला देते हुए शिवसेना ने अब भारत में भी 'बुर्का पर बैन' लगाने की मांग की है। शिवसेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' के संपादकीय में इस तरह की मांग रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से देश में बुर्का या नकाम को प्रतिबंध‍ित करने की मांग की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बुधवार के अयोध्‍या जिले के दौरे का हवाला देते हुए इसमें लिखा गया है, 'रावण की लंका में जो हुआ वो राम की अयोध्या में कब होगा?' शिवसेना ने अपनी इस मांग को 'राष्‍ट्रहित में' करार देते हुए इस संबंध में फ्रांस, न्‍यूजीलैंड, ब्रिटेन, ऑस्‍ट्रेलिया का भी जिक्र किया और कहा कि दुनिया के ये देश अगर अपने यहां आतंकी हमले होने पर बुर्का को प्रतिबंधित करने का फैसला ले सकते हैं तो भारत क्‍यों नहीं?  

शिवसेना ने इस क्रम में जम्‍मू एवं कश्‍मीर में आतंकवाद की स्थिति का भी जिक्र किया। 'बुर्का बैन' को 'सर्जिकल स्‍ट्राइक जितना हिम्‍मत का कार्य' बताते हुए पार्टी ने यह भी कहा कि अगर किसी तरह की धर्मांधता, रूढ़‍ि या परंपरा राष्‍ट्रीय सुरक्षा के आड़े आती है तो उसे जरूर खत्‍म कर दिया जाना चाहिए। पार्टी ने इस क्रम में श्रीलंका के राष्‍ट्रपति मैत्रिपाल सिरिसेना की तारीफ करते हुए भारत सरकार से भी ऐसा फैसला लेने की अपील की।

यहां उल्‍लेखनीय है कि श्रीलंका में चेहरा ढकने पर प्रतिबंध ईस्टर (21 अप्रैल) के मौके पर हुए सिलसिलेवार बम विस्फोटों के बाद लगाया गया। इसमें किसी भी तरह से चेहरा ढकने पर रोक लगा दी गई है। यह फैसला 'आपातकालीन कानून' के तहत लिया गया है, जो स्थायी नहीं है। श्रीलंका में हुए विस्‍फोटों में मरने वालों की संख्‍या आधिकारिक तौर पर 253 बताई गई है। हालांकि शिवसेना ने अपने संपादकीय में अनाधिकारिक तौर पर 500 से अधिक लोगों के इन विस्‍फोटों में जान गंवाने की बात कही है। इन हमलों की जिम्‍मेदारी इस्‍लामिक स्‍टेट (आईएस) ने ली है।

  • 28
  • अप्रै

आज हम आपको आलू से बनी एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर जाने के लिए लोग लाखों रुपए खर्च करते हैं। अगर आप सोच रहे हैं कि इसमें ऐसा क्या है कि लोग लाखों खर्च कर रहे हैं तो चलिए हम बताते हैं। क्या कभी आपने आलू के अंदर रात गुजारने के बारे में सोचा है। चौक गए ना आप भी। अगर नहीं तो आइए आज हम आपको बताते हैं आलू के अंदर बने लग्जरी होटल के बारे में, इसके अंदर की तस्वीर देखकर आपका मन भी आलू के अंदर रहने को करेगा।

आलू से बनाया यह होटल अमेरिका के राज्य इदाहो में बनाया गया है। इस आलू का वजन 6 टन है। इसके अंदर जाने के बाद आपकी आंखे खुली रह जाएगी। यह आलू का बना हुआ होटल है। जिसमें जाकर एक रात रहने के लिए 247 डॉलर यानी 18 हजार रुपए देने पड़ते हैं। Airbnb नाम की वेबसाइट पर आप इस होटल के लिए बुकिंग कर सकते हैं। इस आलू को स्टील, प्लाटर और कंकरीट से बनाया गया है।

अगर आप जाना चाहते हैं तो इस ‘आलू’ में दो लोग आराम से रातें गुजार सकते हैं। यानि अगर किसी खास जगह नाईट स्टे करना है तो ये आलू अच्छी जगह है। इस आलू में अंदर आपको एक छोटा सा बाथरूम, किचन, आग जालने के लिए जगह मिलेगी। बाकी ‘आलू’ को अंदर से ठंडा-ठंडा कूल रखने के लिए एयर कंडिशनर भी लगाए गए हैं। इस आलू के अंदर बने होटल का इंटेरियर डिजाइन काफी खूबसूरत किया है। इसमें लोगों के ठहरने से लेकर खाने- पीने तक सारी व्यवस्थाएं की गई हैं।

 

पृष्ठ 1 का 33