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  • 06
  • अप्रै

नई दिल्ली । दक्षिणी एशिया के सबसे पुराने व सबसे लंबे राजमार्ग के तौर पर जाने जाने वाले ग्रांड ट्रंक रोड का अब लोग मूल स्वरूप में दीदार कर सकेंगे। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण(एएसआइ) ने इस रोड का करीब चार किलोमीटर का हिस्सा बिहार के सोन नदी में खोज निकाला है। यह रोड 18 फुट चौड़ी है। आज से करीब 500 वर्ष पहले इसका निर्माण शेरशाह सूरी ने करवाया था।

इस खोज से एएसआइ उत्साहित होकर अब इस संबंध में शोध कराने की तैयारी में है। पुरातत्वविद् शंकर शर्मा ने बताया कि ग्रांड ट्रंक रोड के बारे में लोग अक्सर पढ़ते और सुनते आए हैं। मौजूदा समय में इसे जीटी रोड के नाम से भी जानते हैं लेकिन अभी तक इसके मूल स्वरूप को किसी ने नहीं देखा था।

अब इस ऐतिहासिक राजमार्ग को बिहार के सोन नदी से मूल स्वरूप में देखा जा सकता है। उन्होंने बताया कि पिछले साल आई बाढ़ के कारण इस रोड के ऊपर जमी रेत हटी, जिसके बाद इसका पता चला। यहां का निरीक्षण व शोध करने पर इसके वास्तविक प्रमाण सामने आए।

रोहतास और औरंगाबाद जिले के बीच बहने वाली सोन नदी में 18 फुट चौड़े पत्थरों से निर्मित पुल को साफ देखा जा सकता है। अब इसके और वास्तविक रूप की खोज की जा रही है।

एएसआइ के महानिदेशक राकेश तिवारी ने बताया कि ग्रांड ट्रंक मार्ग की खोज एएसआइ की एक बड़ी उपलब्धि है। इस खोज के बाद अब इस रोड के और प्रमाण मिलने की उम्मीद जगी है। एएसआइ ऐतिहासिक और पुराने शाही मार्गो पर शोध कार्य करा रहा है। अब इस दिशा में शोध किया जाएगा।

क्या है इस रोड का इतिहास

ग्रांड ट्रंक रोड का निर्माण शेर शाह सूरी ने किया था। यह मार्ग हावड़ा के पश्चिम में स्थित बांग्लादेश के चटगांव से शुरू होकर लाहौर (पाकिस्तान) से होते हुए काबुल तक जाता है।

पुराने समय में इसे, उत्तरपथ, शाह राह-ए-आजम, सड़क-ए-आजम और बादशाही सड़क के नामों से भी जाना जाता था। यह मार्ग, मौर्य साम्राज्य के दौरान अस्तित्व में था।

  • 03
  • अप्रै

"आज आखिरी नवरात्रा माँ का... खूब धूमधाम से करने का मन था ममता का , नौ कन्याओं को न्यौता देने निकली ममता को सिर्फ चार कन्याएं ही मिल पाई मुश्किल से... अब क्या करे , कैसे उद्यापन करे गी... कुछ वर्ष पहले तक कभी ऐसी समस्या नही होती थी , पर अब कुछ वर्षों से ....

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"याद आने लगी अपनी बहू , जिसको उसने दो साल पहले घर से निकाल दिया था... कसूर था सिर्फ बेटियों को जन्म देना , दो बार उसने बहू का गर्भपात सिर्फ कन्या भ्रूण की वजह से कराया था... जब कहा था ममता ने अपनी बहू को 'कलमुँही निकल जा यहां से अगर तो पोते को जन्म नही दे सकती तो तेरे लिए मेरे घर में भी कोई जगह नही' और तीन बेटियों के साथ बहू रोती बिलखती मायके चली गई"...
"अचानक ममता उठी और घर से निकल पड़ी अपनी बहू को वापिस घर लाने के लिए... सास को सामने देखकर हैरान रह गई सुमन... 'मांजी आप अचानक यहाँ, "हाँ बहू, अपने घर चलो..."मेरे घर की लक्ष्मी हो तुम, कहा है मेरी पोतियां , कहते हुए ममता रो पड़ी और बहू को गले से लगा लिया... आज उसे कन्याओं का महत्व समझ आ गया था , देवी माँ तो तभी खुश होंगी ना जब गृहलक्ष्मी खुश रहेगी"...
"मिटटी की सोंधी खुशबु सी होती है बेटियां ,आँगन की तुलसी पूजा सी होती है बेटियां ,मरती रहेंगी बेटियां तो बहू कहाँ से लाओगे ,बेटों को पैदा करने को जननी कहाँ से पाओगे"...???

रश्मि डी जैन
नई दिल्ली

  • 03
  • अप्रै

मन करता है
ज़िन्दगी की स्याही को
पानी की कलम से मिटा दूं
सारी यादें भूल जाऊं
नई कलम से
नयी इबारत लिखूँ
जबान सोच कर खोलूँ
जितना आवश्यक उतना ही बोलूं
सोच समझ कर कदम बढाऊँ
नित नए रिश्ते बनाऊं
हर रिश्ता हृदय से निभाऊं
न किसी से दूर रहूँ
न किसी के पास जाऊं
सच्चाई का दामन थाम लूँ
न झूठ बोलूं न झूठ सुनूं
दायरे में सिमट कर भी
सब का चहेता बन जाऊं

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
वरिष्ठ चिकित्सक,अजमेर

  • 03
  • अप्रै

बार बार
भिन्न चेहरा दिखाऊं
कभी सावन
कभी भादो हो जाऊं
तूफ़ान भी नहीं हूँ
क्रोध में रिश्तों को
तहस नहस कर दूँ
आंधी भी नहीं हूँ
नाराजगी की
तेज हवाओं से
किसी के मन में
दहशत भर दूँ
शीतल हवा का झोंका हूँ
जिसे स्पर्श कर लूँ
मन को सुन्दर
अहसासों से भर दूँ
दुबारा लौट कर आऊं
ऐसी इच्छा मन में भर दूँ

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
वरिष्ठ चिकित्सक,अजमेर