अन्य ख़बरे

  • 25
  • मार्च

सोचता हूँ जब अपेक्षाएं
आशाओं की कसौटी
पर खरी नहीं उतरती
अपेक्षा रखूँ ही क्यों
फिर ध्यान आता है
त्रुटी अपेक्षाओं की नहीं
आशाओं की है
अगर आशाएं नहीं हों
अपेक्षा पूरी हो ना हो
दुःख हो ही नहीं सकता
मन बीच में बोल उठता है
अपेक्षाएँ आशाएँ
मनुष्य की दुर्बलता हैं
उनसे कोई बच भी
तो नहीं सकता
मन को समझाता हूँ
दृढ विश्वास से दुर्बलता को
मनुष्य ही तो शक्ति में
परिवर्तित करता है
फिर आशाओं
अपेक्षाओं से पीछा
क्यों नहीं छुडा सकता
अब विश्वास को
लक्ष्य बनाने में जुटा हूँ

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
वरिष्ठ चिकित्सक,अजमेर

  • 25
  • मार्च

खो गया है
वो शायद कही
दूर जा रहा है वो मुझसे
किसी की वजह से
कुछ न कर सकी मै
नए रिश्ते बन जाते हैं
तो पुराने रिश्ते
बोझ लगने लगते हैँ
पर क्यों
क्यों नही समझते कि
नए रिश्तों का आधार भी तो
पुराने रिश्ते ही होते हैँ
तो फिर कैसे भुलाया जा सकता है

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फिर वो रिश्ता चाहे खून का हो
या दोस्ती का
नए पुराने रिश्तों का आपसी
सामन्जस्य बहुत जरूरी है
रिश्तों में जंग नही लगने देना चाहिए
बहुत जरूरी है समय समय पर
पोलिश करते रहना
अर्थात आपसी मेलजोल
शिकवे शिकायत मिलकर ही
दूर किये जा सकते है
बहुत जरूरी है टूटने से
पहले रिश्तों को सम्हालना
फिर देखिये जिंदगी कितनी
खुशहाल बन जायेगी

रश्मि डी जैन
नई दिल्ली

  • 24
  • मार्च

अफवाहों से सावधान!

तेजबहादुर यादव याद है?

बीएसएफ़ का वो जवान जिसने ये शिकायत की कि जवानों को कड़ी ठंड में, तूफ़ान में बारिश में खड़ा होना पड़ता है, लेकिन उन्हें खाने को जली हुई रोटियां और पानी जैसी दाल मिलती है. न नमक, न अचार, न सब्ज़ी. सेना के अफसरों पर खुलेआम उन्होंने आरोप लगाए. कहा कि सारा राशन इनके पास आता है और ये अफ़सर राशन बेच कर पैसे बनाते हैं.  इस तरह रातोंरात तेजबहादुर सबसे ब़ड़ी खबर बन गए. कुछ लोग उनके पक्ष में खड़े हुए, कुछ उनकी ही देशभक्ति और मानसिक हालत में खामियां खोजने लगे.

लेकिन अब तेजबहादुर यादव की मौत की अफवाह फैल रही है.

एक फेसबुक पेज है. पेज का नाम है ‘कनाडा दे पंजाबी’ इस पेज ने बुधवार को एक फ़ोटो अपलोड की जिसमें लिखा था कि “भारत में कोई भी अपनी जुबान नहीं खोलेगा. इन्होंने हमारे फौजी भाई को मरवा दिया. वाहेगुरु उसकी आत्मा को शांति दे. अपना फ़र्ज़ समझ कर इसे ज़्यादा से शेयर करें ताकि मीडिया तक पहुंच सके.” (ये कैप्शन पंजाबी में लिखा है जिसे हमने हिंदी में ट्रांसलेट किया है.

ये तस्वीर असली तो है मगर तेजबहादुर यादव की नहीं. ये तस्वीर है CRPF के उन जवानों में से एक की है, जो सुकमा के नक्सली हमले में शहीद हो गए थे. इसी 11 मार्च को हुए हमले में कुल 11 जवान शहीद हुए थे. इस बारे में प्रधानमंत्री ने ट्वीट भी किया था.

इस तस्वीर को और भी जगहों पर पाया जा सकता है. सभी जगहों पर इसके बारे में नक्सल अटैक का ही नाम आ रहा है.

जिस जवान की तस्वीर इस पेज ने शेयर की थी, वो जवान सुकना के नक्सल हमले में शहीद हुआ था और वो यकीनन तेजबहादुर यादव नहीं था. बस बात इतनी सी है कि तेज बहादुर और उस शहीद जवान की शक्ल में काफ़ी समानता है.

तेज बहादुर के घर जब उनकी पत्नी से बात की गई तो उनकी पत्नी ने भी तेजबहादुर की मौत के बारे में फ़ैली ख़बरों को झूठा बताया. बुधवार रात तक फेसबुक पेज पर डाली गई तेज यादव की मौत की झूठी ख़बरों को 20 से 25 हज़ार शेयर मिल चुके थे. यानी ये खबर इस कदर फ़ैली कि बहुत सारे लोगों ने इसे सच ही मान लिया. और फिर बुधवार रात (इंडिया के हिसाब से) उसी पेज ने उस पोस्ट को डिलीट कर ये साफ़ किया कि उन्होंने ग़लत ख़बर दी थी.

इस पोस्ट में भी जो लिखा है वो पंजाबी में लिखा है. वहां माफ़ी मांगी गई है और ये बताया गया है उनकी खबर झूठी थी. “दोस्तों, किसी ने अफवाह फैला दी थी. हमारा वीर जवान अभी भी ज़िन्दा है और ये भगवान को प्यारा नहीं हुआ है. ये सब झूठ है. ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करो ताकि सभी लोगों को पता चल सके.”

लेकिन सोशल मीडिया पर होता ये है कि यहां माफ़ियों की कोई ख़ास जगह नहीं है. यहां माफ़ियां काम नहीं करती हैं. यहां एक खबर चल जाती है तो वही सोर्स जब उसे झूठा बतला दे तो भी उसे जनमानस अपने मन में झूठा नहीं ठहरा पाता. और ऐसा ही इस केस में भी है. तमाम जगहों पर इसी तस्वीर के साथ ये खबर पाई गई कि तेज बहादुर को मार दिया गया है.

तेज बहादुर के घर जब उनकी पत्नी से बात की गई तो उनकी पत्नी ने भी तेजबहादुर की मौत के बारे में फ़ैली ख़बरों को झूठा बताया। बुधवार रात तक फेसबुक पेज पर डाली गई तेज यादव की मौत की झूठी ख़बरों को 20 से 25 हज़ार शेयर मिल चुके थे। यानी ये खबर इस कदर फ़ैली कि बहुत सारे लोगों ने इसे सच ही मान लिया। और फिर बुधवार रात उसी पेज ने उस पोस्ट को डिलीट कर ये साफ किया कि उन्होंने गलत खबर दी थी।

  • 23
  • मार्च

वो बना दीखता आज परिवार सा
इसलिए लुत्फ ले खास पुचकार सा

अब न झगड़े कभी खत्म होगे सभी
क्योंकि तू धार सा और मैं धार सा

टूटता दिल तभी भेद जब मन में हो
आ रहा तब नजर बस वो मक्कार सा

आँख मिल चार उसकी हुई उस समय
जिन्दगी काटना आज दुश्वार सा

शाम कटती नहीं है बिना आपके
प्यार का फिर किया अब न इजहार सा

गीत मेरे विरह में लिखे जो कभी
जब पढ़े हो गया सत्य दीदार सा

देख सपने मिलन के सभी साथ में
बन संदल महकता आज अधिकार सा

जब प्रिय बकने लगा याद आया तभी
आदमी मुझको लगता था ख़ुद्दार सा

आग सुलगी दिलों में किसी के यहाँ
तैरता बन सफीना �वो मझधार सा

सफीना ~~नाव
दुश्वार ~~~मुश्किल
संदल ~~~चंदन

डॉ मधु त्रिवेदी
आगरा (उत्तर प्रदेश)