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  • 22
  • मार्च

ऐ मेरी लेखनी
जो देखा कर बस
वही
लिखा कर
दुख दर्द
जहाँ से समेटा कर
पीड़ित की पीड़ा
वृद्ध का
बूढ़ापन लिखा कर
ऐ लेखनी
बिना किसी
लालसा
से तू
वर्तमान को जिया कर
सम्मान की
चाह मत कर
केवल
कवि कर्म कर
जिया कर

 

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ऐ मेरी लेखनी
गरीबों
की चौखट को छू
मलीन बस्तियों
में जाया कर
जर्जर
हो रही वृद्धों
की काया को भी
लिखा कर
दर्द से तड़पते
राहगीरों को
फुटपाथ
पर सोये लोगों को
देखा कर
समाज
को दर्पण बना कर
हर बात सच - सच
कहाँ कर

डॉ मधु त्रिवेदी
आगरा

  • 22
  • मार्च

शिवानी शर्मा, जयपुर 

पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि और व्यापार सहित जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में जल के महत्व की ओर लोगों की जागरुकता बढ़ाने के लिये पूरे विश्व भर में 22 मार्च का दिन "विश्व जल दिवस" के रुप में मनाया जाता है। इसे विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम और क्रियाकलापों के आयोजनों के द्वारा मनाया जाता है जैसे दृश्य कला, जल के मंचीय और संगीतात्मक उत्सव, स्थानीय तालाब, झील, नदी और जलाशय की सैर, जल प्रबंधन और सुरक्षा के ऊपर स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिचर्चा, टीवी और रेडियो चैनल या इंटरनेट के माध्यम से संदेश फैलाना, स्वच्छ जल और संरक्षण उपाय के महत्व पर आधारित शिक्षण कार्यक्रम, प्रतियोगिता तथा ढ़ेर सारी गतिविधियाँ। नीले रंग की जल की बूँद की आकृति विश्व जल दिवस उत्सव का मुख्य चिन्ह है।

विश्व जल दिवस का इतिहास

पूरे विश्व के लोगों द्वारा हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1993 में संयुक्त राष्ट्र की सामान्य सभा के द्वारा इस दिन को एक वार्षिक कार्यक्रम के रुप में मनाने का निर्णय किया गया। लोगों के बीच जल का महत्व, आवश्यकता और संरक्षण के बारे में जागरुकता बढ़ाने के लिये हर वर्ष 22 मार्च को विश्व जल दिवस के रुप में मनाने के लिये इस अभियान की घोषणा की गयी थी।

 

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इसे पहली बार वर्ष 1992 में ब्राजील के रियो डी जेनेरियो में “पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन” की अनुसूची 21 में आधिकारिक रुप से जोड़ा गया था और पूरे दिन के लिये अपने नल के गलत उपयोग को रोकने के द्वारा जल संरक्षण में उनकी सहायता प्राप्त करने के साथ ही प्रोत्साहित करने के लिये वर्ष 1993 से इस उत्सव को मनाना शुरु किया।

विश्व जल दिवस का थीम

वर्ष 1993 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “शहर के लिये जल”।
वर्ष 1994 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “हमारे जल संसाधनों का ध्यान रखना हर एक का कार्य है”। 1995 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “महिला और जल”।
1996 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “प्यासे शहर के लिये पानी”।
1997 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “विश्व का जल: क्या पर्याप्त है”।
1998 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “भूमी जल- अदृश्य संसाधन”।
1999 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “हर कोई प्रवाह की ओर जी रहा है”।
2000 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “21वीं सदी के लिये पानी”।
2001 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “स्वास्थ के लिये जल”।
2002 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “विकास के लिये जल”।
2003 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “भविष्य के लिये जल”।
2004 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और आपदा”।
2005 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “2005-2015 जीवन के लिये पानी”।
2006 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और संस्कृति”।
2007 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल दुर्लभता के साथ मुंडेर”
2008 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “स्वच्छता”।
2009 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल के पार”।
2010 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “स्वस्थ विश्व के लिये स्वच्छ जल”।
2011 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “शहर के लिये जल: शहरी चुनौती के लिये प्रतिक्रिया”।
2012 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और खाद्य सुरक्षा”।
2013 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल सहयोग”।
2014 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और ऊर्जा”।
2015 के विश्व जल दिवस उत्सव का थीम था “जल और दीर्घकालिक विकास”।2016 के विश्व जल दिवस उत्सव के लिए विषय था "जल और नौकरियाँ"।
2017 के विश्व जल दिवस उत्सव के लिए विषय "अपशिष्ट जल" है।
2018 के विश्व जल दिवस उत्सव के लिए विषय "जल के लिए प्रकृति के आधार पर समाधान" होगा।

शिवानी शर्मा, जयपुर 

  • 21
  • मार्च

क्यों फ़रिश्ते ढूंढते हो
कर्म बिना कामयाबी की
उम्मीद करते हो
परिंदों के पास भी
नक़्शे नहीं होते हैं
जब वो पा लेते हैं मंज़िल
तुम क्यों नहीं पा सकते
कर्म पथ पर चलते रहो
मुश्किलों को पार करते रहो
गिर कर उठते रहो
कदम आगे बढ़ाते रहो
किस्मत खुद बना लोगे
मंज़िल तक पहुँच जाओगे

******************
ना दुआ की उम्मीद कर
ना मदद की ख्वाहिश कर
ना किसी से तकरार कर
ना किसी से अदावत कर
करना है तो
खुदा की इबादत कर
मन लगा कर काम कर
मोहब्बत की बात कर
लेने से पहले देने की बात कर
चार दिनों की ज़िन्दगी
हँसते गाते जीने की बात कर
सब के लिए दुआ कर

*******************

स्याही से लिखा शब्द 

बन कर जीना चाहता हूँ
पेन्सिल से लिखा
शब्द बन कर
जीना नहीं चाहता हूँ
जो चाहे मिटा दे मुझ को
रबर भी नहीं बनना चाहता हूँ
जिसे चाहूँ मिटा दूँ
घृणा का पात्र बन जाऊं
स्वार्थ में जीने लगूँ
स्याही से लिखा शब्द
बन कर जीना चाहता हूँ
आसानी से कोई
मिटा ना सके मुझ को
जो भी पढ़ ले एक बार
हृदय में समा ले मुझ को
समय के अंतराल में
धुंधला भले ही पड़ जाऊं
चाह कर भी कोई
भुला ना सके मुझ को

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ठहरा हुआ पल
मन कि गहराइयों में
डूबा वो ठहरा हुआ पल
जब भी यादों को
स्पर्श करता है
पारस पत्थर के मानिंद
मेरे आज को
बीता कल बना देता है
हृदय कि धमनियों में
आशाओं का नव संचार
प्रवाहित कर देता है


डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
वरिष्ठ चिकित्सक, अजमेर

  • 21
  • मार्च

कोई जीत
स्थायी नहीं होती
कोई हार
सदा हार नहीं रहती
हार जीत
अंतिम पड़ाव नहीं जीवन का
जीवन कर्म प्रधान होता है
विवेक पथ प्रदर्शक होता है
लक्ष्य तक पहुंचाता है
जिसने बात समझ ली
उसका जीवन
कुंठा मुक्त रहताbहै
हार कर भी अंत में
वही जीतता है

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
वरिष्ठ चिकित्सक, अजमेर