अन्य ख़बरे

  • 21
  • मार्च

खुद के बनाए
पिंजरे में बंद पंछी सा हूँ
पिंजरे की
जालियों के पार
देख तो सकता है
पिंजरे के नियम कायदों से
मन में छटपटाहट भी होती है
कई बार खुद को बेबस
महसूस करता हूँ
स्वछन्द उड़ना चाहता हूँ
पर पिंजरे से
इतना मोह हो गया
कोई दरवाज़ा खोल भी दे
तो चाह कर भी
उड़ नहीं पाऊंगा

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
वरिष्ठ चिकित्सक, अजमेर

  • 21
  • मार्च

जिस घर में मेरे राम बसे
उस घर में मेरे प्राण बसे

नैन थके पर वो ना दिखे
दीप जलाये, गीत सुनाये
हर पथ पर एक आस जगाये
सागर से मोती चुन लाए
अम्बर से तारे चुन लाए
फिर भी क्यों ना मेरे राम मिले
जिस घर में मेरे राम बसे
उस घर में मेरे प्राण बसे

मंदिर छाने महल भी छाने
वन उपवन और ताल भी छाने
मन मंदिर में लगा के ताले
ढूंढ रही मैं  राम को
जिस घर में मेरे राम बसे
उस घर में मेरे प्राण बसे

 
Ram se bada na koi,Lord Shri Ram

उजियारे की किरण दिखी
अंधकार में ज्योत जगी
जिनको ढूंढा घर घर में
राम तो मेरे मन में बसे
जिस घर में मेरे राम बसे
उस घर में मेरे प्राण बसे

जहाँ राम बसे वहाँ छल ना बसे
निर्मल मन में अमिट छवि बसे
छोड़ दिए सारे लोभ और मोह
पहचान लिया मैंने राम को
जिस घर में मेरे राम बसे
उस घर में मेरे प्राण बसे

प्रस्तुतकर्ता मंजुला बी. शाह
जयपुर

 

  • 20
  • मार्च

एक रुपया बहुत कीमती है..
मोहल्ले में किसी की कमज़ोर छत
शायद बनवाने की ना हो हैसियत
सब भाइयों का एक एक रुपया
करवा दे उस कमज़ोर छत की मरमम्त..

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जान पहचान में किसी की गिरती सेहत
खाली जेब से हारती उसकी हिम्मत
सब के सहयोग का एक रुपया
दे जाए बुझते दीपक को नयी रौनक..
इलाके में किसी को रोज़गार की ज़रुरत
धन से लाचार उसके परिवार की हसरत
एक रुपया बदल सकता है किस्मत
वो भी चैन से सोवे रातों में ना बदले बार बार करवट..
एक रुपया बहुत कीमती है

ऋतू त्रेहान
लखनऊ

  • 20
  • मार्च

बिताया हुआ
तुम्हारे साथ
हर क्षण
एक हल्की सी छुअन
मिले थे जब
हमारे नयन से नयन
अहसास कराती है
तुम समाते जा रहे हो
मेरे वज़ूद में
तुम्हारी उस
छुअन का अहसास
मुझे आज भी
रोमांचित कर देता है
लेकिन तुम कहां चले गए
मै नहीं जानती
वापिस आने की उम्मीद
तुम्हारी आज भी है मुझे
तुम जरूर आओगे
ये मै नही
तुम्हारा मेरे प्रति
अगाध स्नेह और
निश्चल प्रेम बोल रहा है
तुम यहीं कहीं
मेरे आस पास ही हो
जो मुझे अहसासर रहा है
तुम कंही नही गए
तुम मेरे समीप और समीप
आ रहे हो
हैना.....


रश्मि डी जैन
नई दिल्ली