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  • 10
  • मार्च

प्रशंसा करनी है
तो मुंह पर नहीं
पीठ पीछे करो
जितना लायक हूँ
बस उतनी ही करो
मुंह पर प्रशंसा से
भ्रम रहता है
प्रशंसा के
लायक हूँ भी या नहीं
मस्तिष्क में भ्रम रहता है
अनुचित प्रशंसा कहीं
सर पर ना चढ़ जाए
सोच कर डर लगता है
पथ से ना भटका दे
मन में विचार कौंधता है

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
वरिष्ठ चिकित्सक, अजमेर

  • 10
  • मार्च

पता नही
एक अजनबी
से मुलाकात
कोई इत्तेफाक
था या रिश्ता
पुर्व जन्म का
चंद मिन्टो की
मुलाकात
जिंदगी भर का
सुखद अहसास
दे गई
कुछ दिनों तक
फ़ोन पर बातें
रोमांचित
कर देती थी
फिर आत्तुर हुआ
मन
मिलने को
समझा न सकी
इस दिल को
मानो बच्चे की
जिद्द
मिलने को आतुर था मन
मिले भी तो
कुछ पलों के लिए

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वो मिलने का
अहसास
वो हल्की सी उंगलियों की छुअन
जो मुझे आज भी
याद है
कैसे भूल सकती हूं
कभी नही
आज भी रोमांचित हो उठती हूं
याद करके
हम मिले
बस कुछ नही कहा
अपलक निहारते रहे
मूक निशब्द हो गई
देख कर उन्हें
जो कभी सोचा ना था वो
आज सच हो गया
एक घंटा ऐसे बीत गया मानो
एक पल
जो कभी लौट कर नही आने वाला
ठीक उसी तरह
जो मेरी जिंदगी मेँ
हवा के झोंके की तरह
आया और चला गया

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क्या था......???
जो छूकर निकल गया
वो ----"झोका " हवा का
या फिर वहम मेरा........

रश्मि डी जैन, नई दिल्ली 

  • 10
  • मार्च

मुंबई : कटप्पा ने ‘बाहुबली’ को क्यों मारा यह खुद कटप्पा को भी नहीं मालूम है. क्योंकि ‘बाहुबली 2’ के निर्देशक राजमौली ने इसका चार सीन सूट करवाकर रखे हैं. इनमें से किसी एक को फिल्म ‘बाहुबली 2’ के एडिटिंग के वक्त उसमें जोड़ा जायेगा. इस तरह से निर्देशक राजमौली ने खुद कटप्पा का किरदार निभाने वाले सत्याराज से भी इसे छुपाकर रखा है कि उसने ‘बाहुबली’ को क्यों मारा था.

पिछले साल भी जब राजमौली से यह सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि कटप्पा ने ‘बाहुबली’ को इसलिए मारा क्योंकि उसे मैंने ऐसा करने के लिए कहा था.

सत्याराज ने बताया कि उनसे कई बार यह सवाल पूछा जाता है लेकिन इससे वो इरिटेट नहीं होते हैं. उन्होंने कहा- पूरी दुनिया मुझसे पूछ रही है कि कटप्पा ने ‘बाहुबली’ को क्यों मारा. मुझे अब सवाल के बार बार पूछे जाने से कोई फर्क नहीं पड़ता है. मैंने इसके बारे में अपने परिवार को भी नहीं बताया है. मैं पिछले 40 सालों से इंडस्ट्री में हूं. यह नैतिकता नहीं है अगर हम फिल्म के हिस्से की इतने अहम क्लाइमैक्स के बारे में खुलासा कर दें. मुझे पता था कि किरदार काफी मशहूर होगा लेकिन यह नहीं पता था कि देश में इसे इतनी पॉपुलेरिटी मिलेगी. अलग अलग परिस्थितियों में इसपर गेम्स बन रहे हैं. जैसे कि नोटबंदी हुई मेरे किरदार पर गेम्स बने और सवाल पूछा जाने लगा कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा. मुझे इससे खुशी होती है.

फिल्म ‘बाहुबली’ में कटप्पा ने ‘बाहुबली’ की पीठ में तलवार भोंक दिया. लेकिन कटप्पा ने ‘बाहुबली’ को क्यों मारा इसका जवाब नहीं दिया गया है. इसका जवाब ‘बाहुबली 2’ में मिलेगा. इस बीच कटप्पा का किरदार ‘शोले’ के ‘गब्बर सिंह’ तथा ‘शान’ के ‘शकाल’ के समान हो गया है. जिसे दर्शकों में फिल्म के हीरो के मुकाबले ज्यादा प्रसिद्धि मिली है.

  • 08
  • मार्च

ये तो नहीं कहता
मुझे दुःख नहीं हैं
ये भी नहीं कहता
मैंने सुख देखे नहीं हैं
पर जब सुख देख रहा था
तब दुखों का ख्याल नहीं आया
फिर अब दुखों में
सुख को क्यों याद करूँ
जैसे सुख बीते
वैसे ही दुःख भी बीत जाएँगे
हँसने के लिए बना हूँ
फिर से हँसने लगूंगा

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जिसने दुःख को
जितना बड़ा समझा
दुःख ने उसका
उतना साथ निभाया
उसे उतना ही बड़ा दिखाया
विछोह के दुःख को
मोह ने बढाया
माया के दुःख को
इच्छाओं ने बढाया
असफलता के दुःख को
सपनों ने बढाया
प्रेम के दुःख को
आसक्ति ने बढाया
जितना मानों उतना ही कम है
दुःख तो केवल दुःख होता है
सहजता से लो तो
दर्द कम होता है
पहाड़ समझो तो
दुर्गम लगता है

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वो सामने से गुजर जाते हैं
हम तड़पते रह जाते हैं
वो ख्यालों में खोये रहते हैं
हम नज़रें मिलाने को तरसते हैं
वो कदमों के निशाँ छोड़ जाते हैं
हम उन्हें ढूंढते रह जाते हैं
हम उन्हें दिल से चाहते हैं
वो मोहब्बत से कतराते हैं
वो जुदाई के ख्याल से डरते हैं
हम जुदाई में अश्क़ बहाते हैं

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
वरिष्ठ चिकित्सक
अजमेर