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मन करता है

03 अप्रैल 2017
Author :  

मन करता है
ज़िन्दगी की स्याही को
पानी की कलम से मिटा दूं
सारी यादें भूल जाऊं
नई कलम से
नयी इबारत लिखूँ
जबान सोच कर खोलूँ
जितना आवश्यक उतना ही बोलूं
सोच समझ कर कदम बढाऊँ
नित नए रिश्ते बनाऊं
हर रिश्ता हृदय से निभाऊं
न किसी से दूर रहूँ
न किसी के पास जाऊं
सच्चाई का दामन थाम लूँ
न झूठ बोलूं न झूठ सुनूं
दायरे में सिमट कर भी
सब का चहेता बन जाऊं

डा.राजेंद्र तेला,निरंतर
वरिष्ठ चिकित्सक,अजमेर

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