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इस संसदीय सीट ने दिए प्रदेश को तीन सीएम, लेकिन नहीं बना कोई अभी तक केन्द्रीय मंत्री

15 अप्रैल 2019
Author :  

मुकेश मिश्रा, इंदौर 

मन्दसौरःविधानसभा चुनाव के दौरान देशभर में सुर्खियों में रहे मंदसौर संसदीय क्षेत्र के नाम एक अनोखा रिकॉर्ड है। इस संसदीय सीट में जावरा-मंदसौर-नीमच आते हैं। यह प्रदेश और संभवत: देश में एक मात्र ऐसी सीट है, जिसने मप्र को तीन-तीन मुख्यमंत्री दिए। इतना ही नहीं,  देश की पहली नेहरू सरकार में इसी क्षेत्र के डॉ. कैलासनाथ काटजू गृहमंत्री बने थे। हालांकि इसके 68 साल बाद आज यह क्षेत्र सिर्फ किसान आंदोलन के किसान चर्चा में है। यहां से चुनने वाले सांसद फिर कभी केंद्रीय मंत्री नहीं बन सके।

 डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडेय सबसे ज्यादा 8 बार सांसद चुने गए और लगभग 40 साल तक सांसद रहे लेकिन उन्हें भी मंत्रीपद नहीं मिला। हालांकि वे जनसंघ से ही अपनी पार्टी को स्थापित करने वाले महत्वपूर्ण नेताओं में शुमार रहे। इसलिए संगठन में उनका ओहदा अच्छा था। संगठन में वे प्रदेश अध्यक्ष रहे।

1957, 1978 और 1980 में इसी क्षेत्र से तीन मुख्यमंत्री चुने गए 

डॉ. कैलासनाथ काटजू : 1957 में इसी क्षेत्र की जावरा विधानसभा सीट से विधायक बने। फिर 31 जनवरी 1957 में सीएम बने।

वीरेंद्र कुमार सकलेचा : जावद विधानसभा सीट से विधायक वीरेंद्र कुमार सकलेचा 18 जनवरी 1978 में मुख्यमंत्री हुए।

 
सुंदरलाल पटवा : कुकड़ेश्वर निवासी सुंदरलाल पटवा मनासा सीट से चुनाव जीतकर  20 जनवरी 1980 को मुख्यमंत्री बने। हालांकि वह 5 मार्च 1990 में रायसेन जिले की भोजपुर सीट से चुनाव लड़कर मुख्यमंत्री बने थे।

वर्तमान सीएम कमलनाथ को उनके गढ़ में हराने का भी रिकॉर्ड है : मौजूदा सीएम कमलनाथ ने वर्ष 1991 में छिंदवाड़ा सीट से सांसद रहते हुए पद से इस्तीफा दिया था। फिर इनकी जगह धर्मपत्नी अलका नाथ चुनाव जीतीं। 1996 में अलका नाथ ने भी इस्तीफा दिया तो वापस कमलनाथ चुनाव लड़े। तब उनके सामने इसी मंदसौर संसदीय क्षेत्र के रहने वाले पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया था। पटवा ही एकमात्र ऐसे नेता रहे जिन्होंने वर्तमान सीएम नाथ को उन्हीं के गढ़ में पराजित किया था। इनके अलावा वर्ष 1980 से लेकर 2014 तक कमलनाथ को अन्य कोई नेता हरा नहीं पाया।

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