पल पल ख़बरे

  • 12
  • मई

नई दिल्ली. इंडियन टुबैको कंपनी लिमिटेड (आईटीसी) के पूर्व एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ वाईसी देवेश्वर का शनिवार को 72 साल की उम्र में निधन हो गया। आईटीसी ने उनके निधन की पुष्टि की है। देवेश्वर दो दशक से ज्यादा आईटीसी के प्रमुख रहे। देवेश्वर का जन्म 4 फरवरी 1947 को लाहौर में हुआ था। उन्होंने दिल्ली आईआईटी और उसके बाद हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। 1968 में उन्होंने आईटीसी ज्वाइन की। 1991 से 94 तक देवेश्वर एयर इंडिया के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) रहे। वे आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड में भी डायरेक्टर रहे। देवेश्वर ने 2017 में आईटीसी का चीफ एग्जीक्यूटिव का पद छोड़ दिया था। इसके बाद वे कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बने रहे।

  • 09
  • मई

इंदौर । पूर्व कांग्रेसी विधायक के भांजे की गाड़ी का चालान बनाने और कार्यवाही के दौरान किसी दबाव में नहीं आने के वायरल हुए वीडियो के बाद चर्चा में आए यातायात विभाग के एएसआई अरुण सिंह को पुनः राजवाड़ा क्षेत्र में ही पदस्थ कर दिया गया है । 17 वर्ष सेना में सेवा देने के बाद पुलिस सेवा में आए अरुण सिंह ने कहा कि मेरे लिए सम्मान की बात है कि मुझे उसी स्थान पर भेजा गया जहां यह विवाद हुआ था। अरुण सिंह ने कहा कि अब मेरी कोशिश है कि मैं अच्छा काम करूं। उन्होंने कहा कि मैं पूरी कार्यवाही से पूरी तरह से संतुष्ट हूं क्योंकि यह विभागीय प्रक्रिया है मुझे थकान और तनाव दूर करने के लिए ईडीआरपी लाइन भेजा गया था। मुझे लाइन अटैच नहीं किया गया। अरुण सिंह ने कहा कि वह अपनी कार्यप्रणाली नहीं बदल सकते हैं पहले जैसी कार्यवाही करने में कभी भी पीछे नहीं हटेंगे उस घटना को लेकर अरुण सिंह ने कहा इसे सौभाग्य समझे या दुर्भाग्य परंतु बड़ी संख्या में लोगों ने मुझे शाबाशी दी। अरुण सिंह ने कहा कि मैं एक छोटा कर्मचारी हूं लेकिन कोई प्रभाव दिखाएगा तो मैं कार्यवाही करने में पीछे नहीं हटूंगा मेरा नजरिया नहीं बदल सकता है।

  • 09
  • मई

नई दिल्ली।सर्वोच्च न्यायलय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में में म. प्र. के शत प्रतिशत शासकीय अनुदान प्राप्त महाविद्यालययों में कार्यरत प्रोफेसर्स की रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष कर दी है।
देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले की जानकारी देते हुए म.प्र.अशासकीय महाविद्यालययीन(अनुदान प्राप्त) प्राध्यापक संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. ज्ञानेंद्र त्रिपाठी,महासचिव डॉ. डी. के. दुबे ,कोषाध्यक्ष डॉ. शैलेष जैन और सीनियर एडवोकेट श्री एल.सी. पटने ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने माना कि शासन से अनुदान प्राप्त प्रोफेसर गण भी शासकीय कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की तरह ही समस्त लाभ प्राप्त करने के हकदार हैं।उल्लेखनीय है कि म.प्र. शासन ने सन 2010 में शासकीय महाविद्यालययों में कार्यरत शिक्षकों की रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष कर दी थी जबकि अनुदान प्राप्त कॉलेजों के शिक्षकों को 62 वर्ष की आयु में रिटायर किया जा रहा था।

म.प्र.शासन के उक्त अन्यायकारी निर्णय के खिलाफ अनुदान प्राप्त शिक्षकों की तरफ से प्रांतीय संघ ने हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी और बड़ी सफलता पाई।
वरिष्ठ एडवोकेट श्री एल. सी. पटने ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी इस दलील को माना कि अनुदान प्राप्त महाविद्यालयो में कार्यरत शिक्षक शासकीय कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों की तरह ही समस्त लाभों के हकदार हैं।उन्होंने बताया माननीय सर्वोच्च अदालत ने उनके इस तर्क को भी सही माना कि सन 2004 में महामहिम राज्यपाल की अध्यक्षता में गठित कोऑर्डिनेशन कमेटी ने तय कर दिया था कि अनुदान प्राप्त निजी कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक,शासकीय कॉलेजों के शिक्षकों के समान ही माने जाएंगे तो फिर रिटायरमेन्ट की आयु में भेदभाव नही किया जा सकता।श्री पटने ने बताया की 1973 के अधिनियम के तहत म.प्र. में महामहिम राज्यपाल की अध्यक्षता में कोऑर्डिनेशन कमेटी गठित की जाती है। कमेटी में प्रदेश के सभी कुलपति,रेक्टर्स और शासन उच्च अधिकारी रहते हैं। अतःउक्त कमेटी द्वारा लिया गया निर्णय राज्य सरकार पर बंधनकारी है।सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुवे अनुदान प्राप्त कॉलेजों के शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुना दिया।
प्रांताध्यक्ष डॉ.त्रिपाठी ने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णयानुसार जिन शिक्षकों ने 62 से 65 वर्ष की आयु तक कार्य किया है उन्हें वेतन भी म.प्र.शासन को ही प्रदान करना होगा।संघ के सचिव डॉ.डी. के. दुबे ने बताया कि हम जल्द ही माननीय सर्वोच्च अदालत के फैसले की प्रमाणित प्रति उच्च शिक्षा विभाग में जमा कर शासन से निर्णयानुसार आदेश निकालने का आग्रह करेंगे।प्रांताध्यक्ष डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस महत्वपूर्ण निर्णय के संदर्भ में जल्द ही प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई जा रही है।संघ के कोषाध्यक्ष डॉ. शैलेष जैन ने प्रोफेसर्स के हक की इस जायज लड़ाई में साथ देने के लिए सभी शिक्षक साथियों का आभार माना।

  • 09
  • मई

ओंकारेश्वर, इन्दौरः09 मई (मुकेश मिश्रा)  तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में एक डम्फर अनियंत्रित होकर एक झोपडी में घुस गया. जिससे झोपडी के अन्दर सो रही माँ और दो मासूम बच्चें कुचल गए. तीनों की मौके पर ही मौत हो गयी. पुलिस ने डम्फर को जब्त कर चालक को गिरफ्तार कर लिया है.

मन्धाता थाना प्रभारी जगदीशचन्द्र पाटीदार ने बताया कि घटना बुधवार रात करीब 11 बजे की है. संगम घाट के पास पुल निर्माण का कार्य चल रहा है. इसमें खरगोन के झिरन्या गाँव का रहने वाला शब्बीर बारेला(32) अपनी पत्नी मंजिता(30) के साथ मजदूरी करता था. घाट के पास ही व झोपडी बना कर दोनों अपने बच्चों शिवम (7) तथा सोहन (5) के साथ रहते थें. रात को शब्बीर पुल की चौकीदारी करने गया हुआ था. उसी समय निर्माण कार्य में लगा डम्फर (एमपी 34-एच-0140) ढालान से नीचे उतर रहा था. नीचे उतरते समय डम्फर अनियंत्रित हो गया और सीधे ना जाते हुए शब्बीर की झोपडी की तरफ चल गया. उस समय अन्दर उसकी पत्नी और दोनों बच्चें सो रहे थें.झोपडी को तोडते हुए अन्दर सो रहे तीनों को डम्फर ने कुचल डाला. तीनों लोगों को लेकर आस-पास के लोग अस्पताल भागे लेकिन तब तक उनकी मौत हो चूकी थी. पुलिस ने डम्फर को जब्त कर चालक को गिरफ्तार कर लिया है. 

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