-->

अजमेर :स्मार्ट सिटी में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में दर्जनों जर्जर भवन आम लोगों की जान के लिए बने जोखिम

05 मई 2019
Author :  

अजमेर,(कलसी): यूं तो अजमेर शहर को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला हुआ है, लेकिन इस स्मार्ट सिटी में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में दर्जनों जर्जर भवन आम लोगों की जान के लिए जोखिम बने हुए हैं। अजमेर नगर निगम प्रशासन व जिला प्रशासन इस तरफ कोई ध्यान नहीं देते हुए मूक दर्शन बना हुआ है या किसी हादसे का इंतजार कर रहा है। ज्ञात हो कि बरसात के दिनों में इन जर्जर भवनों के गिरने का अंदेश बना रहता है। निगम प्रशासन सिर्फ बरसात के शुरू होने से पहले इन भवन मालिकों को नोटिस देकर इतिश्री कर लेता है या बरसात में जब कभी कोई भवन गिरता है तो उस भवन मालिक के खिलाफ दिखावी कार्यवाही कर अपना पल्ला झाड़ लेता है। 

स्मार्ट सिटी अजमेर शहर के हर वार्ड में एक न एक जर्जर भवनों देखने को मिल ही जाएगा जो एक समस्या बना हुआ है। वहीं शहर के नला बाजार, दरगाह बाजार, पुरानी मंडी, अजमेरी दड़ा, लाखन कोटड़ी, खजाना गली, दर्जी मोहल्ला, आशागंज, डिग्गी बाजार, ऊसरीगेट, केसरगंज, आदर्श नगर आदि क्षेत्रों में पुराने व जर्जर भवनों कभी भी हादसों का न्यौता दे सकते हैं। ज्यादातर भवन पुराने बने हुए है तथा इनमें मकान मालिक व किराएदार के बीच कोई न कोई विवाद की स्थिति में है, जिसके चलते भवन मालिक इनकी मर मत नहीं करवाते जिससे भवन काफी जर्जर होते चलते जाते हैं। भवन मालिक अपने मकान की मर मत नहीं करा रहे हैं और भवन में निवास करने वाले किराएदारों को भी मर मत नहीं करने देते। शहर के कई जर्जर ओर पुराना भवन मालिकों के विवाद न्यायालय चल रहे है या अधिकांश विचाराधीन चल रहे है। शहर के कई जर्जर भवनों को नगर निगम जमींदोज कराना चाहता है, परंतु निगम प्रशासन भी शिकायतें मिलने पर भवनों को तकनीकी अधिकारियों से मौका निरीक्षण करवा कर जर्जर बताते हुए भवन मालिक व किराएदारों को नोटिस दे देता है। निगम के नोटिस के साथ ही किराएदार व मकान मालिक अपने-अपने स्तर से मकान को गिरवाने और उसकी मर मत करवाने की कोशिशों में लग जाते है तथा कई मामलों में न्यायालय का भी दखल करवाने का प्रयास किया जाता है। इसी रवैये के चलते नगर निगम में जर्जर भवनों की फहरिस्त काफी ल बी है। जैसे ही वर्षा ऋतु खत्म होती है निगम के अधिकारी भी इन मामलों की फाइल को बंद कर देते हैं ओर खामोश बैठ जाते है। जुलाई माह में मानसून आने की संभावना रहती है, लेकिन जर्जर भवन हमेशा आने-जाने वाले लोगों के लिए खतरा बना रहता है। ज्ञात हो कि पूर्व में जर्जर भवन गिरने की घटनाएं घटित हो चुकी है। 

पुलिस के कुछ आवासीय क्वार्टर भी जर्जर:

पुलिस प्रशासन द्वारा अपने कर्मचारियों को आवासीय क्वाटर कई इलाकों में बना कर सुविधा दे रखी है। परंतु कुछ क्वाटर्स काफी पुराने और देखभाल के अभाव में जर्जर हो चुके हैं और गिरने की स्थिति में है, जो काभी बड़ा हादसे में तब्दील हो सकता है। अलवरगेट थाने के नजदीक बने पुलिस के क्वाटर इस सच्चाई को बयां कर रहे हैं। इन क्वाटरों में रहने वाले पुलिसकर्मी मजबूरी वश अपना जीवन-यापन गुजार रहे है। पुलिस प्रशासन इन क्वाटरों की मर मत के लिए कोई बजट आवंटित नहीं करता तथा इसमें रहने वाले पुलिसकर्मी भी अपनी ओर से इसमें कोई खर्च नहीं करते। इसी के चलते ये क्वाटर्स इतने जर्जर हो गए है कि कभी भी गिर सकते है। 

वक्फ बोर्ड की कुछ स त्तियां भी जर्जर अवस्था में:

राजस्थान वक्फ बोर्ड के पदाधिकारी भी जर्जर संपत्तियों की सुध नहीं लेता,जिसके कारण यह संपत्तियां जर्जर होती जा रही है। स्थानीय प्रशासन कई मामलों में मस्जिद कमेटी को नोटिस जारी कर चुका है लेकिन कमेटी द्वारा किसी भी जर्जर संपत्ति संभाला नहीं जा रहा है। मस्जिद कमेटी संपत्तियों की तो हालत इतनी ज्यादा खराब है कि जिन इलकों में यह स पत्तियां है वहां के स्थानीय लोगों ने अपने स्तर पर बल्लियां व अन्य जुगाड़ कर छतों व दीवारों को गिरने से रोक रखा है। ये संपत्तियां भी घनी आबादी में बनी हुई है। 

96 Views
palpal