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सर्वोच्च न्यायालय का फैसला, अनुदान प्राप्त कॉलेजों के प्रोफेसर्स भी 65 की उम्र में ही रिटायर होंगे

09 मई 2019
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नई दिल्ली।सर्वोच्च न्यायलय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में में म. प्र. के शत प्रतिशत शासकीय अनुदान प्राप्त महाविद्यालययों में कार्यरत प्रोफेसर्स की रिटायरमेंट की आयु 65 वर्ष कर दी है।
देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले की जानकारी देते हुए म.प्र.अशासकीय महाविद्यालययीन(अनुदान प्राप्त) प्राध्यापक संघ के प्रांताध्यक्ष डॉ. ज्ञानेंद्र त्रिपाठी,महासचिव डॉ. डी. के. दुबे ,कोषाध्यक्ष डॉ. शैलेष जैन और सीनियर एडवोकेट श्री एल.सी. पटने ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने माना कि शासन से अनुदान प्राप्त प्रोफेसर गण भी शासकीय कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की तरह ही समस्त लाभ प्राप्त करने के हकदार हैं।उल्लेखनीय है कि म.प्र. शासन ने सन 2010 में शासकीय महाविद्यालययों में कार्यरत शिक्षकों की रिटायरमेंट आयु 65 वर्ष कर दी थी जबकि अनुदान प्राप्त कॉलेजों के शिक्षकों को 62 वर्ष की आयु में रिटायर किया जा रहा था।

म.प्र.शासन के उक्त अन्यायकारी निर्णय के खिलाफ अनुदान प्राप्त शिक्षकों की तरफ से प्रांतीय संघ ने हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी और बड़ी सफलता पाई।
वरिष्ठ एडवोकेट श्री एल. सी. पटने ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी इस दलील को माना कि अनुदान प्राप्त महाविद्यालयो में कार्यरत शिक्षक शासकीय कॉलेजों में कार्यरत शिक्षकों की तरह ही समस्त लाभों के हकदार हैं।उन्होंने बताया माननीय सर्वोच्च अदालत ने उनके इस तर्क को भी सही माना कि सन 2004 में महामहिम राज्यपाल की अध्यक्षता में गठित कोऑर्डिनेशन कमेटी ने तय कर दिया था कि अनुदान प्राप्त निजी कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक,शासकीय कॉलेजों के शिक्षकों के समान ही माने जाएंगे तो फिर रिटायरमेन्ट की आयु में भेदभाव नही किया जा सकता।श्री पटने ने बताया की 1973 के अधिनियम के तहत म.प्र. में महामहिम राज्यपाल की अध्यक्षता में कोऑर्डिनेशन कमेटी गठित की जाती है। कमेटी में प्रदेश के सभी कुलपति,रेक्टर्स और शासन उच्च अधिकारी रहते हैं। अतःउक्त कमेटी द्वारा लिया गया निर्णय राज्य सरकार पर बंधनकारी है।सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार करते हुवे अनुदान प्राप्त कॉलेजों के शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुना दिया।
प्रांताध्यक्ष डॉ.त्रिपाठी ने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णयानुसार जिन शिक्षकों ने 62 से 65 वर्ष की आयु तक कार्य किया है उन्हें वेतन भी म.प्र.शासन को ही प्रदान करना होगा।संघ के सचिव डॉ.डी. के. दुबे ने बताया कि हम जल्द ही माननीय सर्वोच्च अदालत के फैसले की प्रमाणित प्रति उच्च शिक्षा विभाग में जमा कर शासन से निर्णयानुसार आदेश निकालने का आग्रह करेंगे।प्रांताध्यक्ष डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस महत्वपूर्ण निर्णय के संदर्भ में जल्द ही प्रांतीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई जा रही है।संघ के कोषाध्यक्ष डॉ. शैलेष जैन ने प्रोफेसर्स के हक की इस जायज लड़ाई में साथ देने के लिए सभी शिक्षक साथियों का आभार माना।

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