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''कला मंज़र'' में बच्चों ने सीखा '' कैसे कला के विविध रूप आत्मनिर्भरता और आत्माभिव्यक्ति के श्रेष्ठतम अवसर कराते हैं उपलब्ध

02 नवम्बर 2019
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जयपुर 2 नवम्बर । जयपुर में कला व सांस्कृतिक क्षेत्र से सम्बद्ध नवगठित संस्था '' कला मंज़र '' के प्रथम आयोजन के तहत गुर्जर की थड़ी स्थित प्रथम शिक्षा स्कूल में प्रातः 10.30 बजे से 12.00 बजे तक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया जिसमें बच्चों को कला के विविध रूपों से परिचित करवाया गया। इस कार्यक्रम के साथ ही ग्लोबल वर्ल्ड सोसायटी के तत्वावधान में वरिष्ठ संगीतकार अनिल सक्सेना 'अन्नी' के संरक्षण में संस्थापिका मीनाक्षी माथुर द्वारा गठित इसकी कला-सांस्कृतिक इकाई '' कला मंज़र '' अपने अस्तित्व में आ गई है।

संस्था के संरक्षक अनिल सक्सेना ने अपने स्वागत वक्तव्य में संस्था का परिचय देते हुए बताया कि वर्तमान में पाश्चात्यकरण के इस जटिल दौर में इस संस्था के गठन का हमारा मुख्य उद्देश्य भारतीय व राजस्थानी कला -संस्कृति, साहित्य, परम्पराओं के प्रति जागरूकता लाना और उनमें रुचि उत्पन्न करना है, साथ ही किशोरों और युवाओं को हम ये सन्देश भी देना चाहते हैं कि '' आप कला से सम्बद्ध अपनी अभिरुचि के विषयों को भी रोजगार का साधन बना सकते हैं इसके लिए भीड़ का अंधानुकरण करने की आवश्यकता नही है।

इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए संस्था ने अपने प्रथम प्रयास में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया जिसका मुख्य विषय था ''कला के विविध रूप कैसे आत्मनिर्भरता और आत्माभिव्यक्ति के श्रेष्ठतम अवसर उपलब्ध कराते हैं।" व्याख्यान में आमंत्रित विशिष्ट अतिथियों ने अपने अपने विचार रखे और बच्चों को अपने अनुभवों से लाभान्वित किया।

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अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त '' श्रृंगारमणी " की उपाधि से सुशोभित वरिष्ठ नृत्यांगना व नृत्य गुरु उषा श्रीजी ने बच्चों को बताया कि हर व्यक्तियों में लय और ताल का समिश्रण होता है। सभी में रिदम मौजूद होती है। संगीत की विभिन विधाओं से जहां आत्मिक सुख मिलता है, वहीं रोजगार भी मिलता है उषा श्रीजी ने बच्चों को बिरजू महाराज व गुलाबो के बारे में बताया और डांस की विभिन्न शैलियों के बारे ने बताया। उषा श्रीजी ने बच्चों के साथ राजस्थानी लोकगीतों की दो दो पंक्तियाँ भी गा कर सुनाई ।

वरिष्ठ साहित्यकार व अनुवादिका श्रीमती एस. भाग्यम शर्मा ने बाल कहानियों के माध्यम से बच्चों को बताया कि कहानियां लिखना चाहते हो तो पहले कहानियां पढ़ो, अपनी जिलों, राज्यों, देश का इतिहास, भूगोल पढ़ो, त्योहारों व विवाह आदि समारोह में जो रीति रिवाज होतें है उन्हें ध्यान से देखो व समझो । भाग्यम ने बच्चों को सी. राजगोपालाचारी की कहानियों के बारे में बताया। नैतिक शिक्षा से सम्बद्ध बाल कहानियों भी बताई।

रंगमंच के सुप्रसिद्ध '' उस्ताद बिस्मिल्लाह खां अवार्ड '' से सम्मानित वरिष्ठ रंगकर्मी, थिऐटर शिक्षा में विशेषज्ञता प्राप्त श्री गगन मिश्रा ने बच्चों को बताया कि यदि आप लोग नाटक करना चाहते हैं तो आपको चीजों का अवलोकन करना आना चाहिए । गगन ने बच्चों को अवलोकन व मेडीटेशन के माध्यम से कल्पनाशीलता के बारे में बताया और कुछ ऐसे चर्चित अभिनेताओं के बारे में बताया जिन्होंने रंगमंच से अपने जीवन की शुरुआत करी।

मुखर कविता ने बड़े ही रोचक ढंग से अभिनय के माध्यम से बच्चों को कहानी सुनाई जिसका सभी ने हंस हंस के आनन्द लिया। कार्यक्रम में वरिष्ठ शायर व रंगकर्मी विजय मिश्र दानिश, समाज सेवी रमेश शर्मा, लेखिका व कवियत्री मुखर कविता, युवा लेखिका चेतना शर्मा, लवलीन माथुर, शोभा सक्सेना, युवा सिनेमेटोग्राफर निर्मित जौहरी, मोनिका माथुर आदि कई लोगों शामिल थे।

अनिल सक्सेना जी ने घोषणा की कि बहुत जल्दी हम सब सामूहिक प्रयासों से इन बच्चों के लिए संगीत, नाटक व लेखन से सम्बंधित वोर्कशॉप भी लगाएंगे ताकि इन्हें भी अपनी प्रतिभा निखारने के अवसर मिले और मंच प्राप्त हो।

अंत में संस्थापिका मीनाक्षी माथुर ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि "कला मंज़र" के माध्यम से हम समाज को ये दर्शाना चाहते हैं कि जहाँ अपनी कला-संस्कृति , साहित्य,परम्पराओं का सम्मान और संरक्षण होता है वहाँ आत्मनिखार, आत्माभिव्यक्ति, आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता भी स्वतः पनपते हैं।

मीनाक्षी माथुर ने ग्लोबल वर्ल्ड सोसाइटी के बारे में भी बताया कि ये वर्ष 2015 से श्रम - शक्ति आपूर्ति , टूर व ट्रेवल्स प्रबंधन व कई क्षेत्रों में सफलता पूर्वक काम कर रही है और अब कला व सांस्कृतिक क्षेत्र में अपनी सेवाएं देना चाहती है। कार्यक्रम में उपस्थित सभी सम्मानीय अतिथियों ने अपनी गरिमामय उपस्थित से सभी बच्चों का हौंसला बढ़ाया और उनका मार्ग प्रशस्त किया।

 
 
 
 
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