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महादेव ,चंद्रशेखर, आशुतोष, नीलकंठ आदि- अगणित नामों से विभूषित भोलेनाथ की महिमा का ना तो आदि है ना तो अंत।।

यह साकार और निराकार दोनों ही रूपों में अपने भक्तों पर कृपा करते हैं, "शिवस्य नाम मातरम्" "सत्यम शिवम सुंदरम" जो सत्य है, कल्याणकारी है, और सुंदर है, वही शिव का स्वरूप है।।

शिव तारक ब्रम्ह,व शिव तम के देवता है जो अंधकार को दूर कर प्रकाश स्थापित करते हैं,रात्रिकालीन पर्वो में विशेष रूप से दो पर्व महत्तवपूर्ण हैं--

महाशिवरात्रि और नवरात्रि पौराणिक शास्त्रों के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन महादेव का विवाह माता पार्वती के साथ हुआ था 21 फरवरी 2020 शुक्रवार के दिन महाशिवरात्रि का पर्व पड़ रहा है, इस दिन इस पावन पर्व पर शिवलिंग का विधिपूर्वक पूजन कर अभिषेक करने से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं।।

महाशिवरात्रि जागरण का पर्व है अतः रात्रि में शिव मंत्र, स्त्रोत, चालीसा, कवच का पाठ करते हुए रात्रि जागरण करें।।

भगवान शिव ही ब्रह्म रूप होने के कारण निष्कल (निराकार) कहे गए हैं, रूपवान होने के कारण उन्हें "सकल" भी कहा गया हैं, इसलिए वे सकल और निकल दोनों हैं।।

शिव के निष्कल निराकार होने कारण उनकी पूजा का आधारभूत लिंग भी निराकार ही प्राप्त हुआ है, अर्थात शिवलिंग शिव के निराकार स्वरूप का प्रतीक है।।

इसी तरह शिव के सकल या साकार होने के कारण इनकी पूजा का आधारभूत विग्रह साकार प्राप्त होता है अतः शिव का साकार विग्रह उनके साकार स्वरूप का प्रतीक है।।

सकल और निष्कल (समस्त अंग- आकार सहित साकार और अंग आकार से सर्वदा रहित निराकार) रूप में ही होने से ही वे "ब्रह्म "शब्द से कहे जाने वाले परमात्मा है।।

यही कारण है कि सब लोग लिंग (निराकार) और मूर्ति (साकार) दोनों में ही सदा भगवान शिव की पूजा करते है

शिव से भिन्न जो दूसरे-दूसरे देवता हैं, वे साक्षात् ब्रह्म नहीं हैं, इसलिए कहीं भी उनके लिए निराकार लिंग उपलब्ध नहीं होता।।

शिवरात्रि को जो व्यक्ति दिन- रात निराहार और जितेंद्रिय रहकर अपनी शक्ति अनुसार निश्चल भाव से शिव की यथोचित पूजा करता हैं, करने पर जो फल मिलता है वह सारा फल केवल शिव उस मनुष्य को तत्काल अपनी कृपा प्रदान करते है ।। इस तिथि में जो शिवलिंग स्थापना, पूजा अभिषेक जो कोई भी करता है, उसके समस्त मनोकामना की पूर्ति भगवान शिव करते हैं।।

महाशिवरात्रि विशेष प्रयोग शिव उपासना:-

सुबह ब्रम्हमुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) दिशा में श्वेत वस्त्र श्वेत आसन पर बैठकर शिव का ध्यान करें, फिर फूल,धूप,दीप नैवेद्य से पूजन कर रूद्र गायत्री मंत्र

ऊँ तत्पुरूषाय विदमहे महादेवाय धीमहि
तन्नो रूद्रः प्रचोदयात की 3 माला जाप करें।।

1:-जिन लोगों के चंद्र कुंडली में चंद्र कमजोर हैं वह शाम के समय शिव के सामने बैठे उन्हें भांग धतूरा और बेलपत्र अर्पित करें एक चांदी का अर्धचंद्र भी अर्पण करें पहले शिव के मंत्र ऊँ आशुतोषाय नमः का जाप करें फिर चंद्र का मंत्र ऊँ सों सोमाय नमः का जाप करें, पूजा समाप्त होने के बाद अर्धचंद्र गले में पहन लें और गले में पहनने से पहले भगवान शिव की प्रार्थना करें।

भोलेनाथ जल का एक लोटा अर्पित करने से ही प्रसन्न होते हैं भोलेनाथ अपने भक्तों पर शीघ्र प्रसन्न होते हैं वह उनकी मनोकामना पूर्ण करते हैं।।

2;- कुण्डली में शनि दोषपूर्ण हैं तो जल में तिल मिलाकर शिव को चढ़ाये --और ऊँ नीलकण्ठाय नमः का जाप करें।।

3:- रोगों से मुक्ति प्राप्ति हेतु:-जल में कच्चा दूध,तिल,सर्वोषधि,डालकर चढ़ाये और महामृत्युञ्जय मंत्र का जाप करें।।

दीर्घायु हेतु :-शिव को दूर्वा चढ़ाये तीन दलो युक्त--ऐसा करने से भगवान शिव के साथ गणेश की कृपा भी प्राप्त होती हैं।।

शिवकृपा हेतु:- बेलपत्र के पत्तों पर राम मंत्र और शिव मंत्र लिखकर उन पत्तों की माला या पत्ते चढ़ाने से शिव प्रसन्न होते हैं।।

सर्वमनोकामना प्राप्ति हेतु:-पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक कराये।।

राशि अनुसार उपाय:-

मेष:-भगवान शिव को मंदार पुष्प,पत्र,व शमी पुष्प,पत्र अर्पण करें।।

वृषभ:-भगवान शिव को केशर मिश्रित दूध,दही व जल अर्पण करें--सम्पन्नता,वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा।।

मिथुन:-पंचामृत बेलपत्र-जल अर्पण करे--करीयर संतान बाधा दूर होगी।

कर्क:-भगवान शिव को शमी पुष्प,पत्र,कच्चा दूध मिश्रित जल चढ़ाये--सेहत सही व दुर्घटना से रक्षा होगी।।

सिंह:-गन्ने का रस व जल चढ़ाये--सम्पन्नता व संतान सुख की प्राप्ति होगी।।

कन्या:-भांग,धतूरा,लाल डंठल वाला,व लाल फल मीठा चढ़ाये--तनाव,विवाद दूर होगें।।

तुला:-भगवान शिव को बेलपत्र,चंदन का इत्र,व जल चढ़ाये --विवाह रोजगार की बाधा दूर होगी।।

वृश्चिक:-अबीर,गुलाल,जल,चढ़ाये--तनाव, विवाद,मुकदमा से राहत मिलेगी।।

धनु:-घी का एकमुखी दिया जला व शिवपंचाक्षरी स्त्रोत से आरती करें--हर कार्य में सफलता,व बाधा दूर होगी।।

मकर:-जल में तिल,मंदार पत्र चढाये--संतान सुख,व सुखद वैवाहिक जीवन प्राप्त होगा।।

कुम्भ:-बेलपत्र,दूध में शहद डालकर चढाये--मानसिक शांति व क्रोध की समस्या खत्म होगी।।

मीन:-मलयागिरी चंदन जल में डालकर चढाये--स्वास्थ्य व धन की समस्या दूर होगी।।

विशेष:-भगवान शिव को महाशिवरात्रि से शुरू कर नित्य गुड़हल का फूल चढ़ाये--नाम,यश की प्राप्ति,अपयश से छुटकारा मिलेगा।।

भगवान शिव को जल चढ़ाते समय नित्य निम्न मंत्र का जाप करें-----

ऊँ नमः शम्भवाय च मयोभवाय च।
नमः शंकराय च मयस्कराय च।।
नमः शिवाय च शिवतराय च।।

आचार्य राज पाण्डेय
अयोध्या (उत्तर प्रदेश)
मोबाइल नंबर 6394126276

इंदौर। वेलेंटाइन डे का जादू युवाओं पर ही नही मम्मीयो के भी सर पर चढ़कर बोल रहा है।यू सी मॉम्स क्लब इंदौर (फ्रेंड्स क्लब, इंदौर) की मॉम्स रेड थीम पर सेलिब्रेट किया। वेलेंटाइन वीक में यूं सी मॉम्स क्लब इंदौर की सदस्यताओ ने रेड थीम पर मैचिंग प्रतियोगिता रखी, जिसमें प्रथम पुरस्कार रजनी खेतान, कीर्ति अग्रवाल द्वितीय और पिंकी कदम ने तृतीय पुरुस्कार जीता। प्रपोज डे पर तरह तरह से रोमांचक तरीको से पहल कर प्रपोज किया गया । कई अन्य मनोरंजक खेल खेल गए। वेलेंटाइन वीक स्पेशल तम्बोला भी खेला । कार्यक्रम का आयोजन नेहा सोमानी और श्वेता अग्रवाल ने किया।

या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता। या वीणा वरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना। या ब्रम्हाऽच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैःसदावन्दिता। सां मां पातु सरस्वती भगवती निःशेष जाडयापहा।। नारी तू नारायणी सृष्टि में देवी के तीन रूपों की पूजा की जाती है-1:- महालक्ष्मी 2:-महासरस्वती 3:-महाकाली महासरस्वती के पूजन से ज्ञान, विद्या, बुद्धि का वरदान मिलता है, इसके अलावा संगीत, कला और अध्यात्म का आशीर्वाद भी मां सरस्वती प्रदान करती है, यदि आपकी कुंडली में शिक्षा बाधा के योग है या शिक्षा में मन ना लगने की समस्या है तो आप मां सरस्वती की आराधना पूजा से इस समस्या से मुक्ति पा सकते हैं।। माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विद्या बुद्धि की देवी मां सरस्वती की उपासना की जाती है इसी उपासना के पर्व को बसंत पंचमी कहते हैं शुभ काल में से एक होने के कारण इसे अबूझ मुहूर्त कहते हैं, ये अबूझ मुहूर्त तीन होते हैं- 1:- बसंत पंचमी 2:-अक्षय तृतीया 3:-देवोत्थानी एकादशी। इस अबूझ मुहूर्त में आप कोई भी शुभ कार्य कर सकते हैं- जैसे- विवाह, निर्माण कार्य, मुंडन,कर्णवेध संस्कार, ये मास ऋतुओं का संधिकाल होता है, सर्दी के साथ ही हल्की- हल्की गर्मी की शुरुआत भी इसी मास में होने के कारण इसे बसंत कहते हैं।। ज्ञान और विज्ञान का वरदान दोनों ही बसंत पंचमी मां सरस्वती की कृपा से प्राप्त कर सकते हैं ,इस बार बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त- 30 जनवरी 2020 गुरुवार को पड़ रहा है, बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती प्रकट हुई थी, इस कारण इसे बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है ।। पूजा विधि:- इस दिन सुबह सफेद या पीले वस्त्र धारण कर पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके मां सरस्वती का चित्र जिसमें मां सरस्वती श्वेत वस्त्र पहने हाथ में वीणा लिए कमल के पुष्प पर बैठी हो,स्थापित करे और अपने कलम,कापी,किताब,वाद्ययंत्र माँ के फोटों के पास रख दें।। पूजा सूर्योदय के ढाई घंटे बाद या सूर्यास्त के ढाई घंटे बाद करें ।। पहलें गणेश का पूजन करें फिर मां सरस्वती का धूप दीप चंदन आदि से पूजन करें। पूजन में सफेद चंदन और पीले, सफेद फूल,पीले फल अर्पण करें ,प्रसाद में मिश्री, दही ,मखाना, केशर बनी खीर मां को अर्पण करें फिर सरस्वती वंदना करें।। इसके बाद मां के दो विशेष बीज मंत्रों में से एक मंत्र का जाप स्फटिक की माला से तीन माला जाप करें- - 1:-ऊँ ऐं नमः 2:-ऊँ सरस्वत्यै नमः इसके साथ ही बुद्धि, विद्या, ज्ञान की प्रार्थना भी करें,जाप के बाद मां का प्रसाद ग्रहण करें।। विशेष उपाय ---- एकाग्रता हेतु:- बसंत पंचमी सुबह सरस्वती वंदना का पाठ करें,और हर बुधवार सफेद फूल मां सरस्वती को चढ़ाए ।। सुनने या बोलने की समस्या:- हो तो सोने या पीतल के चौकोर टुकड़े पर ऐं लिखवा कर माँ के चित्र पर चढ़ाकर पूजन कर लाल धागे में पहने ।। संगीत कला:- संगीत कला के क्षेत्र में अगर आप सफलता पाना चाहते तो केसर को पानी में घिसकर मां सरस्वती को अर्पण कर उसी चंदन से अपने जीभ पर ऐं लिखवाए- मां,पंडित या गुरू से --लिखवाने वाले जातक अशुद्ध खाने पीने की चीजों का सेवन ना करें।। कुंडली में अगर बुध कमजोर हो तो बुद्धि कमजोर हो जाती है, ऐसे में मां सरस्वती को हरे रंग फल अर्पण करें ।। कुंडली में अगर गुरु कमजोर हो तो शिक्षा प्राप्त करने में बाधा आती है, ऐसे में मां शारदा के समक्ष पीले वस्त्र पहनकर पीले फूल,फल मां शारदा को अर्पण करें व मंत्र जाप करें।। शुक्र कमजोर होने पर मन चंचल होता है, जिससे करियर से मन भटक जाता है, ऐसे में मां शारदा के सफेद वस्त्र धारण कर सफेद फूल, मीठा अर्पण करें।। राशि अनुसार उपाय:- मेष राशि:- वाले जातक मां सरस्वती को सफेद फूल और सफेद मीठा चढ़ाएं ।। वृषभ राशि:- वाले घर में सुगंधित इत्र का छिड़काव करें । मिथुन राशि:- वाले जातक अशोक के पत्तों का बंदनवार मुख्य द्वार पर लगाएं।। कर्क राशि:- वाले जातक के केशर मिश्रित खीर मां सरस्वती को अर्पण करें व ग्रहण करें।। सिंह राशि:-वाले जातक नारंगी और लाल वस्त्र का दान करें ।। कन्या राशि:- वाले जातक घर में सुगंधित इत्र का छिड़काव करें।। तुला राशि:-वाले जातक के केशर के खीर का भोग सरस्वती को चढ़ाए व ग्रहण करें।। वृश्चिक राशि:-वाले जातक सफेद पुष्प सफेद मीठा मां सरस्वती को चढ़ाएं।। धनु राशि:-वाले जातक हल्दी मिला जल सूर्य को अर्पण करें।। मकर राशि:-वाले जातक आम या अशोक का बंदनवार मुख्य द्वार पर लगाएं।। कुंभ राशि:-वाले जातक मीठी चीजें लोगों में बांटे।। मीन राशि:-वाले जातक पीले वस्त्र धारण करें।। राशि अनुसार कलम प्रयोग:- मेष राशि:- वाले जातक पीले रंग के कलम मां सरस्वती को अर्पण कर पूजाकर पूरे वर्ष प्रयोग करें।। वृषभ राशि:- वाले जातक नीले रंग का कलम माँ सरस्वती को चढ़ाकर पूजनकर पूरे वर्ष प्रयोग करें।। मिथुन राशि:- वाले जातक नीले रंग का कलम माँ सरस्वती को अर्पण कर पूजनकर पूरेवर्ष प्रयोग करें।। कर्क राशि:- वाले जातक पीला रंग का कलम माँ सरस्वती के चित्र पर अर्पण कर पूजनकर पूरे वर्ष प्रयोग करें।। सिंह राशि:- वाले जातक मां सरस्वती को लाल रंग का कलम माँ सरस्वती के चित्र पर अर्पण कर पूजनकर पूरे वर्ष प्रयोग करें ।। कन्या राशि:- वाले जातक सफेद रंग का कलम मां सरस्वती को अर्पण कर पूजन कर पूरे वर्ष प्रयोग करें ।। तुला राशि:- वाले जातक हरे रंग का कलम मां सरस्वती के चित्र पर अर्पण पूजन कर पूरे वर्ष प्रयोग करें ।। वृश्चिक राशि:- वाले जातक पीले रंग का कलम मां सरस्वती के चित्र पर अर्पण पूजन कर पूरे वर्ष प्रयोग करें।। धनु राशि:- वाले जातक गुलाबी रंग का कलम माँ सरस्वती के चित्र पर अर्पण पूजन कर पूरे वर्ष प्रयोग करें।। मकर राशि:- वाले जातक आसमानी आसमानी या हरा रंग का कलम मां सरस्वती के चित्र पर अर्पण पूजन कर पूरे वर्ष प्रयोग करें।। कुंभ राशि:- वाले जातक सिल्वर कलर,या बैंगनी रंग का कलम माँ सरस्वती के चित्र पर अर्पण पूजन कर पूरे वर्ष प्रयोग करें।। मीन राशि:- वाले जातक नारंगी रंग का कलम मां सरस्वती के चित्र पर अर्पण पूजन कर पूरे वर्ष प्रयोग करें।। सावधानी :-इस दिन मां सरस्वती की आराधना पूजन करें ,पुस्तक, कापी,या कलम का प्रयोग ना करें।। अपने कलम दूसरे को लिखने या गिफ्ट में ना दें इससे भाग रूठ जाता है।। विशेष उपाय:- पीले रंग के कागज पर,लाल रंग से सरस्वती बीजमंत्र ऐं ( बड़े अक्षरों में ) लिखकर पढ़ने के कमरे में उत्तर दिशा में लगादें ।। आचार्य राज पाण्डेय अयोध्या 6394126276

जयपुर// गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में संस्था ''कला मंज़र'' के सौजन्य से महिला परिषद द्वारा संचालित स्कूल अरुण बाल निकेतन में झंडारोहण व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कला मंज़र, ग्लोबल वर्ल्ड सोसायटी की सहायक संस्था है। कार्यक्रम में 1975 के बैच की सेवानिवृत्त वरिष्ठ आई.ए. एस. मीनाक्षी हुजा जी एवं महारानी कॉलेज की पूर्व प्राचार्या डॉ. अमला बत्रा जी को आमंत्रित किया गया। संस्था की संस्थापिका मीनाक्षी माथुर ने बताया कि झंडारोहण छोटे बच्चों के हाथों से करवाया गया साथ ही एक दिन पहले बच्चों की विशेष वर्कशॉप लेकर उनसे तिरंगा झंडा बनवाया गया और तिरंगे की कहानी भी बताई गई। संस्था के संरक्षक वरिष्ठ रंगकर्मी व संगीतकार अनिल सक्सेना जी ने बताया कि कला मंज़र की ओर से बच्चों को प्रेरक गीत और नृत्य सिखाया गया है। मीनाक्षी हुजा जी ने बच्चों को सविंधान निर्माण से सम्बंधित रोचक बातें बताईं व गांधीवादी मूल्यों और स्वच्छता के बारे में बताया। अमला बत्रा जी ने बच्चों को तिरंगे के निर्माण से सम्बंधित प्राथमिक जानकारी व राष्ट्र-गीत व राष्ट्र-गान के बारे में रोचक तथ्यों से अवगत करवाया। लेखिका मुखर कविता ने बच्चों को कहानी के रूप में उनके मूलभूत अधिकारों व कर्तव्यों के बारे में जानकारी दी साथ ही बताया कि सपने देखो और उन्हें पूरा करने के लिए मन से पहनता करो और पढ़ो। बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति की। कार्यक्रम के अंत में मीनाक्षी माथुर ने धन्यवाद वक्तव्य दिया और कला मंज़र के उद्देश्यों के बारे में बताया।कार्यक्रम में पूर्णिमा कौल जी , युवा प्रतिभा चेतना शर्मा भी शामिल रहे। शाइन राधे गोविंद माथुर जी का भी कार्यक्रम में विशेष सहयोग रहा। संस्था की ओर से बच्चों को ड्रॉइंग किट व बिस्कुट का वितरण भी किया गया।

जयपुर 14 जनवरी// (अशोक लोढ़ा) जयपुर में मकर संक्रांति के इस शुभ अवसर पर पतंगबाज़ी खूब देखी जाती है। सुबह से ही लोग छतों और मैदानों पर इकट्ठे हो कर तिल-गुड़ के व्यंजन और मूंग की दाल के पकौड़ों का स्वाद लेते हुए पतंग उड़ाते हुए नज़र आने लगते हैं। बाज़ार पूरी तरह से बंद देखे गए और सड़कें सूनी पड़ी रहीं लेकिन छतों और मैदानों पर खूब रौनक रही।

इस बार वी टी रोड स्थित मैदान में 12 से14 जनवरी तक जयपुर काइट फैस्टिवल आयोजित किया गया है। तीन दिन के इस उत्सव में पूरे दिन लोगों को देखा जा सकता है पर आज विशेष उत्साह देखा गया। बड़े और बच्चे, पुरुष और महिलाएं सभी पतंग उड़ाते और डी जे पर थिरकते हुए देखे गए।

पतंगबाजी का ये त्योहार जहां खुशियां और उल्लास देता है वहीं दूसरी ओर मूक पक्षियों के लिए दुखद मौत का सबब बनता है। पतंग के मांझे में उलझकर बुरी तरह घायल पक्षी ज़मीन पर गिरकर, तड़प तड़प कर दम तोड़ देते हैं। हालांकि सरकार की ओर से सुबह 5 से 8 बजे तक और शाम को 5 बजे से 7 बजे तक पक्षियों के हित को ध्यान में रखते हुए पतंगबाजी पर रोक लगाई गई है फिर भी दिन भर में हर साल भारी संख्या में पक्षियों के घायल की, मरने की सूचनाएं मिलती हैं।

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कुछ स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा घायल पक्षी सहायता कैंप भी जगह जगह देखे गए जहां सुबह से ही घायल पक्षियों को लाकर उपचार शुरू कर दिया गया। गम्भीर रूप से घायल पक्षियों को दुर्गापुरा स्थित पक्षी चिकित्सालय में भेजा गया। सहयोग सेतु संस्था की अध्यक्षा शिवानी शर्मा ने हमें बताया कि जयपुर में घायल पक्षियों के इलाज हेतु महेश नगर, स्वेज फार्म, गूर्जर की थड़ी पर कैंप लगाया गया है । जो कल भी लगा रहेगा । सहयोग सेतु संस्था जयपुर, आप सभी जयपुर वासियों से अपील करती है कि कहीं भी कोई घायल पक्षी नजर आए तो उसको तुरंत कैंप पर लाने का श्रम करे ।


"हद्द है जाने क्या समझती हैं खुद को .....
अब इन्हें लाभ भी चाहिए और बदले में कुछ देना भी नहीं ....
न इनसे पैसा लो न ये हाथ लगाने देंगी और तो और साला ये मि टू जाने क्या बला आ गया है ?
सब स्त्रियाँ हर समय उसी के बारे में बात करती रहती हैं . .....
त पूछ यार खुद को स्वर्ग से उतरी अप्सराएँ समझने लगी हैं ,"कहता जा रहा था विजय फोन पर अपने मित्र अप्रतिम से"


तभी उसकी नजर अखबार पर पड़ी जिसमें उसी के एक मित्र की गिरफ्तारी की खबर थी जिसने चार साल पहले अपने किसी सहयोगी को छुट्टियां देने के बदले शारीरिक शोषण किया था जिसने मि टू अभियान का हिस्सा बन उसके खिलाफ रिपोर्ट लिखवाई थी .....
फिर तुमने क्या सोचा , अप्रतिम की आवाज उधर से आई "तुम्हारी उस अप्सरा को छुट्टी देनी है या नहीं''
"कुछ नहीं बाद में बात करते हैं "
बोल विजय ने फोन रख दिया, .उसका हलक सूखा जा रहा था !

सीमा "मधुरिमा"
लखनऊ

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