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इन्दौरः09 मई, इन्दौर लोकसभा से भाजपा उम्मीदवार शंकर लालवानी के खिलाफ आचार संहिता के उल्लंघन का मामला दर्ज हुआ है. यह मामला जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर लोकेश जाटव की आदेश पर खजराना थाने में दर्ज किया है. वही भाजपा उम्मीदवार ने इसे सरकार के दबाव में की गई कार्रवाई बता रहे है.

गौरतलब है कि भाजपा उम्मीदवार शंकर लालावानी पिछले दिनों शहर के प्रसिध्द खजराना गणेश मन्दिर गए थें. इस दौरान भाजपा के रंग का चोला चढवाने का आरोप कांग्रेस ने लगाया था और इसकी शिकायत भोपाल में चुनाव आयोग की की गई थी. इस शिकायत पर जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर लोकेश जाटव ने लालवानी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. जवाब में लालवानी ने खजराना मन्दिर पूजा करने जाने की बात स्वीकार की थी.  लेकिन चोला चढाने की बात पर कुछ नहीं कहा था. उनके इस जवाब को संतोष जनक न मानते हुए जिला निर्वाचन अधिकारी ने खजराना थाना की पुलिस को धारा 3/7 और 188 के तहत मामला दर्ज करने का आदेश दिया था. इस आदेश पर पुलिस ने लालवानी और पुजारी अशोक भट्ट के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है. इन धाराओं के तहत दस हजार रुपए का अर्थ दंड और सजा का प्रावधान है.

वही भाजपा उम्मीदवार का कहना है कि कलेक्टर ने सरकार के दबाव पर उनके खिलाफ कार्रवाई की है. जबकि मंत्री जीतु पटवारी ने खुलेआम 25 लाख का जिम का सामान देने का प्रलोभन मतदाताओं को दिया था. उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. हॉलकि उन्होनें कहा कि वे कानून का सम्मान करते है.

इन्दौरः08 मई, (मुकेश मिश्रा) पांचवें चरण के मतदान के बाद अब चुनावी समर मप्र के मालवा-निमाड अंचल में शुरु होगा. इसकी शुरुआत 12 मई को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इन्दौर और खंडवा में आयोजित जन सभा से होगी. मोदी की सभा के बाद सम्भवना है कि राहुल गाँधी भी सभा होगी. वही कांग्रेस-भाजपा के स्टार प्रचारकों का जमघट लगेगा. मालवा-निमाड की आठ लोकसभा सीट पर अब कांग्रेस भाजपा के बीच घमासान मचा हुआ है. यह अंचल भाजपा की गढ रहा है. अधिकांश सीटों पर भाजपा पिछले 3 दशकों से जीत दर्ज कराती आ रही है. लेकिन इस बार स्थितियाँ बदली हुई है. विधानसभा चुनाव में इन आठ लोकसभा की 66 सीटों पर इस बार आधी से ज्यादा कांग्रेस के पास है.ऐसे में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस कडी टक्कर देते हुए नज़र आ रही है. भाजपा अपनी इन सीटों को फिर से पाने के लिए जी तोड कोशिश में जुटी हुई है. जिसके तहत इस अंचल में भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी की सभा रखी गई है. निमाड को साधने के लिए मोदी 12 मई को खंडवा जिले के छैगाँव माखन में सभा को सम्बोधित करके. करीब 3 बजे यहाँ सभा रखी गई है. इस सभा को सम्बोधित करने के बाद 5 बजे मोदी इन्दौर के दशहरा मैदान में आयोजित सभा को सम्बोधित करेगें. इन्दौर में मोदी के रोड शो का भी प्रयास किया जा रहे हैं. रोड शो को लेकर एक-दो दिन में स्थिति साफ हो जाएगी.वही मोदी की सभा के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की सभा का आयोजन भी इन्दौर में रखा गया है. 14 मई को उनकी सभा चिमनबाग मैदान में होगी. खंडवा में किसान ने रखी शर्त : प्रधानमंत्री की खंडवा के छैगांवमाखन सभा को लेकर जमीन के किसान ने भाजपा नेताओं के सामने एक शर्त रखी है. शर्त के तहत जमीन मालिक का कहना है कि सभा खत्म होने के बाद उसके खेत को जोत कर देना होगा. बताया जाता है कि मोदी की यह सभा एक निजी विश्वविद्यालय के पास की जगह पर किया जा रहा है. भाजपा के जिला अध्यक्ष ने किसान की शर्त को मान ली है.

इन्दौरः08 मई,(मुकेश मिश्रा) लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन भले ही अपने आपको भाजपा का कर्मठ कार्यकर्ता बता रही हो लेकिन टिकट काटे जाने के रवैये से वे ना-खुश है. उपरी तौर पर वे पार्टी के काम कर रही है. लेकिन अन्दरखाने से खबर है कि उनके समर्थक सेबोटेज में जुटे हुए है.इन्दौर से भाजपा का चेहरा उनके सिवाए कोई नहीं हो सकता. वे नहीं तो सीट नहीं की रननीति पर काम हो रहा है. वही आलाकमान भी उन पर नजर गडाये बैठा है. मराठी वोटरों को पक्ष में करने के लिए महाराष्ट्र के नेताओं को मैदान में उतर दिया है. श्रीमति महाजन 1989 से लगातार भाजपा की टिकट पर इन्दौर लोकसभा से चुनाव लडती और जीतती आ रही थी. उन्हें आशा थी कि पार्टी नौंवी बार भी मैदान में उतरेगा. चुनाव की तारीख की घोषणा से पहले ही वे अपने क्षेत्र में सक्रिय हो गयी. करीब आधा लोकसभा क्षेत्र वे घुम कर चुनावी रणनीति बना चूकी थी.उनकी टीम भी मैदान में उतर कर माहौल बनाने में लगी हुई थी. एक के बाद एक प्रदेश की लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी की घोषणा पार्टी करती रही लेकिन उनके नाम की घोषणा नहीं हुई. अंततः उन्होनें खुद ही चुनाव न लडने की घोषणा कर दी. इसके बाद भी वे लगातार इस कोशिश में लगी रही कि पार्टी उन्हें टिकट न दे लेकिन उनके परिवार से किसी को टिकट दे दे. इसके लिए उनके समर्थकों ने उनके पुत्र मन्दार महाजन के लिए टिकट मांगा पर आलाकमान ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया. अपने अपमान का कडवा घुंट पीकर वे भाजपा प्रत्याशी के लिए काम तो जरुर कर रही है लेकिन ऊपरी तौर पर. उनके समर्थकों का कहना है कि यदि महाजन नहीं तो इन्दौर भी भाजपा को नहीं. एक बडे मराठी वोट बैंक को अब भाजपा से दूर किए जाने की रणनीति में महाजन समर्थक जुटे हुए है. जिसमें मुक सहमति महाजन की भी बतायी जा रही है. कहा जा रहा है कि यहाँ भाजपा नहीं महाजन का चेहरा जीतता है. वही भाजपा आलकमान भी महाजन पर निगाहें गडाए बैठ हुआ है. उनकी हर एक चाल की काट के लिए रननीति तैयार की गई है. संगठन बताना चाहता है कि वे संगठन से है संगठन उनसे नहीं. भ्रम न पालें.

 नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले दुनिया के दूसरे नेता हैं. पहले नंबर पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा हैं. डिजीटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म एसईएमरश द्वारा मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, मोदी के फेसबुक, टि्वटर और इंस्टाग्राम पर कुल 11.09 करोड़ फॉलोअर हैं. ओबामा के कुल फॉलोअर 18.27 करोड़ हैं

आदर्श कुमार, उन्नाव । लोकसभा चुनाव में पांचवें चरण में मध्य प्रदेश की सात लोकसभा सीटों पर 6 मई को वोट डाले जा चुके है . इनमें यूपी की सीमा से सटी बुदंलेखंड की खजुराहो, सतना, टीकमगढ़, दमोह और रीवा की सीट शामिल है जबकि होशंगाबाद और बैतूल सीट महाकौशल क्षेत्र में आती हैं. 2014 में इन सातों सीटों पर बीजेपी ने कब्जा किया था. हालांकि इस बार बदले हुए सियासी समीकरण में बीजेपी को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा रहा है. वहीं, सूबे के मुख्यमंत्री कमलनाथ के सहारे कांग्रेस चुनावी मैदान में है, ऐसे में पार्टी को जिताने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है. टीकमगढ़: उत्तर प्रदेश की सीमा से सटी हुई टीकमगढ़ लोकसभा सीट मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में आती है. इस सीट पर कांग्रेस से अहिरवार किरण, बीजेपी से डॉ. वीरेंद्र कुमार और सपा के आरडी प्रजापति सहित 14 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. 2014 में बीजेपी से वीरेंद्र कुमार ने कांग्रेस के कमलेश वर्मा को 2,14,248 मतों से हराया था. इस बार वीरेंद्र कुमार टीकमगढ़ से हैट्रिक लगाने के मूड से चुनावी मैदान में हैं, लेकिन बदले हुए राजनीतिक समीकरण के चलते बीजेपी के लिए यह आसान नहीं है. जबकि कांग्रेस ने इस बार नए कैंडिडेट के सहारे चुनावी मैदान में है. खजुराहो: मंदिरों का शहर खजुराहो का चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है. इस सीट पर लगभग 15 साल से बीजेपी का कब्जा है. बीजेपी अपने मौजूदा सांसद का टिकट काटकर वीडी शर्मा को मैदान में उतारा है. जबकि कांग्रेस ने छतरपुर की शाही परिवार से ताल्लुक रखने वाली कविता सिंह पर दांव लगाया है. वहीं, सपा ने डाकू ददुआ के बेटे वीर सिंह पटेल को प्रत्याशी बनाया है. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के नागेंद्र सिंह ने कांग्रेस के राजा पटेरिया को हराकर सांसद चुने गए थे. खजुराहो के सियासी समीकरण को देखें तो यहां सबसे अधिक पिछड़े वर्ग के मतदाता हैं, जो चुनावों में अहम भूमिका निभाते हैं. इसलिए जिस किसी भी पार्टी से अगर कोई पिछड़े वर्ग का प्रत्याशी मैदान आता है, तो उसे आसानी से जीत मिल जाती है. इसके बाद खजुराहो लोकसभा सीट पर ब्राह्मण वोटर तीन लाख हैं. इसी जातीय समीकरण को देखते हुए सपा ने कुर्मी समुदाय से वीर सिंह पटेल पर दांव लगाया है जो यूपी के चित्रकूट सदर से विधायक रह चुके हैं. जबकि बीजेपी ने इस सीट पर ब्राह्मण कार्ड खेला है. सतना: मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड की सतना लोकसभा सीट पर बीजेपी के गणेश सिंह मैदान में हैं, तो कांग्रेस ने ब्राह्मण वोट को साधने के लिए राजाराम त्रिपाठी को मैदान में उतारा है. जबकि बसपा से अच्छे लाल कुशवाहा चुनावी मैदान में उतरकर लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है. हैट्रिक लगा चुके गणेश सिंह चौथी बार चुनावी मैदान में उतरे हैं. जबकि कांग्रेस की और से इस सीट पर जीत दर्ज करने वाले अर्जुन सिंह आखिरी नेता थे, जिन्होंने 1991 में जीत हासिल की थी. इसके बाद से लगातार यहां बीजेपी का कब्जा है. सतना सीट पर अर्जुन सिंह के परिवार की आज भी तूती बोलती है. 2014 के लोकसभा चुनाव में गणेश सिंह को 3,75,288 वोट मिले थे और अजय सिंह को 3,66,600 वोट मिले थे. मोदी लहर पर सवार बीजेपी करीब 9 हजार वोटों से जीत हासिल की थी. इस बार के बदले हुए सियासी समीकरण में बीजेपी के लिए यह सीट जीतना आसान नहीं है. रीवा: उत्तर प्रदेश की सीमा लगी हुई रीवा लोकसभा सीट पर बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद जनार्दन मिश्रा पर फिर से उतारा है. जबकि कांग्रेस ने भी ब्राह्मण कार्ड खेलते हुए सिद्धार्थ तिवारी पर भरोसा जताया है और बसपा ने ओबीसी समीकरण को देखते हुए कुर्मी समुदाय के विकास पटेल को उतारा है. इसके चलते रीवा का चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के जनार्दन मिश्रा ने कांग्रेस के सुंदर लाल तिवारी को एक लाख साठ हजार मतों से मात दी थी. बसपा यहा तीसरे नंबर पर रही थी. पिछले 15 साल से कांग्रेस यह सीट नहीं जीत सकती है. जबकि बसपा इस सीट पर 1991, 1996 और 2009 में जीत दर्ज की है. इस तरह बसपा का इस सीट अच्छा खासा आधार है, जिससे मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है. दमोह: बुंदेलखंड की दमोह लोकसभा सीट पर बीजेपी से प्रहलाद पटेल, कांग्रेस से प्रताप सिंह लोधी और बसपा से जित्तू खरे (बादल) सहित 15 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. कांग्रेस इस सीट पर पिछले तीन दशक से जीत का स्वाद नहीं चख पाई है. जबकि कांग्रेस इस सीट पर कभी जातीय तो कभी मुद्दे के जरिए प्रत्याशी उतारे लेकिन जीत नहीं मिल सकी है. 2014 में प्रहलाद पटेल ने कांग्रेस के महेंद्र प्रताप सिंह को 2 लाख से ज्यादा मतों से मात देकर जीत हासिल की थी. होशंगाबाद: होशंगाबाद लोकसभा सीट पर बीजेपी से मौजूदा सांसद उदय प्रताप सिंह, कांग्रेस से शैलेंद्र दीवान चंद्रभान सिंह और बसपा से एमपी चौधरी सहित 11 उम्मीदवार मैदान में हैं. होशंगाबाद लोकसभा सीट बीजेपी का गढ़ माना जाता है.1989 से लेकर 2004 तक बीजेपी को 6 बार लगातार जीत दर्ज की थी. 2009 में कांग्रेस ने इस सीट को बीजेपी से छीन लिया था. 2014 में मोदी लहर देखकर उदय सिंह कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए और सांसद चुने गए. होशंगाबाद सीट के जातीय समीकरण को देखें तो 25 फीसदी ब्राह्मण, 22 फीसदी राजपूत, 30 फीसदी ओबीसी, 8 फीसदी वैश्य, 5 फीसदी मुस्लिम 10 फीसदी दलित और आदिवासी मतदाता हैं. इसके अलावा करीब 3 फीसदी सिख वोटर भी हैं. ऐसे में इस सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है. बैतूल: बैतुल लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. यह सीट कमलनाथ के मजबूत गढ़ माने जाने वाले छिंदवाड़ा से सटी हुई है. बैतूल सीट पर बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद का टिकट काटकर दुर्गा दास उइके, कांग्रेस ने राम टेकाम और बसपा ने अशोक भलावी को चुनावी रणभूमि में उतारा है. 2014 बीजेपी की ज्योति धुर्वे ने कांग्रेस के अजय शाह को सवा तीन लाख मतों से मात दी थी. हालांकि इस बार सूबे के बदले सियासी समीकरण के चलते बीजेपी ने अपना प्रत्याशी बदल दिया है. इसके बावजूद कमलनाथ के प्रभाव के चलते बीजेपी के लिए यह सीट जीतना आसान नहीं दिख रहा है.

आदर्श कुमार, उन्नाव । लोकसभा चुनाव में पांचवें चरण में मध्य प्रदेश की सात लोकसभा सीटों पर 6 मई को वोट डाले जा चुके है . इनमें यूपी की सीमा से सटी बुदंलेखंड की खजुराहो, सतना, टीकमगढ़, दमोह और रीवा की सीट शामिल है जबकि होशंगाबाद और बैतूल सीट महाकौशल क्षेत्र में आती हैं. 2014 में इन सातों सीटों पर बीजेपी ने कब्जा किया था. हालांकि इस बार बदले हुए सियासी समीकरण में बीजेपी को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा रहा है. वहीं, सूबे के मुख्यमंत्री कमलनाथ के सहारे कांग्रेस चुनावी मैदान में है, ऐसे में पार्टी को जिताने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है. टीकमगढ़: उत्तर प्रदेश की सीमा से सटी हुई टीकमगढ़ लोकसभा सीट मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में आती है. इस सीट पर कांग्रेस से अहिरवार किरण, बीजेपी से डॉ. वीरेंद्र कुमार और सपा के आरडी प्रजापति सहित 14 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं. 2014 में बीजेपी से वीरेंद्र कुमार ने कांग्रेस के कमलेश वर्मा को 2,14,248 मतों से हराया था. इस बार वीरेंद्र कुमार टीकमगढ़ से हैट्रिक लगाने के मूड से चुनावी मैदान में हैं, लेकिन बदले हुए राजनीतिक समीकरण के चलते बीजेपी के लिए यह आसान नहीं है. जबकि कांग्रेस ने इस बार नए कैंडिडेट के सहारे चुनावी मैदान में है. खजुराहो: मंदिरों का शहर खजुराहो का चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है. इस सीट पर लगभग 15 साल से बीजेपी का कब्जा है. बीजेपी अपने मौजूदा सांसद का टिकट काटकर वीडी शर्मा को मैदान में उतारा है. जबकि कांग्रेस ने छतरपुर की शाही परिवार से ताल्लुक रखने वाली कविता सिंह पर दांव लगाया है. वहीं, सपा ने डाकू ददुआ के बेटे वीर सिंह पटेल को प्रत्याशी बनाया है. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के नागेंद्र सिंह ने कांग्रेस के राजा पटेरिया को हराकर सांसद चुने गए थे. खजुराहो के सियासी समीकरण को देखें तो यहां सबसे अधिक पिछड़े वर्ग के मतदाता हैं, जो चुनावों में अहम भूमिका निभाते हैं. इसलिए जिस किसी भी पार्टी से अगर कोई पिछड़े वर्ग का प्रत्याशी मैदान आता है, तो उसे आसानी से जीत मिल जाती है. इसके बाद खजुराहो लोकसभा सीट पर ब्राह्मण वोटर तीन लाख हैं. इसी जातीय समीकरण को देखते हुए सपा ने कुर्मी समुदाय से वीर सिंह पटेल पर दांव लगाया है जो यूपी के चित्रकूट सदर से विधायक रह चुके हैं. जबकि बीजेपी ने इस सीट पर ब्राह्मण कार्ड खेला है. सतना: मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड की सतना लोकसभा सीट पर बीजेपी के गणेश सिंह मैदान में हैं, तो कांग्रेस ने ब्राह्मण वोट को साधने के लिए राजाराम त्रिपाठी को मैदान में उतारा है. जबकि बसपा से अच्छे लाल कुशवाहा चुनावी मैदान में उतरकर लड़ाई को त्रिकोणीय बना दिया है. हैट्रिक लगा चुके गणेश सिंह चौथी बार चुनावी मैदान में उतरे हैं. जबकि कांग्रेस की और से इस सीट पर जीत दर्ज करने वाले अर्जुन सिंह आखिरी नेता थे, जिन्होंने 1991 में जीत हासिल की थी. इसके बाद से लगातार यहां बीजेपी का कब्जा है. सतना सीट पर अर्जुन सिंह के परिवार की आज भी तूती बोलती है. 2014 के लोकसभा चुनाव में गणेश सिंह को 3,75,288 वोट मिले थे और अजय सिंह को 3,66,600 वोट मिले थे. मोदी लहर पर सवार बीजेपी करीब 9 हजार वोटों से जीत हासिल की थी. इस बार के बदले हुए सियासी समीकरण में बीजेपी के लिए यह सीट जीतना आसान नहीं है. रीवा: उत्तर प्रदेश की सीमा लगी हुई रीवा लोकसभा सीट पर बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद जनार्दन मिश्रा पर फिर से उतारा है. जबकि कांग्रेस ने भी ब्राह्मण कार्ड खेलते हुए सिद्धार्थ तिवारी पर भरोसा जताया है और बसपा ने ओबीसी समीकरण को देखते हुए कुर्मी समुदाय के विकास पटेल को उतारा है. इसके चलते रीवा का चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के जनार्दन मिश्रा ने कांग्रेस के सुंदर लाल तिवारी को एक लाख साठ हजार मतों से मात दी थी. बसपा यहा तीसरे नंबर पर रही थी. पिछले 15 साल से कांग्रेस यह सीट नहीं जीत सकती है. जबकि बसपा इस सीट पर 1991, 1996 और 2009 में जीत दर्ज की है. इस तरह बसपा का इस सीट अच्छा खासा आधार है, जिससे मुकाबला काफी दिलचस्प हो गया है. दमोह: बुंदेलखंड की दमोह लोकसभा सीट पर बीजेपी से प्रहलाद पटेल, कांग्रेस से प्रताप सिंह लोधी और बसपा से जित्तू खरे (बादल) सहित 15 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं. कांग्रेस इस सीट पर पिछले तीन दशक से जीत का स्वाद नहीं चख पाई है. जबकि कांग्रेस इस सीट पर कभी जातीय तो कभी मुद्दे के जरिए प्रत्याशी उतारे लेकिन जीत नहीं मिल सकी है. 2014 में प्रहलाद पटेल ने कांग्रेस के महेंद्र प्रताप सिंह को 2 लाख से ज्यादा मतों से मात देकर जीत हासिल की थी. होशंगाबाद: होशंगाबाद लोकसभा सीट पर बीजेपी से मौजूदा सांसद उदय प्रताप सिंह, कांग्रेस से शैलेंद्र दीवान चंद्रभान सिंह और बसपा से एमपी चौधरी सहित 11 उम्मीदवार मैदान में हैं. होशंगाबाद लोकसभा सीट बीजेपी का गढ़ माना जाता है.1989 से लेकर 2004 तक बीजेपी को 6 बार लगातार जीत दर्ज की थी. 2009 में कांग्रेस ने इस सीट को बीजेपी से छीन लिया था. 2014 में मोदी लहर देखकर उदय सिंह कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए और सांसद चुने गए. होशंगाबाद सीट के जातीय समीकरण को देखें तो 25 फीसदी ब्राह्मण, 22 फीसदी राजपूत, 30 फीसदी ओबीसी, 8 फीसदी वैश्य, 5 फीसदी मुस्लिम 10 फीसदी दलित और आदिवासी मतदाता हैं. इसके अलावा करीब 3 फीसदी सिख वोटर भी हैं. ऐसे में इस सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला माना जा रहा है. बैतूल: बैतुल लोकसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. यह सीट कमलनाथ के मजबूत गढ़ माने जाने वाले छिंदवाड़ा से सटी हुई है. बैतूल सीट पर बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद का टिकट काटकर दुर्गा दास उइके, कांग्रेस ने राम टेकाम और बसपा ने अशोक भलावी को चुनावी रणभूमि में उतारा है. 2014 बीजेपी की ज्योति धुर्वे ने कांग्रेस के अजय शाह को सवा तीन लाख मतों से मात दी थी. हालांकि इस बार सूबे के बदले सियासी समीकरण के चलते बीजेपी ने अपना प्रत्याशी बदल दिया है. इसके बावजूद कमलनाथ के प्रभाव के चलते बीजेपी के लिए यह सीट जीतना आसान नहीं दिख रहा है.