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इंदौर।आज 13 मई शाम 7:15 बजे लाभ मंडपम, रेसकोर्स रोड में गुजरात के मुख्यमंत्री श्री विजय रूपाणी पार्टी प्रत्याशी शंकर लालवानी के समर्थन में सभा को संबोधित करेंगे एवं केन्द्रीय मंत्रीफ नितिन गड़करी रात्रि 8 बजे गुरू अमरदास हॉल में प्रबुद्धजनों से चर्चा करेगे।

उज्जैन। (रजनी खैतान) कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सोमवार को प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर (महाकाल) मंदिर में पूरे विधि विधान से पूजा की और पंचामृत से अभिषेक किया। प्रियंका ने वाड्रा ने मंदिर के गर्भगृह में भगवान महाकालेश्वर का दूध, पंचामृत और अबीर-गुलाल से अभिषेक किया। इस दौरान गर्भगृह में मुख्यमंत्री कमलनाथ और वरिष्ठ नेता सुरेश पचौरी भी मौजूद थे। तीनों आला नेता करीब आधे घंटे तक गर्भगृह में रुके और अनुष्ठान किया। प्रियंका गांधी हवाई जहाज से इंदौर और फिर वहां से हेलिकॉप्टर से उज्जैन पहुंचीं। उनके साथ मुख्यमंत्री कमलनाथ भी थे। प्रियंका ने महाकालेश्वर मंदिर में पूजा पाठ करने के साथ ही पंचामृत पूजन किया। देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रमुख भगवान महाकालेश्वर मंदिर में इसके पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान दर्शन के लिए आए थे। प्रियंका ने मध्य प्रदेश के उज्जैन, रतलाम और इंदौर संसदीय क्षेत्र में चुनाव प्रचार कर रही हैं। शाम को उनका इंदौर में करीब दो घंटे का एक रोड शो होगा। वे इस चुनाव के दौरान पहली बार मध्यप्रदेश आई हैं। पूजा अर्चना के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अनुष्ठान कराने वाले पुजारी का शॉल भेंट कर सम्मान भी किया। प्रदेश में 19 मई को आखिरी चरण में इंदौर, उज्जैन, मंदसौर, खंडवा, खरगोन, देवास, धार और रतलाम में चुनाव शेष है। मध्यप्रदेश की इन आठ सीटों में से कई पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का बड़ा प्रभाव माना जाता है।

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को पश्चिम बंगाल के जाधवपुर में रैली करने की इजाजत नहीं मिली है। साथ ही यहां उनके हेलीकॉप्‍टर को भी लैंड करने की अनुमति नहीं मिली है। लोकसभा चुनाव 2019 के सातवें चरण के लिए 19 मई को मतदान होना है। ये मतदान का आखिरी चरण है, इसलिए सभी पार्टियों ने अपनी पूरी ताकत झौंकने की तैयारी कर ली है। हालांकि, इस बीच ममता बनर्जी का भाजपा की राह में बांधाएं उत्‍पन्‍न करना जारी है। ममता बनर्जी इससे पहले भी भाजपा नेताओं को सुरक्षा का हवाला देते हुए पश्चिम बंगाल में रैली करने और हेलीकॉप्‍टर की लैंडिंग की इजाजत देने से इन्‍कार कर चुकी हैं। आज 12.30 बजे शाह यहां रैली करने वाले थे। इससे पहले 22 फरवरी को भी ममता बनर्जी ने अमित शाह की मालदा रैली के दौरान उनके हेलीकॉप्टर लैंडिंग पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद बीजेपी ने ममता सरकार पर प्रशासनिक शक्तियों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था। भाजपा की तरफ से कहा गया था कि जब हर हफ्ते सीएम का चॉपर वहां उतरता है, तब फिर शाह के हेलीकॉप्टर को इजाजत देने में क्या दिक्कत है? हालांकि बाद में दीदी ने इसके लिए उन्हें इजाजत दे दी थी। वहीं ममता सरकार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हेलीकॉप्टर लैंडिंग पर भी रोक लगा चुकी है। इसके बाद योगी ने बालुरघाट और रायगंज में रैलियों को संबोधित करने के लिए सड़के के माध्यम से बंगाल जाने का निर्णय लिया था। भारतीय जनता पार्टी की रथयात्रा को भी राज्य में अनुमति नहीं मिली थी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शाह की रथयात्रा पर रोक लगा दी थी। उन्हें यहां सिर्फ रैलियां और जनसभाएं करने की इजाजत मिली थी, लेकिन दीदी कई बार सुरक्षा का हवाला देकर इनमें भी रोडे अटका चुकी हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने शाह की रथयात्रा को लेकर कहा था कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता की इससे सौहार्द बिगड़ सकता है। बता दें कि अमित शाह आज पश्चिम बंगाल में तीन जगह जनसभा को संबोधित करने वाले थे। उनकी पहली रैली सुबह जयनगर में होनी थी, इसके बाद वह जाधवपुर और बरासत लोकसभा सीटों पर जनसभाओं को संबोधित करने वाले थे।

भोपाल । लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी दिग्विजय सिंह ने भोपालवासियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भीषण गर्मी में भी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, इसके लिए सभी मतदाता बंधु बधाई के पात्र हैं। उन्होंने महिला, पुरुष, मजदूर, किसान, व्यापारी, कर्मचारी आदि सभी वर्गों ने भोपाल के सद्भाव व विकास के लिए वोट किया, इसके लिए सभी का तहे-दिल से धन्यवाद दिया। श्री सिंह ने आशा व्यक्त की कि भारत के लोग संविधान प्रदत्त मताधिकार का प्रयोग करते रहेंगे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया निरंतर जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि मतदाता उन्हें आशीर्वाद देते हुए भोपाल की सेवा का अवसर देंगे। श्री सिंह ने सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं और मीडिया कर्मियों का भी धन्यवाद किया। अपनी जीत के प्रति विश्वास प्रकट करते हुए श्री सिंह ने कहा कि भोपाल के सांसद के रूप में अपने दिए वचन निभाएंगे तथा ‘‘भोपाल विजन डाक्यूमेंट’’ अक्षरशः लागू करेंगे।

हम आपके लिए 50 ऐसे चुनावी नारे लेकर आए हैं जिनके सहारे कभी सत्ता की सीढ़ियां चढ़ने की कोशिश की गई थी.1- जमीन गई चकबंदी में, मकान गया हदबंदी में, द्वार खड़ी औरत चिल्लाए, मेरा मरद गया नसबंदी में – आपातकाल और नसबंदी अभियान के खिलाफ ये नारा काफी चर्चित हुआ.2- जली झोपड़ी भागे बैल, यह देखो दीपक का खेल (साठ के दशक में जनसंघ और कांग्रेस में नारों के जरिये खूब नोंकझोंक होती थी. जनसंघ का चुनाव चिह्न दीपक था जबकि कांग्रेस का चुनाव चिन्ह दो बैलों की जोड़ी थी.)3- इस दीपक में तेल नहीं, सरकार बनाना खेल नहीं (जनसंघ के ‘जली झोपड़ी भागे बैल यह देखो दीपक का खेल’ नारे के जवाब में कांग्रेस का ये जवाबी नारा था,4- खरो रुपयो चांदी को, राज महात्मा गांधी को (1952 में आजादी के बाद के पहले चुनाव में कांग्रेस के कुछ नेताओं ने ये नारा दिया था)5- संजय की मम्मी–बड़ी निकम्मी (1977 में इंदिरा के खिलाफ नारा)6- बेटा कार बनाता है, मां बेकार बनाती है (1977 में इंदिरा के खिलाफ नारा)7- नसबंदी के तीन दलाल- इंदिरा, संजय, बंसीलाल (1977 में इंदिरा के खिलाफ नारा)8- एक शेरनी सौ लंगूर, चिकमंगलूर-चिकमंगलूर (1978 में कर्नाटक के चिकमंगलूर से इंदिरा गांधी उप चुनाव लड़ रही थीं. उस दौरान दक्षिण भारत के कांग्रेसी नेता देवराज उर्स ने यह नारा दिया था.)9- संसोपा ने बांधी गांठ, पिछड़े पावें सौ में साठ (पिछड़ों को सत्ता में भागीदारी के लिए समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया दिया गया नारा)10- देश की जनता भूखी है यह आजादी झूठी है- आजादी के बाद कम्यूनिस्ट नेताओं द्वारा दिया गया नारा.11- लाल किले पर लाल निशान, मांग रहा है हिंदुस्तान- लेफ्ट पार्टियों द्वारा दिया गया नारा12- धन और धरती बंट के रहेगी, भूखी जनता चुप न रहेगी – समाजवादियों और साम्यवादियों की ओर से 1960 के दशक में दिया गया नारा.13- आकाश से नेहरू करें पुकार, मत कर बेटी अत्याचार- आपातकाल के खिलाफ दिया गया एक नारा14- देखो इंदिरा का ये खेल, खा गई राशन, पी गई तेल – इंदिरा के गरीबी हटाओ नारे का उनके राजनीतिक विरोधियों ने इस नारे से जवाब दिया था.15- जात पर न पात पर, इंदिराजी की बात पर, मुहर लगाना हाथ पर – कांग्रेस के लिए साहित्यकार श्रीकांत वर्मा का लिखा यह नारा काफी चर्चित रहा.16- जगजीवन राम की आई आंधी, उड़ जाएगी इंदिरा गांधी- आपातकाल के दौरान एक नारा17- गरीबी हटाओ (1971 में इंदिरा गांधी ने यह नारा दिया था. उस दौरान वो अपनी हर चुनावी सभा में अपने भाषण के अंत में एक ही वाक्य बोलती थीं- ‘वे कहते हैं, इंदिरा हटाओ, मैं कहती हूं गरीबी हटाओ, फैसला आपको करना है)18- जिंदा कौमें पांच साल तक इंतजार नहीं करतीं (राम मनोहर लोहिया द्वारा दिया गया नारा)19- इंदिरा इज़ इंडिया एण्ड इंडिया इज़ इंदिरा (कांग्रेस नेता देवकांत बरुआ ने आपातकाल के दौरान इंदिरा गांधी के बारे में ये नारा दिया था.)20- इंदिरा हटाओ देश बचाओ ( 1977 में जय प्रकाश नारायण द्वारा दिया गया नारा.)21- सम्पूर्ण क्रांति अब नारा है/भावी इतिहास तुम्हारा है/ ये नखत अमा के बुझते हैं/ सारा आकाश तुम्हारा है. दो राह समय के रथ का घर्घर नाद सुनो/ सिंहासन खाली करो कि जनता आती है – जेपी आंदोलन के दौर में रामधारी सिंह दिनकर की कविता कि ये पंक्तियां जनांदोलन का नारा बन गई.22- जब तक सूरज चांद रहेगा, इंदिरा तेरा नाम रहेगा- 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस द्वारा दिया गया नारा.23- मेरे खून का अंतिम कतरा तक इस देश के लिए अर्पित है – इंदिरा की हत्या के बाद राजीव गांधी के नेतृत्व में लड़े गए चुनाव में कांग्रेस ने इंदिरा के इस कथन को बतौर नारा प्रयोग किया.24- उठे करोड़ों हाथ हैं, राजीव जी के साथ हैं – इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुआ आम चुनाव में ये नारा गूंजा.25- राजा नहीं फकीर है, देश की तकदीर है- 1989 के चुनावों में वीपी सिंह को लेकर बना यह नारा काफी चर्चित रहा.26- सौगंध राम की खाते हैं हम मंदिर वहीं बनाएंगे. ये तो पहली झांकी है, काशी मथुरा बाकी है. रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे. (राम मंदिर आंदोलन के दौर में भाजपा और संघ के नारे)27- राजीव तेरा ये बलिदान याद करेगा हिंदुस्तान – 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस पार्टी ने ये नारा दिया.28- सबको देखा बारी-बारी, अबकी बार अटल बिहारी – 1996 में भाजपा द्वारा दिया गया नारा.29- अटल बिहारी बोल रहा है, इंदिरा शासन डोल रहा है – भारतीय जनसंघ के दौर में उसका एक नारा.30- भूरा बाल साफ करो – लालू पर ये आरोप लगा कि उन्होंने ये नारा 1992 में ऊंची जाति के लोगों को अपमानित करने के लिए उछाला था.31- रोटी, कपड़ा और मकान, मांग रहा है हिंदुस्तान (समाजवादी नेताओं द्वारा दिया गया नारा)32- महंगाई को रोक न पाई, यह सरकार निकम्मी है, जो सरकार निकम्मी है, वह सरकार बदलनी है- (समाजवादियों द्वारा इंदिरा गांधी के खिलाफ दिया गया नारा)33- अटल, आडवाणी, कमल निशान, मांग रहा है हिंदुस्तान – भाजपा द्वारा उसके शुरुआती दिनों में दिया गया नारा34- जात पर न पात पर मुहर लगेगी हाथ पर – 1996 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा दिया गया नारा35- राम और रोम की लड़ाई – 1999 के चुनाव में बीजेपी की तरफ से सोनिया गांधी पर निशाना साधने वाला ये नारा भी सामने आया.36- आधी रोटी खाएंगे, इंदिराजी को लाएंगे. इंदिरा जी की बात पर, मुहर लगेगी हाथ पर – जनता पार्टी के ढाई साल के शासन से परेशान जनता की भावनाओं को भुनाने के लिए 1980 में कांग्रेस ने ये नारा दिया था.37- अमेठी का डंका, बेटी प्रियंका – अमेठी में प्रियंका गांधी के पहली बार चुनाव प्रचार में पहुंचने पर स्थानीय कांग्रेसियों का नारा.38- हर हाथ को काम, हर खेत को पानी, हर घर में दीपक, जनसंघ की निशानी – जनसंघ के समय में उसका एक नारा39- मां, माटी, मानुष – 2010 में बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस द्वारा दिया गया नारा.40- ठाकुर बाभन बनिया चोर, बाकी सब हैं डीएसफोर. तिलक ताराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार – कांशीराम द्वारा दिए गए नारे41- मिले मुलायम कांशीराम, हवा हो गए जयश्रीराम- 1993 में जब यूपी में सपा और बसपा ने मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ा था तो भाजपा को टार्गेट करता हुआ ये नारा काफी चर्चित रहा.42- चलेगा हाथी उड़ेगी धूल, ना रहेगा हाथ, ना रहेगा फूल – बसपा का एक नारा.43- ऊपर आसमान, नीचे पासवान – कभी बिहार में रामविलास पासवान को लेकर ये नारा काफी चर्चित था. 44-चढ़ गुंडन की छाती पर मुहर लगेगी हाथी पर– बसपा द्वारा दिया गया एक नारा 45-अबकी बार मोदी सरकार– 2014 लोकसभा चुनाव में भाजपा द्वारा दिया गया नारा 46- कट्टर सोच नहीं युवा जोश– 2014 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा दिया गया नारा 47-यूपी में है दम क्योंकि जुर्म यहां है कम– 2007 उत्तर प्रदेश विधानसभा के समय सपा द्वारा दिया गया नारा 48- गुंडे चढ़ गए हाथी पर गोली मारेंगे छाती पर–बसपा के नारे के खिलाफ विपक्षियों का चर्चित नारा 49 -पंडित शंख बजाएगा, हाथी बढ़ता जाएगा– 2007 उत्तर प्रदेश विधानसभा के समय बसपा द्वारा दिया गया नारा 50 -हाथी नहीं गणेश है, ब्रह्मा-विष्णु महेश है– 2007 उत्तर प्रदेश विधानसभा के समय बसपा द्वारा दिया गया नारा ।

नई दिल्ली. इंडियन टुबैको कंपनी लिमिटेड (आईटीसी) के पूर्व एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और सीईओ वाईसी देवेश्वर का शनिवार को 72 साल की उम्र में निधन हो गया। आईटीसी ने उनके निधन की पुष्टि की है। देवेश्वर दो दशक से ज्यादा आईटीसी के प्रमुख रहे। देवेश्वर का जन्म 4 फरवरी 1947 को लाहौर में हुआ था। उन्होंने दिल्ली आईआईटी और उसके बाद हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई की। 1968 में उन्होंने आईटीसी ज्वाइन की। 1991 से 94 तक देवेश्वर एयर इंडिया के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर (सीएमडी) रहे। वे आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड में भी डायरेक्टर रहे। देवेश्वर ने 2017 में आईटीसी का चीफ एग्जीक्यूटिव का पद छोड़ दिया था। इसके बाद वे कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन बने रहे।