मेडिकल (12)

मेडिकल

कमर और पेट का ये बढ़ता साइज कई बीमारियों का कारण बन सकता है!

रजनी खेतान, इंदौर 
आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं तो हम आपको बताने जा रहे हैं कुछ ऐसे छोटे-छोटे नुस्खे, जिन्हें अपनाकर आप बिना ज्यादा मेहनत किए वजन को नियंत्रित कर सकते हैं:-
छोटी पीपल को बारीक पीसकर चूर्ण बना ले फिर उसे कपड़े से छान लें।इस चूर्ण को तीन ग्राम हर रोज सुबह के समय छाछ के साथ लेने से बाहर निकला हुआ पेट अंदर हो जायेगा।
खाना कम और सलाद अधिक खाए। खाने के साथ टमाटर और प्याज का सलाद काली मिर्च व नमक डालकर खाएं। इनसे शरीर को विटामिन सी, विटामिन ए, विटामिन के, आयरन, पोटैशियम, लाइकोपीन और ल्यूटिन मिलेेगा। इन्हें खाने के साथ खाने से पेट जल्दी भर जाएगा और वजन नियंत्रित हो जाएगा।
*पुदीना में एंटीऑक्सीडेंट होते है मोटपा को नियंत्रित करने में लाभदायक होते है। पुदीने की ताजी हरी पत्तियों की चटनी बनाकर खाएं। पुदीने वाली चाय पीने से भी वजन नियंत्रण में रहता है।
लंबे समय तक पपीता के सेवन से कमर की अतिरिक्त चर्बी कम होती है। इसलिए पपीता नियमित रूप से खाएं। यह हर सीजन में मिल जाता है।
सौंफ का प्रयोग भी में काफी उत्तम रहता है। एक कप खौलते पानी में आधा चम्मच सौंफ को डाल दें। 10 मिनट तक इसे ढककर रखें। ठंडा होने पर इस पानी को पिएं। ऐसा तीन माह तक लगातार करने से वजन कम होने लगता है।
दही और छाछ फालतू चर्बी घटाने में बहुत लाभदायक है। दही और छाछ का सेवन दिन में दो-तीन बार करें।
बेसन से बनी चीजे खाए,इनसे फालतू चर्बी घटने लगती है।
चोकर युक्त आटा इस्तेमाल करे। गेहूं के आटे की रोटी की बजाय गेहूं, सोयाबीन और चने के मिश्रित आटे की रोटी ज्यादा फायदेमंद है।
* शक्कर, आलू और चावल में अधिक कार्बोहाइड्रेट होता है। ये चर्बी बढ़ाते हैं इसलिए ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली वस्तुओं से परहेज करें।
* सब्जियों और फलों में कैलोरी कम होती है, इसलिए इनका सेवन अधिक मात्रा में करें। केला और
चीकू न खाएं। इनसे मोटापा बढ़ता है।
*आंवले का इस्तेमाल करे। इसके लिएआंवले व हल्दी को बराबर मात्रा में ले और इनको पीसकर चूर्ण
बना लें। इस चूर्ण को छाछ के साथ लेंं।कमर एकदम पतली हो जाएगी।
*एक रिसर्च में पाया गया कि वजन कम करने का सबसे बेहतरीन तरीका मिर्च खाना है। मिर्च में पाए जाने वाले तत्व कैप्साइसिन से भूख कम होती है। इससे ऊर्जा की खपत भी बढ़ जाती है, जिससे वजन कंट्रोल में रहता है।अगर आपका मोटापा कम नहीं हो रहा हो तो खाने में कटी हुई हरी मिर्च या काली मिर्च को शामिल करके बढ़ते वजन पर काबू पाया जा सकता है।
*मूली का रस भी मोटापा घटाने में काफी गुणकारी होता है। दो बड़े चम्मच मूली का रस ले फिर उसमे बराबर मात्रा में शहद मिलाकर पानी के साथ पिएं। ऐसा करने से 1 माह के बाद ‪ मोटापा कम होने लगेगा।
* मालती की जड़ को पीसकर शहद मिलाकर खाएं और छाछ पिएं। प्रसव के बाद होने वाले मोटापे में
यह रामबाण की तरह काम करता हैै।
*हर रोज सुबह-सुबह एक गिलास ठंडे पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर पिएं। इस घोल को पीने से शरीर से
वसा की मात्रा कम होती है और मोटापा कम होने लगता है।
* गुग्गुल गोंद को दिन मे दो बार पानी में घोलकर या हल्का गुनगुना कर सेवन करने से वजन कम करने में
मदद मिलती है।
* हरड़ और बहेड़ा का चूर्ण भी मोटापा घटाने में काफी असरकारक नुस्खा है । एक चम्मच चूर्ण हर रोज 50 ग्राम परवल के जूस (1 गिलास) के साथ मिलाकर सेवन करे इससे आपका वजन तेजी से कम होने लगेगा।
*करेला भी मोटापा नियंत्रण में काफी असरकारक है। करेले की सब्जी खाने से भी वजन कम करने में मदद मिलती है।
* सौंठ, दालचीनी की छाल और काली मिर्च (3 -3 ग्राम) पीसकर चूर्ण बना लें। सुबह खाली पेट और रात
सोने से पहले पानी से इस चूर्ण को लें। आपका मोटापा कम होने लगेगा।
* 250 ग्राम मेथी ,100 ग्राम अजवायन और 50 ग्राम काली जीरी को पीसकर महीन चूर्ण बना ले। हर रोज गरम पानी से फाकी ले, में आपकी सारी चर्बी ख़त्म हो जाएगी और आप बहुत अच्छा महसूस करेंगे।

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 रजनी खेतान, इंदौर 

रजनी खेतान इंदौर  

बच्चे को जन्म देने के बाद अपने पुराने शेप मे वापस आना बहुत मुश्किल होता है पर असंभव नही। अगर आप प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़े हुये वज़न को कम करने के बारे में सोच रहीं हैं तो ये बात दिमाग मे ज़रूर रखें कि प्रेग्नेंसी के दौरान शरीर मे जमे एक्स्ट्रा फैट को किसी जादू की मदद से कम नही किया जा सकता पर पहले जैसा फिगर पाने और बॉडी को कुछ ही महीनों के भीतर शेप मे लाने के लिए तनाव ना लें। प्रसव के बाद देखभाल, प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़े हुये एक्सट्रा फैट को किसी जादू की मदद से कम नही किया जा सकता पर पहले जैसा फिगर पाने और बॉडी को कुछ ही महीनों के भीतर शेप में लाने के लिए ज़रूरत से ज़्यादा तनाव ना लें। प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़े हुये एक्सट्रा फैट को कम करना केवल सौंदर्य की दृष्टि से से ही महत्वपूर्ण नहीं होता बल्कि आपके भीतर के आत्मविश्वास और उससे भी ज़्यादा आपके शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी ज़रूरी होता है,पर खुद की सेहत को दांव पर लगा के नहीं। ये मायने नहीं रखता की प्रेग्नेंसी के बाद वेट लॉस करने के लिए क्या क्या कर रहे हैं, एक बात हमेशा ध्यान मे रखनी चाहिए की प्रसव के बाद आपका शरीर रिकवर हो रहा रहा है और आप बच्चे को दूध भी पिला रहीं हैं ऐसी हालत मे आपके स्वास्थ्य का गहरा प्रभाव आपके बच्चे के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।

प्रेग्नेंसी के बाद वेट लॉस
डॉक्टरों के अनुसार प्रसव के बाद वेट लॉस बहुत ही मुश्किल होता है क्योकि उस दौरान आप अपने शरीर बहुत अच्छी तरह ध्यान रखते हैं जिससे शरीर को बेहतर पोषण मिलता है। और साथ ही साथ वज़न कम करने का यह सही समय नहीं होता क्योंकि इस समय आप जिस अवस्था में होते हैं उस वक़्त आहार मे कमी करना या कम खाने के साथ कोई भारी भरकम एक्सरसाइज़ का यह उचित समय नही है। आपको अपने एक्सट्रा वज़न को कम करने के लिए नियमित रूप से एक सही दिशा निर्देश में आहार लेना चाहिए। इसके साथ ही संतुलित एक्सरसाइज़ के द्वारा आप प्रसव उपरांत बढ़े वज़न को कम कर सकते हैं। ध्यान रहे कि शारीरिक परिश्रम ज़रूरत से ज़्यादा ना हो। प्रेग्नेंसी के बाद आप अपने फिगर को कुछ ही महीनों मे किसी जादू कि मदद से वापस नही पा सकते बल्कि अपने आहार मे ध्यान देकर घर पर ही प्रेग्नेंसी वेट कम कर सकते हैं। इसके लिए आपको अपने आहार मे ऐसी ज़्यादा पोषक तत्वों से युक्त चीजों को स्थान देना होगा जो कम वसायुक्त हों। नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें ये बहुत ही ज़रूरी है। आप ये ना सोचें की एक्सरसाइज़ के लिए फ़ैन्सी और महंगी एसेसरीज़ की ज़रूरत है बल्कि आप ऐसे हर तरह की एक्सरसाइज़ जो आपके शरीर के लिए उपयुक्त हो,कर सकतीं हैं। यह आर्टिकल आपको उचित डाइट का सही तरीका बताने में मददगार होगा। साथ ही साथ आपको मालूम होगा की कैसे एक्सरसाइज़ के द्वारा आप बढ़े हुये वज़न को कम कर सकतीं हैं।

वेट लॉस टिप्स प्रसव के बाद
हमेशा इस बात को याद रखें की प्रसव के बाद आपके शरीर को और भी ज़्यादा तथा बेहतर पोषण की आवश्यकता होती है। आपके आहार में सभी ज़रूरी तत्व संतुलित मात्रा में उपस्थित होने चाहिए। आपके डॉक्टर ने आपको प्रेग्नेंसी के दौरान विटामिन्स और मिनरल्स सप्लीमेंट्स लेने की सलाह दी हो इसके साथ ही यह भी याद रखें की प्रेग्नेंसी की हालत मे कभी भूखे न रहें। इस वक़्त आपके शरीर को बेहतर पोषकतत्वों की ज़रूरत होती है तो ऐसे में दुग्धपान कराने वाली महिलाओं को ऐसा डाइट प्लान चुनना चाहिए जिसमे 2200 कैलोरी प्रतिदिन के हिसाब से मौजूद हो। पर ऐसी महिलाएं जो अपने बच्चे को दूध नहीं पिला रहीं हैं उन्हे केवल 1800 कैलोरी तक ही सीमित रहना चाहिए औए रोजाना के आहार मे इससे ज़्यादा कैलोरी नहीं लेनी चाहिए। अगर आप वास्तव मे प्रेग्नेंसी के बाद वेट लॉस के प्रति गंभीर हैं तो आपको हमारी इस अगली टिप को अपने डेली डाइट प्लान मे ज़रूर शामिल करना चाहिए।

रहें प्रोटीन से भरपूर
डिलीवरी के बाद वेट लॉस के लिए के लिए आपके आहार मे पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन का होना बहुत ही ज़रूरी है। जिससे शरीर को सही पोषण मिलता रहे। इसके साथ ही प्रोटीन की उचित मात्रा आपकी भूख को भी नियंत्रित करती है जिससे लंबे समय तक भूख का एहसास नहीं होता। अंडे, दाल, मछली और बीन्स प्रोटीन से भरपूर ऐसे पदार्थ हैं जो प्रसव उपरांत महिलाओं के लिए प्रोटीन का बेहतर स्त्रोत होते हैं। टूना, सोलमन और सार्डिन जैसी ठंडे पानी की मछलियाँ DHA से भरपूर होने की वजह से प्रोटीन का बहुत ही बढ़िया विकल्प हैं। खास तरह के फैटी एसिड Omega3 जो ब्रेन सेल्स और नर्वस सिस्टम को पोषण देते हैं। अंडे, दाल और बीन्स तो प्रोटीन के अच्छे स्त्रोत हैं ही, जो हड्डियों को मजबूती प्रदान करते हैं।

विटामीन्स और मिनरल्स लें
वजन कम करने के आसान तरीके, इस वक़्त आपको फल और सब्जियाँ बहुत ज़्यादा मात्रा में खाने पर ध्यान देना चाहिए, फिर चाहे आपको पसंद हो या ना हो। ब्रेस्टफीडिंग के बाद शरीर में विटामिन्स और मिनरल्स की बहुत कमी हो जाती है इसीलिए फल और सब्जियाँ पहले से भी ज़्यादा लेनी चाहिए। हरी पत्तेदार सब्जियाँ जैसे पालक, गोभी और शलजम को रोजाना आहार मे शामिल करें। इसके साथ ही गाजर, ब्रोकली, बीन्स और कद्दू जैसी चीजों को भी आहार मे शामिल करना चाहिए। और इनको नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। फलों सब्जियों के साथ साथ बादाम, अखरोट,औए मुनक्के का भी सेवन अच्छा होता है। ये गुणकारी तो होते ही हैं और शरीर को विटामिन्स तथा मिनरल्स प्रदान करने के लिए मदद भी करते हैं। फलों में स्ट्राबेरी, संतरा, अमरूद, खीरा तथा अंगूर लिए जा सकते हैं।

वेट लॉस करने का तरीका एक हैं थोड़ा थोड़ा खाएं
प्रेग्नेंसी के बाद वेट कम करने का प्रथम नियम है थोड़ा थोड़ा या टुकड़ों में खाये। यह स्वास्थय के लिए भी बहुत अच्छा होता है। यह सेहत के लिए अच्छा तो होता ही है और प्रेग्नेंसी के बाद शरीर का पोषण करने के लिए भी ज़रूरी होता है। हमेशा ध्यान दें, बहुत ज़्यादा मात्रा में भोजन करने से बचें। दिन में 5-6 बार खाएं। याद रखें की आप भूखे ना हों। और इस बीच भूख का एहसास हो रहा हो तो एक फल या कुछ ड्राई फ्रूट्स खा सकते हैं। पर हमेशा याद रखें भर पेट ना खाएं और जो भी खाएं सीमित मात्रा में ही लें।

स्तन के दूध की उत्पत्ति में सहायक सर्वश्रेष्ठ भोजन
दूध पिलाने वाली महिलाओं में डिहाइड्रेशन एक गंभीर रूप ले सकता है। पानी शरीर के अंदर के तरल पदार्थों को संतुलित रखता है। पानी शरीर के मेटाबोलिस्म को बढ़ाता है जो कैलोरी को बर्न करते है। तो बार बार पानी पीने की आदत डालें और इसे नज़रअंदाज़ ना करें। कई लोग मानते हैं की अगर वेट कम करना हो तो खाने के साथ पानी नहीं पीना चाहिए पर आपको एक सलाह है की खाने के कुछ मिनट बाद या पहले आप पानी पी सकते हैं।

दूध पिलाना है ज़रूरी
अगर आप बच्चे को दूध पिला रहीं हैं तो प्रेग्नेंसी के बाद वेट कम में समय कम लगता है। जी हाँ, ताज़ा स्टडीज़ मे ये तथ्य सामने आयें हैं की ब्रेस्टफीडिंग से एक्सट्रा कैलोरी जल्दी कम होती है। यह माँ के शरीर मे मौजूद दूध की मात्रा पर भी निर्भर करता है। इससे लगभग 500 कैलोरी प्रतिदिन के हिसाब से कम किया जा सकता है। तो अगर आप प्रसव के बाद(prasav ke bad) वेट कम करना चाह रहीं हैं तो अपने बच्चे को अच्छी तरह से दूध पिलाएँ। ऐसा माना जाता है की कैमोमाइल, मेथी के दाने और सौंफ जैसे गुणकारी हर्ब और मसाले प्रेग्नेंसी के बाद दूध का स्तर बढ़ाने मे मदद करते हैं। इन्हे अपने आहार में शामिल करें।

मोटापा कम करने के घरेलू नुस्खे में एक्सरसाइज़ है ज़रूरी
प्रेग्नेंसी के बाद वेट कम करना चाहते हैं तो उसके लिए उचित खानपान के साथ ब्रेस्टफीडिंग बहुत जरूरी है पर ये सिर्फ एक ही पहलू है।अच्छे फिगर के लिए आपको एक्सरसाइज़ तथा एरोबिक्स जैसे तरीके अपनाने होंगे। जिन्हे डेली रूटीन मे शामिल करके वेट कम कर सकते हैं। ये तरीके न केवल प्रेग्नेंसी के बाद वेट कम करते हैं बल्कि आपको डिप्रेशन और तनाव से भी मुक्त करते हैं। एक्सरसाइज़ के दौरान आपके शरीर से अच्छा महसूस करने वाले हार्मोन्स सीक्रेट करते हैं जो किसी भी तरह के मानसिक दबाव और डिप्रेशन को दूर भगाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक आपको रोजाना 150 मिनट एक्सरसाइज़ की ज़रूरत होती है जिसे आप 10-10 मिनट के स्लॉट मे भी कर सकते हैं। सैर पर जाना या बच्चे को गोद मे लेकर घूमना एक्सरसाइज़ की तरह ही लगता है पर इसके अलावा भी आपको शारीरिक मेहनत की ज़रूरत होती है। हल्की एक्सरसाइज़ आपके लिए बेहतर हो सकती है फ्री हैंड और एरोबिक्स बहुत अच्छा विकल्प हैं। हमेशा ध्यान रखें शरीर पर ज़्यादा तनाव ना दें बेहतर होगा की किसी भी तरह की एक्सरसाइज़ के पहले अपने डॉक्टर से परामर्श लें क्योंकि सीजेरियन डिलीवरी के मामले में कई तरह के फिजिकल मूवमेंट की मनाही होती है।

योगा प्रेग्नेंसी के बाद वेट लॉस करने का सबसे अच्छा तरीका है यह आपके शरीर पर कोई दबाव नहीं बनाता और कैलोरी बर्न कर आपके शरीर को वापस शेप मे लाता है। प्रेग्नेसी के बाद आपको किस तरह के आसान करने चाहिए या अपने लिए सही योगासन नही चुन पा रहें हों तो किसी ट्रेनर या डॉक्टर की मदद ले।

वजन कम करने के घरेलू उपाय में हैं फैट बर्निंग ड्रिंक्स
प्रेग्नेंसी के बाद तुरंत वेट करने के लिए फैट बर्निंग ड्रिंक्स बहुत सहायक हो सकते है, इन्हे बनाना भी आसान होता है क्योंकि इनमे कोई स्पेशल चीज़ें नही होती। ये ड्रिंक्स शरीर के मेटाबोलिस्म (Metabolism) को प्राकृतिक रूप बढ़ाने के लिए जाने जाते हैं जो आपके शरीर पर सही प्रभाव के साथ बॉडी को वापस शेप मे लाती है। आप इसी आसानी से घर पर ही बना सकते हैं। ½ चम्मच अदरक(Ginger) का जूस, 1/2 चम्मच कालीमिर्च(pepper) पाउडर औए 1 चम्मच शहद(honey) को 1 गिलास हल्के गरम पानी मे मिलाकर सुबह खाली पेट लें साथ ही रात को सोने के 1 घंटे पहले पीएँ यह ड्रिंक ना केवल प्रेग्नेंसी के बाद वेट कम करना है बल्कि आपको ज़्यादा एनर्जी भी देता है।

 

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रजनी खेतान इंदौर  

सही नींद है ज़रूरी बच्चे के जन्म के बाद उसे गोद मे लेकर अच्छी और पर्याप्त नींद लेना एक बड़ी चुनौती है। पर्याप्त नींद से वंचित होना एक कारण हो सकता है उचित वेट लॉस नही कर पाते। ऐसी महिलाएं जो अभी अभी माँ बनी हैं तो देखा गया है की 5 घंटे या उससे भी कम नींद लेने की वजह से उनकी प्रेग्नेंसी के दौरान बढ़ा मोटापा डिलीवरी के बाद भी बना रहता है। कम नींद की वजह से शरीर मे स्ट्रेस बढ़ाने वाले हार्मोन्स रिलीज़ होते हैं। जो वेट गेन को बढ़ावा देते हैं। इसीलिए बेहतर होगा की प्रसव के बाद आप पर्याप्त नींद लें वरना यह आपके वेट लॉसbके प्लान को बिगाड़ देगा।

वजन घटाने के उपाय में हैं सप्लीमेंट्स लें
जब भी आप प्रेग्नेंसी के बाद वेट कम करने की कोशिश कर रहें हो तो सही होगा के आप कोई आसान तरीका ही अपनाए। अपने भोजन में फिश ऑइल (Fish oil) सपलीमेंट्स और अलसी के बीज(Flax seeds)इस्तेमाल करें। यह आसान भी हैं और वेट कम करने का सरल तरीका है। इन दोनों ही में ओमेगा3 (Omega 3) नामक फैटी एसिड उपस्थित होटें हैं जो एक्सरसाइज़ की तुलना मे ज़्यादा तेज़ी से कैलोरी कम करते हैं।

वक़्त पर सोएँ
अगर आप समय पर सो रहें हैं तो समझ लीजिये की आप अपने प्रसव के बाद बढ़े वेट को कम कर रहें हैं। इसके साथ ही आपकी डाइट और आपकी नींद मे उचित समय अंतराल होना चाहिए। पेट भर भोजन के बाद तुरंत सो जाने से आप किसी हालत मे वज़न कम नही सकते। इसीलिए ध्यान रखें की किसी भी तरह का भारी आहार सोने के लगभग 3 घंटे पहले और अल्पाहार जैसे दूध या फल कम से कम 15 मिनट पहले लें।

रजनी खेतान इंदौर  

ये हम सब जानतें है कि चार प्रकार के ब्लड ग्रुप होते हैं A, B, AB और O, जिन्हें A+, A- , B+ , B- , AB+, AB-, O+ और O- समूहों में बांटा गया हैl परन्तु आप इस बात से वाकिफ नहीं होंगे कि ये ब्लड ग्रुप हमारे स्वभाव के बारे में भी बताते हैंl

*क्या अपने कभी अपना ब्लड ग्रुप चेक करवाया है*, अगर नहीं तो करवा लें क्योंकि इस लेख के बाद आपको अपने आसपास के लोगों के बारे में और भी काफी जानकारी मिल जाएगीl वैज्ञानिक तौर पर भी यह प्रमाणित किया जा चुका है कि अगर व्यक्ति अपनी डाइट ब्लड ग्रुप के हिसाब से ले तो कम बिमारियों का शिकार होंगे और अंदरूनी तौर पर भी मजबूत रहेंगेl वास्तव में ब्लड ग्रुप के आधार पर लोगों की पर्सनालिटी को बताना जापानी ज्योतिष विद्या का हिस्सा है।
*सबसे पहले शुरू करते है O ब्लड ग्रुप से :*

*O+ ब्लड ग्रुप*
- इस ग्रुप के लोग दूसरों की मदद करने में विश्वास रखते हैंl
- इनका मन आईने की तरह साफ होता है और दूसरों की सहायता में यह अपना जीवन भी बिता सकते हैंl
- ये काफी मिलनसार और बातें करने वाले इंसान होते हैंl
- ये काफी हसमुख होते हैं और मस्त रहते हैंl
*खामियां*
- यह लोग नये विचारों को आसानी से स्वीकार नहीं कर पाते हैंl
- खुद के अलावा दुसरो को ज्यादा अहमियत नहीं देते हैंl
O+ ब्लड ग्रुपवाले लोग उन सभी को ब्लड दे सकते हैं, जिनका ब्लड ग्रुप पॉज़िटिव है और O+ ब्लड ग्रुपवाले O- ग्रुपवाले से ब्लड ले सकते हैंl

*O- ब्लड ग्रुप*
- इस ग्रुप के लोग भी लोगो की मदद करने में विश्वास रखते हैंl
- वे मिलनसार और हसमुख होते हैं और इनकी सोच संकरी होती हैl
*खामियां*
- इस ग्रुप वाले लोग दूसरों के बारे में अधिक सोचते नहीं है क्योंकि खुद के अलावा दूसरों के बारें में इनको खयाल नही रहता हैl
- ये लोग नए विचारों को भी आसानी से स्वीकार नही कर पाते हैंl
- ये लोग बिना लाग-लपेट की बातें करते हैं इसलिए आलोचना के शिकार होते हैंl
O- ब्लड ग्रुपवाले लोगों को यूनिवर्सल डोनर कहा जाता हैl इस ग्रुप के लोग किसी भी ब्लड ग्रुप के लोगों को ब्लड दे सकते है परन्तु केवल O- ग्रुप से ही ब्लड ले सकते हैंl
*A+ ब्लड ग्रुप*
- इस ब्लड ग्रुप के लोगों में अच्छे लीडर होने के गुण होते हैं और अच्छी नेतृत्व क्षमता भी देखी जाती हैंl
- ये सबको साथ लेकर चलते हैंl
- सबका विश्वास भी हासिल करने में यकीन रखते हैंl
- ये लोग काफी बुद्धिमान होते हैंl
*खामियां*
- इस ग्रुप के लोग बिना लाग-लपेट की बातें करते हैं इसलिए आलोचना के शिकार होते हैंl
- इन्हें बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता है परन्तु यह क्षणिक होता हैl
- बहुत खर्चीले होते हैंl
A+ और AB+ ग्रुपवालों को ब्लड दे सकते हैंl परन्तु क्या आप जानते उन्हें A, O+ और O- ब्लड चढ़ाया जा सकता हैl

*A-ब्लड ग्रुप*
- इस ग्रुप के लोग मेहनती होते हैं और इनको लगता है कि मेहनत से हर काम सफल होता हैl
- यह कठिन से कठिन काम करने में पीछे नहीं हटते हैं और लगातार काम करने से कोई परहेज़ भी नही करते हैंl
- कुछ भी काम करने से पहले प्लान करते हैं, इसीलिए सफल होते हैंl
- अन्दर से काफी मजबूत होते हैं और छवि भी आकर्षक होती हैl
*खामियां*
- इन लोगों को बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता है परन्तु यह क्षणिक होता हैl
- ये लोगों के बहकावे में जल्दी आ जाते हैंl
- ये लोग पैसे भी बहुत खर्च करते है l
A, AB+ और AB- ग्रुपवालों को ब्लड दे सकते हैं l परन्तु A और O- से ब्लड ले सकते है l
*B+ ब्लड ग्रुप*
- इस ग्रुप के लोग इमोशनल होते हैंl
- ये लोग दूसरों की मदद करने में पीछे नहीं हटते हैंl यहाँ तक की दूसरों के लिए बलिदान भी दे सकते हैंl
- रिश्तों को काफी अहमियत देते हैंl
- ये लोग काफी खुबसूरत और स्मार्ट होते हैंl
*खामियां*
- बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता है परन्तु यह क्षणिक होता हैl
- पैसे बहुत खर्च करते हैं l
B और AB+ को ब्लड दे सकते हैंl परन्तु B, O+ और O- से ब्लड ले सकते हैंl
जानें दुनिया का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र कहाँ स्थित है
*B-ब्लड ग्रुप*
- ये लोग खुबसूरत और स्मार्ट होते हैंl
- काफी मेहनती होते हैं और अपनी मेहनत से हर चीज पा लेते हैं।
खामियां
- इस ब्लड ग्रुप के लोगों की प्रवृत्ति ठीक नहीं मानी जाती हैंl
- ये लोग खुद के बारे में ही सोचते हैं, इसीलिए स्वार्थी होते हैंl
- इस ग्रुप के लोग किसी की सहायता करने में भी विश्वास नही रखते हैंl
B, AB+ और AB- को ब्लड दे सकते हैंl B और O- से ब्लड ले सकते हैं l

*AB+ ब्लड ग्रुप*
- इस ग्रुप के लोग जेंटलमेन और केयरिंग होते हैंl
- आमतोर पर रिज़र्व रहते हैंl
- बुद्धिमान भी होते हैंl
*खामियां*
- इस ब्लड समूह वाले लोगों को आसानी से समझा नहीं जा सकता है, क्योंकि इनकी प्रकृति कभी एक जैसी नहीं होती हैl
- अगर ये लोग किसी भी बात पर मन बना लेते है तो फिर बदलते नहीं हैl
इस ब्लड ग्रुप के लोगों को यूनिवर्सल रेसिपिएंट्स कहा जाता है, क्योंकि इन्हें किसी भी ग्रुप का ब्लड चढ़ाया जा सकता हैl ये AB+ को ही ब्लड दे सकते हैं l

*AB- ब्लड ग्रुप*
- इस ग्रुप के लोग बहुत बुद्धिमान होते हैं और इनका दिमाग काफी तेज चलता हैl ये उन बातों को भी समझ जातें हैं जिन्हें लोग नज़रंदाज़ कर देते हैंl
*खामियां*
- इन लोगों के दोस्त बहुत होते हैं लेकिन ये जल्द किसी पर भरोसा नहीं करते हैंl
- अगर ये कोई निर्णय लेते है तो बार-बार नहीं बदलते हैंl
AB+ और AB- दोनों को ब्लड दे सकते है l A, B, AB और O- से ब्लड ले सकते हैं l
इस लेख से हमें यह जानकारी मिलती है कि कैसे ब्लड ग्रुप लोगों के स्वभाव को प्रभावित करता हैं और हम विभिन्न व्यक्तियों के ब्लड ग्रुप को जानकर बिना देखे ही उनके स्वभाव के बारे में अंदाज़ा लगा सकते हैl इसके अलावा आपको यह भी जानकारी प्राप्त हो गई होगी कि किस ब्लड ग्रुप के व्यक्ति को किस ब्लड ग्रुप का ब्लड चढ़ाया जा सकता है l

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रजनी खेतान इंदौर  

रजनी खेतान इंदौर  

एक सुगंधित मसाला है इलायची।
सांसों की दुर्गंध को दूर करें इलायची।
रोजाना एक इलायची का सेवन करें।

जिनकी सांसों से दुर्गंध आती है वह लोग रोजाना सिर्फ एक इलायची खाकर अपनी सांसों की दुर्गंध को दूर कर सकते हैं। क्‍योंकि इसमें बहुत सारे एंटी-बैक्‍टीरियल गुण होते हैं जो हमारे मुंह के अंदर मौजूद बैक्‍टीरिया को जड़ से खत्‍म कर देता है। इसलिए मुंह से आने वाली गंध, सांस की बदबू, मुंह के छाले, मसूडो मे दर्द या सूजन आदि मे बहुत अधिक लाभ देती है।

इलायची रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह शरीर से विषैले तत्‍वों को बाहर कर फ्री रेडिकल्‍स का मुकाबला करती है।

यह हमारी पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। पाचन तंत्र में मौजूद किसी भी प्रकार की समस्‍या को खत्‍म करता है।

इलायची प्राकृतिक रूप से गैस को खत्म करती है। यह पाचन को बढ़ाने, पेट की सूजन को कम करने व दिल की जलन को खत्म करने का काम करती है।

अगर आपको पाचन तंत्र से जुड़ी कोई भी समस्‍या है तो रोजाना एक इलायची का सेवन करें।

सर्दी के मौसम में बहुत सारे लोगों को सर्दी जुकाम और गले में खराश की शिकायत रहती है। अगर आप रात को खाना खाने के बाद सिर्फ एक इलायची अच्‍छे से चबाकर खाते हैं और ऊपर से गुनगुना पानी पीते हैं तो निश्चित रूप से आपकी यह समस्‍या दूर हो जाती है। इस उपाय को करने के बाद आपको किसी भी एलोपैथी दवा लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

इलायची से कोलेस्‍ट्रॉल भी कम किया जा सकता है। अगर आप रोजाना ए‍क इलायची को अच्‍छे से चबा-चबाकर खाते हैं तो यह हृदय संबधी रोगो मे लाभ मिलता है। यह हमारे ब्‍लड सर्कुलेशन को नियंत्रित करता है जिससे शरीर की बीमारियां दूर हो जाती है खासतौर पर दिल की धमनियों पर जमा वसा को दूर करता है।

इसके अलावा इलायची हमारे पैरो की सूजन, पेट के दर्द, हाजमा, एसीडिटी, सिर दर्द और रक्तचाप को नियंत्रित करता है साथ ही खून की कमी को भी पूरा करती है।

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रजनी खेतान इंदौर  

 


हमारे स्वास्थ्य को स्वस्थ रखने में फल और फूलों का बहुत बड़ा योगदान है। चिरौंजी, एक प्रकार का फल होता है जिसकी पेड़ की जड़, फल, पत्तियां और गोंद आदि सभी चीजे हमारी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होती है। चिरोंजी में भरपूर मात्रा में विटामिन ए, बी1 बी2, फाइबर और बहुत सारे पोषक तत्व मौजूद होते है।
- हरी घास में चलना आँखों के लिए है फायदेमंद
चिरौंजी के सेवन के फायदे:
# प्रोटीन की अधिक मात्रा होने के कारन अगर रोज इसका सेवन किया जाये तो यह हमारे शरीर से प्रोटीन की कमी को पूरा करता है।
# अगर सर्दी-जुकाम हो जाये तो घी में दो चम्मच पिसी हुई चिरौंजी को मिलाकर छोंक लें। और फिर इसे एक गिलास दूध में मिलाकर अच्छे से पका लें। फिर जब यह दूध थोड़ा ठंडा हो जाये तो इसे पिए।
# रोज एक चम्मच चिंरोंजी पाउडर को एक ग्लास गर्म दूध में मिलाकर पीने से कमजोरी दूर हो जाती है।
# मुंह में छाले होने की समस्या में चिरौंजी को पीसकर उसमे शहद मिलकर मुंह के छालो पर लगाने से आराम मिलता है। इसके अलावा मुंह में छाले हो जाने पर चिंरोंजी को चबा-चबा खाने से भी आराम मिलता है।

रजनी खेतान, इंदौर 

माइग्रेन से बचने के लिए घरेलू उपचार
1) अगर माइग्रेन हो तो सबसे पहले हल्के हाथों से मालिश करनी चाहिए। हाथों के स्पर्श से मिलने वाला आराम किसी दवा से ज्यादा असर करता है। सरदर्द होने पर कंधों और गर्दन की भी मालिश करनी चाहिए। इससे दर्द से राहत मिलती है।
2) एक तौलिये को गर्म पानी में डुबाकर, उस गर्म तौलिये से दर्द वाले हिस्सों की मालिश कीजिए। कुछ लोगों को ठंडे पानी से की गई इसी तरह की मालिश से भी आराम मिलता है।
3) माइग्रेन में बर्फ के टुकडों का भी प्रयोग किया जा सकता है।
4) सिर दर्द होने पर अपनी सांस की गति को थोड़ा धीमा कर दीजिए, लंबी सांसे लेने की कोशिश बिलकुल मत कीजिए। आराम से सांस लेने से आपको दर्द के साथ होने वाली बेचैनी से भी राहत मिलेगी।
5) माइग्रेन में दर्द होने पर कपूर को घी में मिलाकर सिर पर हल्के हाथों से मालिश कुछ देर तक मालिश कीजिए।
6) बटर में मिश्री को मिलाकर खाने से माइग्रेन में राहत मिलती है।
7) नींबू के छिलके को पीसकर, इसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन में होने वाले सिरदर्द से राहत मिलती है और माइग्रेन ठीक होता है।
8) माइग्रेन में अरोमा थेरेपी सिरदर्द से राहत दिला सकती है। अरोमा थेरेपी में हर्बल तेलों का प्रयोग किया जाता है। इसमें हर्बल तेलों को एक तकनी‍क के माध्यपम से हवा में फैला दिया जाता है और उसके बाद भाप के जरिए तेलों को चेहरे पर डाला जाता है।
9) माइग्रेन में सिर दर्द होने पर धीमी आवाज में संगीत सुनना बहुत फायदेमंद होता है। दर्द से राहत पाने के‍ लिए बंद कमरे में हल्की आवाज में अपने पसंदीदा गानों को सुनिए, सिरदर्द कम होगा और आपको राहत मिलेगी।

 

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रजनी खेतान, इंदौर 

अल्सर का शाब्दिक अर्थ होता है – घाव

* हाइपर एसिडिटी होना अल्सर का प्रथम चरण हैं, कभी भी एसिडिटी को इग्नोर ना करे। यदि आपको बार-बार या लगातार आमाशय या पेट में दर्द हो तो अपने चिकत्सक की सलाह अवश्य लें क्योंकि अक्सर यही अल्सर के लक्षण होते हैं। अन्य लक्षणों में मितली आना, उल्टी आना, गैस बनना, पेट फूलना, भूख न लगना और वजन में गिरावट शामिल हैं।

* यह शरीर के भीतर कहीं भी हो सकता है; जैसे – मुंह, आमाशय, आंतों आदि में| परन्तु अल्सर शब्द का प्रयोग प्राय: आंतों में घाव या फोड़े के लिए किया जाता है| यह एक घातक रोग है, लेकिन उचित आहार से अल्सर एक-दो सप्ताह में ठीक हो सकता है|

* अधिक मात्रा में चाय, कॉफी, शराब, खट्टे व गरम पदार्थ, तीखे तथा जलन पैदा करने वाली चीजें, मसाले वाली वस्तुएं आदि खाने से प्राय: अल्सर हो जाता है| इसके अलावा अम्लयुक्त भोजन, अधिक चिन्ता, ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, कार्यभार का दबाव, शीघ्र काम निपटाने का तनाव, बेचैनी आदि से भी अल्सर बन जाता है| पेप्टिक अल्सर में आमाशय तथा पक्वाशय में घाव हो जाते हैं| धीरे-धीरे ऊतकों को भी हानि पहुंचनी शुरू हो जाती है| इसके द्वारा पाचक रसों की क्रिया ठीक प्रकार से नहीं हो पाती| फिर वहां फोड़ा बन जाता है |

* पेट में हर समय जलन होती रहती है| खट्टी-खट्टी डकारें आती हैं| सिर चकराता है और खाया-पिया वमन के द्वारा निकल जाता है| पित्त जल्दी-जल्दी बढ़ता है| भोजन में अरुचि हो जाती है| कब्ज रहता है| जब रोग बढ़ जाता है तो मल के साथ खून आना शुरू हो जाता है| पेट की जलन छाती तक बढ़ जाती है| शरीर कमजोर हो जाता है और मन बुझा-बुझा सा रहता है| रोगी चिड़चिड़ा हो जाता है| वह बात-बात पर क्रोध प्रकट करने लगता है|

अगर अल्सर का समय पर इलाज न करे तो बड़ा रूप ले सकता है।

अल्सर कई प्रकार का होता है – अमाशय का अल्सर, पेप्टिक अल्सर या गैस्ट्रिक अल्सर। अल्सर उस समय बनते हैं जब खाने को पचाने वाला अम्ल अमाशय की दीवार को क्षति पहुंचाता है, ये एसिड इतना खतरनाक होता हैं के इसकी तीव्रता आप इस से लगा सकते हैं के पेट में बनने वाला ये एसिड लोहे के ब्लेड को भी गलने की क्षमता रखता हैं। पोषण की कमी, तनाव और लाइफ-स्टाइल को अल्सर का प्रमुख कारण माना जाता था।

पोहा अल्सर के लिए बहुत फायदेमंद घरेलू नुस्खा है, इसे बिटन राइस भी कहते हैं। पोहा और सौंफ को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लीजिए, 20 ग्राम चूर्ण को 2 लीटर पानी में सुबह घोलकर रखिए, इसे रात तक पूरा पी जाएं। यह घोल नियमित रूप से सुबह तैयार करके दोपहर बाद या शाम से पीना शुरू कर दें। इस घोल को 24 घंटे में समाप्त कर देना है, अल्सर में आराम मिलेगा।

पत्ता गोभी और गाजर को बराबर मात्रा में लेकर जूस बना लीजिए, इस जूस को सुबह-शाम एक-एक कप पीने से पेप्टिक अल्सर के मरीजों को आराम मिलता है।

अल्सर के मरीजों के लिए गाय के दूध से बने घी का इस्तेमाल करना फायदेमंद होता है।

गाय के दूध में एक चम्मच हल्दी डाल कर नित्य पीने से 3 से 6 महीने में कैसा भी अलसर हो, सही होते देखा गया हैं।

अल्सर के मरीजों को बादाम का सेवन करना चाहिए, बादाम पीसकर इसका दूध बना लीजिए, इसे सुबह-शाम पीने से अल्सर ठीक हो जाता है।

सहजन (ड्रम स्टिक) के पत्ते को पीसकर दही के साथ पेस्ट बनाकर लें। इस पेस्ट का सेवन दिन में एक बार करने से अल्सर में फायदा होता है।

आंतों का अल्सर होने पर हींग को पानी में मिलाकर इसका एनीमा देना चाहिये, इसके साथ ही रोगी को आसानी से पचने वाला खाना चाहिए।

अल्सर होने पर एक पाव ठंडे दूध में उतनी ही मात्रा में पानी मिलाकर देना चाहिए, इससे कुछ दिनों में आराम मिल जायेगा।

छाछ की पतली कढ़ी बनाकर रोगी को रोजाना देनी चाहिये, अल्सर में मक्की की रोटी और कढ़ी खानी चाहिए, यह बहुत आसानी से पच जाती है।

कच्चे केले की सब्जी बनाकर उसमें एक चुटकी हींग मिलाकर खाएं| यह अल्सर में बहुत फायदा करती है|

अत्यधिक रेशेदार ताजे फल और सब्जियों का सेवन करें जिससे कि अल्सर होने की सम्भावना कम की जा सके या उपस्थित अल्सर को ठीक किया जा सके।

मुलेठी बहुत गुणकारी औषधि है। मुलेठी के प्रयोग करने से न सिर्फ आमाशय के विकार बल्कि गैस्ट्रिक अल्सर के लिए फायदेमंद है। मुलेठी का चूर्ण ड्यूओडनल अल्सर के अपच, हाइपर एसिडिटी आदि पर लाभदायक प्रभाव डालता है। साथ ही अल्सर के घावों को भी तेजी से भरता है। यह मीठा होता है इसलिए इसे ज्येष्ठीमधु भी कहा जाता है। असली मुलेठी अंदर से पीली, रेशेदार एवं हल्की गंधवाली होती है। कोई भी समस्या न हो तो भी कभी-कभी मुलेठी का सेवन कर लेना चाहिए आँतों के अल्सर ,कैंसर का खतरा कम हो जाता है ।

पालक विभिन्न उदर रोगों में लाभ प्रद है| आमाशय के घाव छालेऔर आँतों के अल्सर में भी पालक का रस लाभ प्रद है| कच्चे पालक का रस आधा गिलास नित्य पीते रहने से कब्ज- नाश होता है| पायरिया रोग में कच्ची पालक खूब चबाकर खाना और पत्ते का रस पीना हितकर है

नारियल पानी बहुत बढ़िया हैं, आप इसको निरंतर हर रोज़ पीजिये।

सुबह खाली पेट तुलसी के 5 पत्ते खाए।

गेंहू के जवारों का रस अमृत सामान हैं, अलसर के रोगियों के लिए। रोज़ सुबह इसका सेवन करे, अधिक जानकारी के लिए हमारी ये पोस्ट ज़रूर पढ़े।

रात को सोने से पहले एक चम्मच अर्जुन की छाल को 250 मिली पानी में पकाये, इस में आधा चम्मच मुलेठी का चूर्ण भी डाल ले और आधा रहने पर इसको छान कर पी ले। ये ३ महीने तक करे।

अलसर के लिए विशेष चूर्ण।

आंवला 100 ग्राम, मिश्री 500 ग्राम, सौंफ 100 ग्राम, मुलेठी 100 ग्राम, हरड़ 50 ग्राम, अजवायन 50 ग्राम, धनिया 50 ग्राम, जीरा 50 ग्राम, हींग 5 ग्राम। इन सब को मिक्स कर के एक चम्मच गाय के दूध से बनी हुयी दही की छाछ से नियमित सुबह और शाम को ले। 3 महीने निरंतर ले। आपको बहुत फायदा होगा।

मरीज को हर दो घंटे में कुछ न कुछ खाते रहना चाहिए।

मरीज को इनसे परहेज करना चाहिए।

कॉफी और कार्बोनेटेड पेय पदार्थों की संख्या सीमित करें या पूर्णतयः समाप्त कर दें। इन सभी पेय पदार्थों का आमाशय की अम्लीयता में तथा अल्सर के लक्षणों को गम्भीर बनाने में सहभागिता होती है।

अपने अल्सर पूर्णतयः ठीक होने तक शराब के सेवन न करें।

मैदे से बनी हुयी किसी भी वास्तु का सेवन न करे, फ़ास्ट फ़ूड या जंक फ़ूड गलती से भी न खाए।

अल्सर के रोगी को ऐसा आहार देना चाहिये जिससे पित्त न बने, कब्ज और अजीर्ण न होने पाये। इसके अलावा अल्सर के रोगी को अत्यधिक रेशेदार ताजे फल और सब्जियों का सेवन करना चाहिए, जिससे अल्सर को जल्दी ठीक किया जा सके।

अधिक मात्रा में चाय, कॉफी, शराब, खट्टे व गरम पदार्थ, तीखे तथा जलन पैदा करने वाली चीजें, मसाले वाली वस्तुएं आदि खाने से प्राय: अल्सर हो जाता है| इसके अलावा अम्लयुक्त भोजन, अधिक चिन्ता, ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, कार्यभार का दबाव, शीघ्र काम निपटाने का तनाव, बेचैनी आदि से भी अल्सर बन जाता है| पेप्टिक अल्सर में आमाशय तथा पक्वाशय में घाव हो जाते हैं| धीरे-धीरे ऊतकों को भी हानि पहुंचनी शुरू हो जाती है| इसके द्वारा पाचक रसों की क्रिया ठीक प्रकार से नहीं हो पाती| फिर वहां फोड़ा बन जाता है |

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रजनी खेतान, इंदौर 

शरीर में खून की कमी से बहुत बीमारियां लग सकती हैं। जिस वजह से इंसान कमजोर हो जाता है और उसका शरीर बीमारियों से लड़ नहीं पाता है। इसलिए महिलाओं और पुरूषों को शरीर में खून की मात्रा बढ़ाने के लिए इन आयुवेर्दिक उपायों को अपनाना चाहिए।

1. तिल और शहद

दो घंटे के लिए 2 चम्मच तिलों को पानी में भिगों लें और बाद में पानी से छानकर इसका पेस्ट बना लें। अब इसमें 1 चम्मच शहद मिलाएं और दिन में दो बार सेवन करें।

2. काफी और चाय खतरनाक

काफी और चाय का सेवन कम कर दें। एैसा इसलिए क्योंकि ये चीजें शरीर को आयरन लेने से रोकते हैं।

3.ठंडा स्नान

दो बार दिन में ठंडे पानी से नहाए और सुबह नहाने के बाद सूरज की रोशनी में बैठें।

4. अंकुरित भोजन

आप अपने भोजन में गेहूं, मोठ, मूंग और चने को अंकुरित करके उसमें नींबू मिलाकर सुबह का नाश्ता लें।

5. आम

पके आम के गुदे को मीठे दूध के साथ सेवन करें। एैसा करने से खून तेजी से बढ़ता है।

6. मूंगफली और गुड़

शरीर में खून की कमी को दूर करने के लिए मूंगफली के दानों को गुड़ के साथ चबा-चबा कर सेवन करें।

7. सिंघाड़ा

सिंघाड़ा शरीर में खून और ताकत दोनो को बढ़ाता है। कच्चे सिंघाड़े को खाने से शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर तेजी से बढ़ता है।

8. मुनक्का, अनाज, किशमिश, दालें और गाजर

मुनक्का, अनाज, किशमिश, दालें और गाजर का नियमित सेवन करें और रात को सोने से पहले दूध में खजूर डालकर उसको पीएं।

9. फलो का सेवन

अनार, अमरूद, पपीता, चीकू, सेब और नींबू आदि फलो का अधिक से अधिक सेवन करें।

10. आंवले और जामुन का रस

आंवले का रस और जामुन का रस बराबर मात्रा में मिलाकर सेवन करने से हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ता है।

11. टमाटर का रस

एक गिलास टमाटर का रस रोज पीने से भी खून की कमी दूर होती है। इसलिए टमाटर का सूप भी बनाकर आप ले सकते हो।

12. हरी सब्जिया

बथुआ, मटर, सरसों, पालक, हरा धनिया और पुदीना को अपने भोजन में जरूर शामिल करें।

13. फालसा

फालसे का शर्बत या फालसे का सेवन सुबह शाम करने से शरीर में खून की मात्रा जल्दी बढ़ती है।

14. लहसुन

शरीर में खून को बढ़ाने के लिए नियमित रूप से लहसुन और नमक की चटनी का सेवन करे। यह हीमोग्लोबिन की कमी को दूर करता है।

15. सेब का जूस

सेब का जूस रोज पीएं। चुकंदर के एक गिलास रस में अपने स्वाद के अनुसार शहद मिलाकर इसे रोज पीएं। इस जूस में लौह तत्व ज्यादा होता है.

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रजनी खेतान, इंदौर 

किशमिस ड्राई फ्रूट्स का ही हिस्सा है। ज्यादातर लोग इसे खाना पसंद करते है। किशमिश हमारी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होते है। इससे शरीर का विकास अच्छे से होता है। अगर वहीं किशमिश के पानी की बात करें तो इससे भी स्वास्थ्य संबंधी कई तरह की बीमारियां दूर होती है। किशमिश को रोज को पानी में भिगोकर रख दें और सुबह इसका पानी पीएं। फिर देखिए इससे आप कैसे एकदम स्वस्थ लगेंगे।
1. आंखों की रोशनी तेज
इस पानी में विटामिन ए, बीटा केरोटिन होते हैं, जो आंखों के लिए फायदेमंद तत्व होते है। इसलिए रोज सुबह किशमिश का पानी पीएं। इससे आंखे कमजोर नहीं होगी।
2. कमजोरी दूर
किशमिश के पानी में अमीनो एसिड्स होता है, जो बॉडी को एनर्जी देने का काम करता है। इससे थकान भी दूर होती है।
3. कब्ज ठीक
किशमिश पानी में फूलकर नैचुरल लेक्सेटिव का काम करती है। रोज सुबह खाली पेट किशमिश का पानी पीने से पेट की अच्छे से सफाई हो जाती है।
4. एसिडिटी में राहत
किशमिश में मौजूद सॉल्यूबल फाइबर्स पेट की सफाई करके गैस और एसिडिटी से राहत दिलाते है।
5. किडनी स्वस्थ
किशमिश के पानी में पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स होते हैं, जो बॉडी से टॉक्सिन्स निकाल कर किडनी को हैल्दी बनाने का काम करते है।
6. खून की कमी पूरी
किशमिश के पानी में आयरन, कॉपर और बी कॉम्पलेक्स की भरपूर मात्रा होती है। यह खून की कमी को पूरी करके ब्लड सेल्स को हैल्दी बनाता है।
7. कैंसर से बचाव
किशमिश के पानी में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट्स शरीर के सेल्स को हैल्दी बनाकर कैंसर जैसी बीमारियों से हमे बचा कर रखते है।

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रजनी खेतान, इंदौर