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नई दिल्ली: तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा है. वहीं इस मामले पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) नरम रुख अखतियार करते हुए कहा है कि तीन तलाक से बचने के लिए काजियों को एडवाइजरी जारी की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक पर चल रही सुनवाई का आज छठा दिन था.

अबतक क्या-क्या हुआ ?

सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक पर सुनवाई के दौरान पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने सरकार से सवाल किया कि अगर वो तीन तलाक को गलत मानती है तो इसके लिए खुद कानून क्यों नहीं बनाती.

3 तलाक स्वीकार न करने का अधिकार क्यों नहींकोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कल मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से ये सवाल किया कि क्या निकाहनामे में ऐसी शर्त शामिल की जा सकती है कि महिला तीन तलाक स्वीकार नहीं करेगी? इस पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर बोर्ड ऐसी सलाह जारी करता है, तब भी इस बात की गारंटी नहीं हो सकती कि निचले स्तर पर काज़ी इस पर अमल करेंगे. फिर भी बोर्ड के सदस्य इस सुझाव पर चर्चा करेंगे.

3 तलाक की तुलना राम की जन्मस्थली से करने पर विवाद

इससे पहले परसों कपिल सिब्बल ने तीन तलाक की तुलना भगवान राम के जन्मस्थान से करते हुए कहा था कि जैसे राम लला का जन्म अयोध्या में होना हिंदुओं की आस्था का विषय है वैसे ही तीन तलाक मुसलमानों की आस्था का, इसलिए उसे संवैधानिक नैतिकता से नहीं जोड़ना चाहिए. सिब्बल के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया हुई.

संबित पात्रा ने कपिल सिब्बल पर साधा निशाना

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्विटर पर लिखा, ‘’सिब्बल जी, तीन बार राम बोलो तो दुःख दूर होता है.  तीन बार तलाक़ बोलो तो दुःख शुरू होता है. यही फ़र्क़ है राम और तलाक़ में.’’

3 तलाक अल्पसंख्यक बनाम बहुसंख्यक का मुद्दा नहीं- सरकार

वहीं कोर्ट में सरकार का पक्ष रख रहे एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कल कहा कि इस मसले को बहुसंख्यक बनाम अल्पसंख्यक बनाने की कोशिश गलत है. ये महिलाएं अल्पसंख्यकों में भी अल्पसंख्यक है. वो पीड़ित हैं. बात उनके हक की है.

रोहतगी ने कहा,  ‘’तीन तलाक को अवैध करार देने से इस्लाम पर कोई असर नहीं पड़ेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि ये धर्म का अनिवार्य हिस्सा नहीं है. जिन मुस्लिम देशों ने इस व्यवस्था को खत्म किया, वहां इस्लाम पर अमल जारी है.’’

तीन तलाक महिलाओं के हक का मसला है- सरकार

एटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सती प्रथा उन्मूलन, छुआछूत जैसे मसलों को उठाया और कहा कि समाज में सबको मौलिक अधिकार मिल सके इस दिशा में काम किया जाना चाहिए. इस पर कोर्ट ने पूछा कि इनमें से कितने विषय हैं जिनमें अदालत को दखल देना पड़ा हो. आखिर सरकार खुद तीन तलाक पर कानून क्यों नहीं बनाती है?

इसके जवाब में एटॉर्नी जनरल ने कहा, ‘’हम वो सब कुछ करेंगे जो ज़रूरी है. अभी मसला कोर्ट में है. ये देखना है कि कोर्ट क्या करता है.’’

पिछले पांच दिनों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में तीन तलाक के पक्ष और विपक्ष में दलीलें रखी जा चुकी हैं. आज सुप्रीम कोर्ट ने ये संकेत दिए कि आज ये सुनवाई पूरी की जा सकती है. ऐसान होने के बाद ही तीन तलाक पर कोर्ट के फैसले की उम्मीद की जा सकती है

नई दिल्ली.केंद्रीय पर्यावरण राज्य मंत्री अनिल माधव दवे का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे 61 साल के थे। गुरुवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें दिल्ली के एम्स में एडमिट कराया गया। जहां दवे ने आखिरी सांस ली। नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर इसे निजी क्षति बताया है। दवे 2009 से मध्य प्रदेश से राज्यसभा के मेंबर थे। लंबे वक्त से आरएसएस से जुड़े रहे। नर्मदा और पर्यावरण की बेहतरी के लिए उन्होंने काम किया। दवे चाहते थे कि हो सके तो मेरी याद में सिर्फ पेड़ लगाएं और नदियां बचाएं। इसबीच, केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन को पर्यावरण मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया। 
 
- दोपहर करीब 2 बजे दवे की पार्थिव देह एम्स से सफदरजंग स्थित उनके सरकारी बंगले पर लाई गई।
- जहां नरेंद्र मोदी, वाइस प्रेसिडेंट हामिद अंसारी, लोकसभी स्पीकर सुमित्रा महाजन, महेश शर्मा, कलराज मिश्र, धर्मेंद्र प्रधान, प्रभात झा, कैलाश विजयवर्गीय, डॉ. हर्षवर्धन समेत कई नेताओं और मंत्रियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
- बीजेपी सूत्रों ने बताया कि शाम तक दवे की पार्थिव देह निजी विमान से भोपाल लाई जाएगी और अंतिम दर्शन के लिए प्रदेश बीजेपी ऑफिस में रखा जाएगा।
 
नर्मदा के किनारे होगा अंतिम संस्कार
- 23 जुलाई, 2012 को लिखा दवे का एक लेटर सामने आया है। जिसमें उन्होंने कहा, ''मेरा दाह संस्कार बांद्राभान (होशंगाबाद) में नर्मदा के किनारे किया जाए। मेरी याद में कोई स्मारक, प्रतियोगिता, पुरस्कार, प्रतिमा न हों। बल्कि पेड़ लगाएं और नदियों-तालाबों को बचाने की कोशिश करें तो खुशी होगी।''
- इसबीच, सीएम शिवराज सिंह ने कहा कि दवे की इच्छा के मुताबिक, शुक्रवार को नर्मदा किनारे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
- बता दें कि अनिल दवे का जन्म 6 जुलाई, 1956 को उज्जैन के पास बड़नगर में हुआ। उन्होंने गुजराती कॉलेज, इंदौर से एम.कॉम किया। वे संघ प्रचारक रहे और शादी नहीं की थी।
 
मोदी ने कहा- कल शाम ही हमने मीटिंग की
- पीएम ने शोक जताते हुए कहा, "दोस्त और एक आदर्श साथी के तौर पर अनिल दवे जी के निधन से दुखी हूं। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे। लोक हित के काम के लिए दवेजी को याद रखा जाएगा। कल शाम ही वो मेरे साथ थे। हमने कुछ पॉलिसी इश्यू पर चर्चा भी की थी। उनका जाना मेरे लिए निजी क्षति है।"
- प्रेसिडेंट प्रणब मुखर्जी ने कहा, ''केंद्रीय मंत्री अनिल दवे के निधन से दुख पहुंचा। उनके परिवार और शुभचिंतकों के लिए मेरी संवेदनाएं।''
- सोनिया गांधी ने कहा, ''दवेजी के आकस्मिक निधन से धक्का लगा। वह अच्छे वक्ता और जेंटलमैन थे। अपने नम्र स्वभाव के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उन्हें मेरी श्रद्धांजलि।''
 
दो सेशन मेंसंसद नहीं पहुंचे थे
- मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दवे संसद के पिछले दो सेशन में नहीं पहुंचे थे। तबीयत ठीक नहीं होने के चलते छुट्टी पर थे। सिर्फ मेडिकल चेकअप के लिए संसद आते थे।
- उनकी गैर-मौजूदगी में प्रकाश जावड़ेकर सदन में कामकाज संभाल रहे थे।
 
देश ने मां नर्मदा का सपूत खो दिया: शिवराज सिंह
- शिवराज सिंह चौहान ने कहा, ''बड़े भाई, घनिष्ठ मित्र अनिल माधव दवे के असामयिक निधन से हैरान हूं। उनके रूप में देश ने सच्चा देश भक्त और मां नर्मदा का सपूत खो दिया।''
- प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, ''दवेजी एक सच्चे प्रकृति प्रेमी थे। पर्यावरण की रक्षा और विकास के लिए उनके काम को याद रखा जाएगा।''
- राजनाथ सिंह ने कहा, ''कैबिनेट के साथी दवेजी के लिए निधन से गहरा धक्का लगा। वह पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को लेकर काफी संवेदनशील और बहुत जुझारू थे। उनके परिवार के लिए मेरी संवेदनाएं।''
- रमन सिंह ने कहा, ''अनिल दवेजी के अचानक निधन से दुखी और हैरान हूं। शोक संतप्त परिवार के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति दें।"
- बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा, ''मैंने दवेजी के साथ मिलकर मध्य प्रदेश में बीजेपी के लिए काम किया। वो बहुत अच्छे लेखक, चिंतक और पर्यावरण के जानकार थे। नर्मदा संरक्षण के लिए उन्होंने कई अहम काम किए। शरीर साथ नहीं देता था तो हेलिकॉप्टर से नर्मदा की परिक्रमा की। उनके निधन से देश ने एक बड़ा नेता खो दिया।''
- कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, "दवेजी के निधन से मध्य प्रदेश ने एक श्रेष्ठ पर्यावरणविद् और सुलझा हुआ राजनेता खो दिया, मेरी विनम्र श्रद्धांंजलि।"
 
कैसा रहा राजनीतिक करियर?
- दवे ने इंदौर के कॉलेज से मास्टर डिग्री ली। यहां वे स्टूडेंट यूनियन के प्रेसिडेंट चुने गए। इसके बाद जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से जुड़ गए थे।
- इसके बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचारक बने। बीजेपी को मध्य प्रदेश की सत्ता में वापस लाने में अनिल दवे का भी अहम योगदान रहा।
- 2009 से अब तक मध्य प्रदेश से राज्यसभा मेंबर थे। मोदी सरकार में जुलाई, 2016 में वन और पर्यावरण राज्य मंत्री बने।
- दवे की कोशिशों से कुछ दिन पहले सरसो की जीएम फसल को पर्यावरण मंत्रालय ने कारोबारी खेती की मंजूरी दी थी। क्लाइमेट चेंज पर पेरिस समझौते में भारत का पक्ष रखने के लिए दवे ने अहम भूमिका निभाई।

नयी दिल्ली,18 मई  जासूसी के आरोप में पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को सुनाई गई फांसी की सजा पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय द्वारा आज लगाई राेक से भारत में खुशी की लहर दौड़ गई है और मोदी सरकार को इससे एक बड़ी कूटनीतिक जीत हासिल हुई है।
विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने आज ट्वीट करते हुए कहा ‘ इस फैसले से ने केवल जाधव के परिवार को बल्कि समस्त भारतवासियों को बड़ी राहत मिली है।
श्रीमती स्वराज ने इस मामले में विशेष पहल की थी जिसकी वजह से इस मामले को हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में उठाया जा सका था

(वार्ता)

लखनऊ 02 मई उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ और मंत्रियों के शपथ ग्रहण के बाद पहली बार लखनऊ आ रहे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष अमित शाह का आज यहां योगी मंत्रिमंडल नागरिक अभिनन्दन करेगा।
पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति की दो दिवसीय बैठक के समापन समारोह में आ रहे श्री शाह का मुख्यमंत्री और मंत्रीगण नागरिक अभिनन्दन करने के साथ ही उनके साथ बैठक करेंगे। सूत्रों के अनुसार श्री शाह दोपहर बाद ढाई बजे बैठक स्थल कन्वेंशन सेंटर पहुंचेंगे । बैठक को सम्बोधित करने के बाद वह मुख्यमंत्री के सरकारी आवास आ जायेंगे। वहां वह मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। बैठक में मंत्रियों को वह नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यो को जनता के बीच लेे जाने की अपील कर सकते हैं।

नागपुर, 01 मई  नयी दिल्ली से बेंगलुरू के लिए उड़ान भरी एयर इंडिया के एक विमान को चिकित्सा आपातकाल की वजह से नागपुर ले जाया गया।
सूत्रों ने आज यहां बताया विमान संख्या एआई 803 दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा से करीब साढ़े छह बजे बेंगलुरु के लिए उड़ान भरी लेकिन लगभग एक घंटे तक यात्रा करने के बाद इसका स्थानांतरण एक चिकित्सा आपातकाल के कारण नागपुर किया गया।

(वार्ता)

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने अनंतनाग में लोकसभा उपचुनाव रद्द करते हुए कहा कि फिलहाल की स्थिति चुनाव कराने योग्य नहीं है. यहां 25 मई को चुनाव होना था. कश्मीर घाटी में बिगड़े हालात की वजह से यह फैसला लिया गया है. चुनाव आयोग अनंतनाग के लिए सेना की 600 से ज्यादा कंपनी चाहता है, लेकिन गृहमंत्रालय 300 कंपनी से ज्यादा देने को तैयार नहीं है. गृह मंत्रालय ने चुनाव आयोग को बता दिया था कि वह अनंतनाग के उपचुनाव के लिए सिर्फ़  30,000 अर्धसैनिक बल भेज सकता है. चुनाव आयोग ने मंत्रालय से 74000 सुरक्षाकर्मी मई 12 तक इलाक़े में तैनात करने को कहा था. एक वरिष्ठ अफसर ने एनडीटीवी से कहा कि हमने आयोग को बता दिया है कि सिर्फ़ 300 कंपनियां भेज सकते हैं, इससे ज़्यादा नहीं.

चुनाव आयोग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से कहा है कि उसे 747 कंपनियां चाहिए जो 12 मई तक उसे मिल जानी चाहिए ताकि तैनाती हो सके. एक कंपनी में 100 सुरक्षाकर्मी होते हैं. चुनाव आयोग की ये मांग इसलिए अद्भुत थी, क्योंकि हाल में पांच राज्यों में चुनाव ख़त्म हुए हैं और सभी राज्यों में कुल मिलाकर 70000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे. सिर्फ़ उत्तर प्रदेश में 403 विधानसभा की सीटें हैं और 80 लोकसभा की.

श्रीनगर इलाक़े में 9 अप्रैल को उपचुनाव के लिए मतदान हुआ था लेकिन हिंसा की वारदातों को देखते हुए अनंतनाग में उपचुनाव टाल दिया गया था. गृह मंत्रालय के मुताबिक़ औसतन संसदीय चुनाव के लिए 10 कंपनियां कम्पनिया तैनात की जाती हैं यानी 1000 सुरक्षा कर्मी. केन्द्रीय गृह मंत्रालय चुनाव आयोग से कहने वाला है कि इतनी जल्दी ये संभव नहीं है. आयोग को उसे कुछ समय देना होगा. आज की तारीख़ में 150 कम्पनियां घाटी में तैनात हैं यानी 15000 अर्ध सैनिक बल. कुल मिलाकर अर्ध सैनिक बलों की संख्या दस लाख के क़रीब है लेकिन वो अलग अलग राज्यों में तैनात हैं. हालांकि PDP चुनाव को टालने के लिए आयोग को पहले ही चिट्ठी लिख चुकी है.

प्रधानमंत्री मोदी ने देश में मीडिया पर प्रचार के लिए सौ दो सौ करोड़ रुपये नही पूरे 11 अरब रुपये से ज्यादा खर्च किए. मीडिया को बिकाऊ कहने वाले बीजेपी के समर्थकों के लिए ये खबर झटका देने वाली हो सकती है. अलग अलग वेबसाइट पर जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक आरटीआई के मुताबिक ये जानकारी सामने आई है. नोटबंदी को लेकर विपक्ष के कठघरे में खड़ी भाजपा सरकार इस खुलासे के बाद और घिर सकती है. आर.टी.आई.के मुताबिक मोदी सरकार ने पिछले ढाई सालों के भीतर अपने प्रचार-प्रसार पर 11 अरब रुपए से ज्यादा खर्च किए हैं.
ग्रेटर नोएडा के आर.टी.आई. एक्टिविस्टे रामवीर तंवर ने 29 अगस्त 2016 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से सूचना के अधिकार के जरिए पूछा था कि केंद्र में प्रधानमंत्री मोदी ने सरकार बनाने से लेकर अगस्ते 2016 तक विज्ञापन पर कितना सरकारी पैसा खर्च किया है. तीन माह बाद जब आर.टी.आई.के जरिए मिले इस जवाब को देखकर आप जरूर चौंक जाएंगे. इसमें बताया गया है कि पिछले ढाई साल में मोदी सरकार ने विज्ञापन पर ग्यारह अरब रुपए से भी ज्यादा खर्च कर चुकी है.
आर.टी.आई. के जरिए मंत्रालय से मिले विज्ञापन की जानकारी में बताया गया कि ब्रॉडकास्डह, कम्यु—निटी रेडियो, इंटरनेट, दूरदर्शन, डिजिटल सिनेमा, प्रोडक्शान, टेलीकास्ट, एसएमएस के अलावा अन्य खर्च शामिल हैं. इनमें पिछले तीन सालों में मोदी सरकार की ओर से करीब ग्यारह अरब से भी ज्यादा रुपया खर्च किया गया है.

प्रचार प्रसार के इन माध्यमों पर किया गया इतना खर्च

SMS –
2014 – 9. 07 करोड़
2015 – 5.15 करोड़
अगस्त 2016 तक – 3. 86 करोड़

इंटरनेट –
2014 – 6. 61 करोड़
2015 – 14.13 करोड़
अगस्त 2016 तक – 1.99 करोड़

ब्राडकास्ट –
2014 – 64. 39 करोड़
2015 – 94.54 करोड़
अगस्त 2016 तक – 40.63 करोड़

कम्युनिटी रेडियो –
2014 – 88.40 लाख
2015 – 2.27 करोड
अगस्त 2016 तक – 81.45 लाख


डिजिटल सिनेमा
2014 -77 करोड़
2015 – 1.06 अरब
अगस्त 2016 तक – 6.23 करोड़

टेलीकास्ट –
2014 – 2.36 अरब
2015-2.45 अरब
अगस्त 2016 तक – 38.71 करोड़

प्रोडक्शन –
2014 – 8.20 करोड़
2015 – 13.90 करोड़
अगस्त 2016 तक -1.29 करोड़

तीन साल में हर साल इतना किया खर्च

2014 – एक जून 2014 से 31 मार्च 2015 तक करीब 4.48 अरब रुपए खर्च

2015 – 1 अप्रैल 2015 से 31 मार्च 2016 तक 5.42 अरब रुपए खर्च

2016 – 1 अप्रैल 2016 से 31 अगस्त 2016 तक 1.20 अरब रुपए खर्च


इस मामले पर आर.टी.आई. एक्टीविस्ट रामवीर तंवर ने कहा कि सुना करते थे कि मोदी चाय के पैसे भी खुद दिया करते थे. ऐसे में मन में विज्ञापन को लेकर सवाल उठने पर आर.टी.आई.लगाई थी. अंदाजा ये था मोदी के विज्ञापनों पर 5 से 10 करोड़ रुपए का खर्चा किया होगा. लेकिन, ढाई साल में 1100 करोड़ रुपए खर्च करने का पता लगने के बाद से निराशा महसूस हुई है. उन्होंने कहा कि जब ढाई साल में 1100 सौ करोड़ का खर्च आया है केवल विज्ञापन पर तो पूरे पांच साल में मोदी जी के विज्ञापनों पर 3000 हजार करोड़ का खर्च आ सकता है. इसकी तुलना उन्होंने अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी की और कहा कि वहां सरकार के चुनाव प्रचार में 800 करोड़ रुपए खर्च किए हैं. जबकि हमारे देश में एक केंद्र सरकार इतना पैसा खर्च कर दिया . अगर इस पैसों को जनता के काम में लगाया जाता तो, ज्यादा बेहतर होता.

नई दिल्ली 27 अप्रैल। वरिष्ठ लेखक, विचारक भानु धमीजा की चिंतनपरक पुस्तक "भारत में राष्ट्रपति प्रणाली" का लोकापर्ण कल शुक्रवार 28 अप्रैल 2017 को सांय 6.00 बजे मुख्य स्पीकर हॉल, कॉंस्टीटूशन क्लब, रफ़ी मार्ग नई दिल्ली में किया जायेगा ।

लोकसभा सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शांता कुमार की अध्यक्षता में इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि लोकसभा एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. शशि थरूर एवं विशिष्ट अतिथि संविधान विशेषज्ञ एवं लोकसभा के पूर्व महासचिव डॉ. सुभाष कश्यप होंगे ।

भानु धमीजा की लिखित पुस्तक "भारत में राष्ट्रपति शासन" एक नजर से.....
भानु धमीजा की लिखित पुस्तक भारत में राष्ट्रपति शासन पुस्तक का लोकार्पण कल होगा
भारत द्वारा संसदीय प्रणाली अपनाने का विरोध समय-समय पर डॉ. अंबेडकर, महात्मा गांधी, एम.ए. जिन्ना, सरदार पटेल और अन्य कई शीर्ष नेताओं ने किया था। इतिहास ने उन्हें सही साबित किया है। भारत की विविधता, आकार और सांप्रदायिक जातिगत विभाजन के कारण देश को एक वास्तविक संघीय ढांचे की आवश्यकता थी – केंद्रीकृत एकल नियंत्रण की नहीं, जो कि संसदीय प्रणाली प्रस्तुत करती है।

भानु धमीजा की पुस्तक ‘भारत में राष्ट्रपति प्रणाली: कितनी जरूरी, कितनी बेहतर’ पहली बार यह रोमांचक कहानी बताती है कि भारतीय सरकार की मौजूदा प्रणाली वास्तव में अस्तित्व में कैसे आई। और कैसे यह भारत की समस्याओं का मूल कारण बन गई है। वर्षों के गहन शोध पर आधारित यह पुस्तक भारत के भविष्य को लेकर एक आमूल पुनर्विचार की जोशीली दलील पेश करती है। यह मात्र पर्दाफाश नहीं कि गलत क्या है, बल्कि एक हल प्रस्तुत करने का गंभीर प्रयास है।

प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘भारत में राष्ट्रपति प्रणाली’ कई गंभीर व मूलभूत प्रश्न ही नहीं उठाती, बल्कि भारतीय राजनीतिक इतिहास के कई चौंकाने वाले रहस्य भी उजागर करती है। इसके साथ ही पुस्तक बताती है कि कैसे अमरीका की राष्ट्रपति प्रणाली हमारे देश में संसदीय प्रणाली का आदर्श विकल्प साबित हो सकती है।

भारत में राष्ट्रपति प्रणाली : कितनी जरूरी, कितनी बेहतर’, की कई गणमान्य हस्तियों ने मुक्तकंठ से प्रशंसा की है। सांसद व लेखक शशि थरूर, लोकसभा सांसद एवं विचारक शांता कुमार एवं प्रसिद्ध लेखक कुलदीप नैय्यर आदि के मुताबिक किताब में तर्क कुशलता से प्रस्तुत किये गए हैं। उनका मानना है कि पुस्तक मील का पत्थर साबित होगी। भारत के विशिष्ट संवैधानिक विद्वान सुभाष कश्यप ने इसे अति उत्तम पुस्तक व बेहतरीन शोध करार दिया है।

लेखक भानु धमीजा का कहना है कि भारत में संसदीय शासन प्रणाली के कारण एक महान समाज दुर्बल हो रहा है। भारत के नागरिक जीवन की दयनीय स्थिति और अप्रतिष्ठित सरकारी संस्थाओं से जूझ रहे हैं। इसका परिणाम है, वे नैतिक रूप से लगातार कमजोर हो रहे हैं। उन्होंने कहा है कि इस स्थिति पर शोक मनाने या केवल टिप्पणी करने के बजाय उन्होंने कुछ ठोस करने का निर्णय किया। और इसी संकल्प का परिणाम है- ‘भारत में राष्ट्रपति प्रणाली: कितनी जरूरी, कितनी बेहतर।’ भानु धमीजा पुस्तक को भारत को बचाने का एक पवित्र और हृदयस्पर्शी प्रयास करार देते हैं।

नई दिल्ली। भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (सेबी) के साथ विवाद में सहारा समूह प्रमुख सुब्रत रॉय ने आज सुप्रीम कोर्ट को लिखित आश्वासन (अंडरटेकिंग) दिया कि वह इस वर्ष 15 जून तक सेबी-सहारा खाते में 1500 करोड़ रुपए जमा करा देंगे।

रॉय ने शीर्ष अदालत के समक्ष 552 करोड़ रुपए का पोस्ट-डेटेड चेक (पीडीसी) भी जमा कराया, जिसे 15 जुलाई तक भुनाया जा सकता है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के लिए 19 जून की तारीख मुकर्रर करते हुए रॉय को उस दिन भी अदालत में उपस्थित रहने का आदेश दिया।

पिछले 21 मार्च को हुई सुनवाई में न्यायालय ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए कहा था कि अगर सहारा समूह ने 17 अप्रैल तक 5,092.64 करोड़ रुपए सेबी के पास जमा नहीं कराये तो फिर वह एंबी वैली को नीलाम करने की कार्रवाई शुरू कर देगा।

 न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए के सिकरी और न्यायमूर्ति रंजन गोगई की पीठ ने पिछले 17 अप्रैल को हुई सुनवाई को सहारा समूह की पुणे स्थित एंबी वैली को नीलाम करने का आदेश दिया था और रॉय को व्यक्तिगत तौर पर गुरुवार को अदालत में पेश होने का आदेश दिया था।

न्यायालय के आदेश पर अमल करते हुए रॉय गुरुवार को अदालत के समक्ष पेश हुए। पीठ ने कहा कि यदि सुनवाई की अगली तारीख तक 1500 करोड़ रुपए सेबी के खाते में नहीं आए तो रॉय को फिर से तिहाड़ जेल जाना पड़ेगा।