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अंजना टंडना की पुस्तक कैवल्य और जोशना बैनर्जी आडवानी की पुस्तक सुधानपूर्णा का लोकार्पण कल

दीपक अरोड़ा स्मृति पांडुलिपि प्रकाशन योजना-2019 के तहत चयनित सुश्री अंजना टंडना की पुस्तक कैवल्य और सुश्री जोशना बैनर्जी आडवानी की पुस्तक सुधानपूर्णा का प्रकाशन किया गया है। इन पुस्तकों का लोकार्पण एवं रचनाकारों का सम्मान समारोह दिनांक 14 सितम्बर 2019 को अपराह्न 2 से 4 बजे बोधि सभागार, बोधि प्रकाशन, सी-46, सुदर्शनपुरा इंडस्ट्रियल एरिया मेन रोड, बाईस गोदाम, जयपुर में आयोजित होगा। संस्था की मीडिया प्रभारी शिवानी शर्मा ने बताया कि दीपक अरोड़ा स्मृति पांडुलिपि प्रकाशन योजना बोधि प्रकाशन की एक महत्वपूर्ण योजना है। ये इस योजना का चौथा वर्ष है । दीपक अरोड़ा एक प्रतिभाशाली कवि- जिन्हें कविता तो बहुत मिली पर उम्र बहुत कम। अल्पायु में उनका जाना, कविता के एक नये तेवर का असमय ठहर जाने जैसा है। उनकी कविताएं, जिनमें बहुधा पंजाबी मुहावरे वाली मारक शक्ति है- एकदम अलग ज़मीन पर कही गई हैं। खास बात ये कि वे अपनी ज़मीन खुद तैयार करते हैं, और उसमें प्रेम की पौध भी वे स्वयं लगाते हैं। यह पौध पुष्पित होगी, इसमें संदेह नहीं। 'वक्त के होंठों पर एक प्रेमगीत', 'समुन्दर इन दिनों' और 'अंतिम वार्ता के अवशेष' दीपक अरोड़ा के प्रकाशित कविता संग्रह हैं। दीपक की स्मृति को अक्षुण्ण रखने के बहुविध कार्यक्रमों के साथ ही 'दीपक अरोड़ा स्मृति पांडुलिपि प्रकाशन योजना' आरंभ की गई है। इसके तहत उन रचनाकारों से पांडुलिपियां आमंत्रित की जाती हैं, जिनकी अब तक किसी भी विधा में कोई स्वतंत्र पुस्तक प्रकाशित न हुई हो। ऐसा करने के पीछे भाव यह कि 'पहली पुस्तक की खुशी' इस योजना के माध्यम से रचनाकार को मिले। इस योजना के तहत पूर्व में प्रकाशित पुस्तकें इस प्रकार हैं- 2016 : जामुनी आंखों वाली एक लड़की और जेठ के बादल (अमित आनंद), पत्थरों के देश में देवता नहीं होते (अर्चना कुमारी), चांदमारी समय (अस्मुरारी नंदन मिश्र), अयोध्या और मगहर के बीच (कर्मानन्द आर्य), आवाज़ भी देह है (संजय कुमार शांडिल्य)। 2017 : पुनपुन और अन्य कविताएं (प्रत्यूष चन्द्र मिश्रा), मैं तुम्हें लिखना चाहूं अगर (प्रियंका वाघेला)। 2018 : गेहूं का अस्थि विसर्जन व अन्य कविताएं (अखिलेश श्रीवास्तव), तीसरी कविता की अनुमति नहीं (सुदर्शन शर्मा) प्रकाशित हुईं। इस वर्ष (2019)- 'कैवल्य' (अंजना टंडन), 'सुधानपूर्णा (जोशना बैनर्जी आडवानी) योजना में प्रकाशनार्थ चुनी गई हैं। प्रतिवर्ष कम से कम दो कविता-पांडुलिपियां चयनित किया जाना प्रस्तावित है। योजना के संबंध में कोई दावा या बड़ा वादा नहीं है। प्रयास रहेगा कि कुछ और अच्छी पुस्तकें इस योजना के बहाने से प्रकाशित हों। पांडुलिपि आमंत्रित किए जाने के समय से ही हमारा यह स्पष्ट मत था कि यहां किसी प्रकार से कवियों को श्रेष्ठतर या हीनतर मानने का भाव नहीं होगा। केवल अपनी सीमाओं के तहत चयन का प्रयास किया जाएगा। यह रेखांकित करना जरूरी है कि योजना का परिणाम तैयार करते समय किसी संग्रह को 'रिजेक्ट' करने का दंभ नहीं रहा। प्रकाशन की योजना केवल अपेक्षित संख्या में संग्रह चयनित करने की थी, निर्णायकों ने अपने विवेक से जो चुने, वे इस योजना में शामिल किए गए। ऐसा करने में बहुत अच्छी कविताओं के संग्रह भी छूट गए हो सकते हैं, इसे योजना और आयोजकों की सीमा ही माना जाना चाहिए; रचना या रचनाकार की कमी नहीं। इस योजना में पांडुलिपि भेजने वाले सभी रचनाकारों, योजना के पिछले वर्षों में निर्णायक रहे— सुधा अरोड़ा, डॉ. जीवन सिंह, मनोज छाबड़ा, ओमपुरोहित 'कागद', अर्चना वर्मा, नन्द भारद्वाज, निरंजन श्रोत्रिय, डॉ. पद्मजा शर्मा, मृदुला शुक्ला, अरुण देव, मणि मोहन, विनोद पदरज और इस वर्ष के निर्णायकगण अनामिका, ध्रुव गुप्त, गोविन्द माथुर, रुचि भल्ला। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ कवि एवं दूरदर्शन के पूर्व निदेशक कृष्ण कल्पित होंगे एवं अध्यक्षता प्रसिद्ध कथाकार तथा जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. सत्यनारायण करेंगे। कार्यक्रम का संयोजन फिल्मकार और प्रतिष्ठित लेखक अविनाश त्रिपाठी करेंंगे।